googlenews
instructions for kids
आजकल के बदलते परिवेश और व्यस्त जीवनशैली में बच्चों की घर में , स्कूल में या फिर स्कूल जाते समय स्कूल की बस में सुरक्षा करना एक बड़ा प्रश्न है। ज्यादातर पेरेंट्स वर्किंग होते हैं और उनके पास इतना समय नहीं होता है कि  वो बच्चों को स्कूल छोड़ने जाएं और स्कूल से लेने जाएं।  ऐसे में उन्हें बच्चों के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट या स्कूल की ही बस या कैब लगवानी पड़ती है। जब तक बच्चा छोटा है तब तक उसको स्कूल बस से घर तक लाने और घर से बस तक ले जाने के लिए कोई बड़ा साथ में होता है लेकिन जैसे -जैसे बच्चा बड़ा हो जाता है वो अपने आप बस तक जाने में समर्थ हो जाता है और पेरेंट्स उसकी सेफ्टी को लेकर निश्चिन्त हो जाते हैं। लेकिन कई बार एक छोटी सी लापरवाही बड़ी घटना को अंजाम दे देती है जैसे किडनेपिंग या फिर कोई और दुर्घटना। ऐसे में पेरेंट्स को चाहिए कि  बच्चे को समय -समय पर स्कूल बस में और स्कूल बस से घर आने में  सुरक्षित रहने के तरीकों के बारे में बताते रहें। 
 

 

 

आपका बच्चा बस स्टॉप से लेकर घर तक का रास्ता ठीक से जानता है या नहीं ये बात सुनिश्चित कर लें।  बच्चे को सबसे ज्यादा सुरक्षित रास्ते से ही घर आने को बोलें।  बहुत ज्यादा भीड़-भाड़ या फिर बहुत ज्यादा खाली रास्ते से बच्चों को आने के लिए मना करें। सबसे ज्यादा अच्छा फुटपाथ में चलना होता है लेकिन उस रास्ते में फुटपाथ नहीं हैं तो बच्चों को सड़क के लेफ्ट साइड चलने को बोलें ताकि वो  आने वाले यातायात को स्पष्ट रूप से देख सकें। । 
 
 
बस स्टॉप पर अपने बच्चों को याद दिलाएं कि उन्हें बस में जाने के लिए एक व्यवस्थित लाइन में प्रतीक्षा करनी चाहिए और बस स्टॉप पर किसी तरह की हड़बड़ी न करें। बच्चों को यह भी सिखाएं  कि अगर बस नहीं आती है तो क्या करें। पिक अप टाइम से  मिनट पहले ही बस स्टॉप पर पहुँच जाएं। 
 
 बस में कैसे चढ़ना और उतरना है।  दरवाज़े खुलने के बाद ही बस से उतरने के लिए आगे बढ़ें और चलती बस में अपनी सीट पर ही  बैठे रहे। सीढ़ियों से चढ़ते और उतारते समय रेलिंग पकड़कर ही चढ़े। बारिश के मौसम में बहुत ध्यान से चढ़ें और उतरें। 
 
स्कूल बस में सुरक्षित रहने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका है कि सीट के भीतर सुरक्षित रूप से सामने की ओर  बैठे रहें। शरीर के किसी भी हिस्से को कभी भी बस की खिड़की से बाहर नहीं निकलना चाहिए! तुरंत निकासी के लिए बस के  गलियारों को  स्पष्ट रखा जाना चाहिए। कोशिश ये करें की बच्चा बस में बैठते समय पूरी तरह से अवेयर हो जिससे कि  उसे आस -पास की गतिविधियों का अंदाजा रहे।