बच्चों को कुछ समझाना हमेशा आसान नहीं होता। हाल के कुछ वर्षों में देखा गया है कि न सिर्फ अभिभावक बल्कि शिक्षकों की भी यही शिकायत है कि बच्चों को कुछ समझाना अब बहुत चुनौतीपूर्ण काम हो गया है। बच्चे न सिर्फ बहस करते हैं, विशेष तौर पर किशोरावस्था में बल्कि वे हठी और अडिय़ल रवैया भी दिखाते हैं, जिससे उनके कुछ और समझने का दायरा बेहद सीमित हो जाता है। आप किसी जिद्दी बच्चे को कुछ समझाने की कोशिश कर रही हैं तो बातचीत के दौरान निम्न बिंदुओं को ध्यान में रखें-
 
विकास के स्तर को ध्यान में रखें
अभिभावक और शिक्षक के तौर पर हमें उनके विकास के स्तर का ध्यान रखना चाहिए। विकास के प्री-ऑपरेशनल चरण के दौरान बच्चों में अहंकार सबसे बड़ी चुनौती होता है। विकास के इस चरण में बच्चों की प्रवृति सभी बातों को अपने नजरिए से देखने की होती है। यह व्यवहार सामान्य तौर पर 2 से 7 वर्ष की आयु वाले बच्चों में देखने को मिलता है। ऐसे बच्चों को अक्सर अतार्किक समझ लिया जाता है।
 
समझदारी से सुनें उनका नजरिया
कोशिश करें कि आप पूरा समय देकर उनका नजरिया जानें। बच्चे अहंकारी हो सकते हैं विशेष तौर पर जब उनका शारीरिक और मानसिक विकास हो रहा हो। वयस्कों के मुकाबले बच्चों को बोलकर अपनी बात समझाने में अधिक समस्या होती है. इसलिए बच्चों को अपनी बात रखने और जाहिर करने का पर्याप्त मौका दें।
 
समस्याओं को ढूंढने की कोशिश
बच्चे को सिर्फ जिद्दी या अताॢकक करार देने से पहले यह समझना बहुत जरूरी है कि उन्हें किस तरह की समस्या हो रही है। हमें उनके समक्ष मौजूद समस्याओं को ढूंढने की कोशिश करनी चाहिए और उनमें किसी भी प्रकार के व्यावहारिक या विकास संबंधी विकार की संभावना को भी ध्यान रखना चाहिए।
 
प्रतिभागी रवैया अपनाएं
बच्चों से सीधे इस बारे में बात करने के बजाय बेहतर होगा कि आप बच्चे को अनुशासन प्रक्रिया में शामिल करें। बच्चे की उम्र और उसके विकास के स्तर के आधार पर इस प्रक्रिया में उन्हें शामिल करने से बदलने की उनकी प्रतिबद्धता और इच्छा बढ़ जाती हैै और उनकी हठधर्मिता में भी काफी हद तक कमी आती है।
 
नियमित रहें
आपके व्यवहार में नियमितता बेहद महत्वपूर्ण है। अगर आप अवांछित व्यवहार को लेकर अपने रवैये पर कायम नहीं रहेंगी तो किसी भी प्रकार का व्यावहारिक बदलाव लाने की आपकी कोशिश सफल नहीं हो सकेगी।
 
अपनी कोशिशों से सीखें
आपके लिए अपनी असफल कोशिशों से सीख लेना जरूरी है। अगर अभी तक कुछ भी कारगर नहीं हुआ है तो उसी रणनीति को बार-बार अपनाने से प्रभावी नतीजे नहीं निकलेंगे।
 
लचीलापन रखें
ध्यान रखें कि बच्चे बहुत सख्त लोगों की बात नहीं सुनते। एक ही रणनीति या रवैया सभी बच्चों के लिए नहीं अपनाया जा सकता है। हर बच्चा अलग होता है, इसलिए आपको अविवेकी बच्चों से निपटते समय इनोवेटिव और नई रणनीति बनानी चाहिए।
 
हर बात समझाने से बचें
बच्चों को किसी भी नियम एवं नियमन के पीछे का तर्क समझाना जरूरी है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि आप हर बात के पीछे का तर्क उन्हें समझाने लगें। जरूरी नहीं कि बच्चा आपके तर्क से सहमत हो, इसलिए बच्चे को समझाने की रणनीति उसके विकास स्तर को ध्यान में रखकर ही बनाएं। अत्यधिक वाद-विवाद को छोडक़र अगली स्थिति की ओर बढ़ जाना आप दोनों के लिए कारगर साबित होगा।
 
कभी नरम कभी सख्त
बच्चों के साथ विवाद की स्थिति को ध्यान से चुनें क्योंकि एक अभिभावक के तौर पर आपको यह ध्यान रखने की जरूरत है कि कई बार आपको उनकी बातों को मानना भी पड़ेगा। किशोरावस्था में बच्चों को यह सीखने की जरूरत होती है कि जिंदगी हमेशा उनके मन के मुताबिक नहीं चलेगी। 
 
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