Busy Varanasi ghats with boats, temples, pilgrims, riverfront life
Sacred rituals, culture, history explored across two days

Summary: वाराणसी एक प्राचीन सांस्कृतिक शहर

वाराणसी एक प्राचीन सांस्कृतिक शहर होने के साथ साथ बहुत ही बड़ा धार्मिक स्थल भी है। इस नगर का प्राचीन नाम काशी है जिसे वर्तमान में न्यू काशी भी कहकर सम्बोधित किया जाता है।

Varanasi Two Day Itinerary: देश के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में गिना जाने वाला वाराणसी उत्तर प्रदेश राज्य में गंगा नदी के किनारे बसा हुआ हैं। यह एक प्राचीन सांस्कृतिक शहर होने के साथ साथ बहुत ही बड़ा धार्मिक स्थल भी है। इस नगर का प्राचीन नाम काशी है जिसे वर्तमान में न्यू काशी भी कहा जाता है। इस जगह को समझने के लिए लोगों को महीनों का समय कम पड़ जाता है पर देखने के लिए दो दिन की ट्रिप आपके लिए पर्याप्त होगी। इस दौरान आप कहाँ ठहरे, कहाँ जाएं और खानेपीने की सभी जगहों के बारे में बताने वाला हूँ ताकि आपके समय का सही उपयोग हो सके और आप अधिक से अधिक जगह पर घूम सकें। 

भगवान शिव की नगरी 

काशी के बारे में मान्यता है कि यह नगरी भगवान शिव के त्रिशूल पर टिकी हुई हैं। शिव की इस नगरी में वैसे तो कई मंदिर बने हुए हैं लेकिन यहां का सबसे प्रसिद्ध मंदिर काशी विश्वनाथ है। काशी को घाटों का नगर भी कहा जाता है उस जगह गंगा नदी के तट पर कुल 84 घाट बने हुए हैं। कुछ ही दूरी पर बौद्ध धर्म का सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध नगर सारनाथ स्थित है। 

पहला दिन : गंगा आरती और वाराणसी के घाट 

Priests performing evening Ganga Aarti on Varanasi ghats
Sacred rituals, culture, history explored across two days

वाराणसी का सबसे बड़ा आकर्षण गंगा नदी, गंगा आरती और यहाँ के घाट हैं। आप अपनी यात्रा की शुरुआत सुबह गंगा आरती के साथ कर सकते हैं। सुबह गंगा आरती के पश्चात गंगा में नौकायान से सभी प्रमुख घाटों की सैर करें, नमो घाट, मणिकर्णिका और अस्सी घाट यहाँ के प्रमुख घाट हैं। दोपहर को बनारसी का स्ट्रीट फ़ूड ट्राई करें और फिर काशी विश्वनाथ मंदिर निकल जायें।

दूसरा दिन : हथकरघा देखें और सारनाथ जायें 

Traditional handloom weaver crafting Banarasi silk saree fabric
Sacred rituals, culture, history explored across two days

वाराणसी अपने हथकरघा उद्योग के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहाँ की बनारसी साड़ियों के बिना शादी अधूरी जान पड़ती है। ऐसे में इन्हें बनते हुए देखना एक अलग तरह का अनुभव होता है। सुबह हथकरघा कालोनियों को घूमे और लंच के बाद सारनाथ निकल जायें। यह मुख्य शहर से महज़ दस से बारह किमी की दूरी पर स्थित है।  

वाराणसी में घूमने के लिए कुछ अन्य स्थान 

Sarnath Buddhist ruins with ancient stupa and monastery complex
Sacred rituals, culture, history explored across two days

वाराणसी में रहते हुए अगर थोड़ा बहुत समय बच जाए तो आप वाराणसी में रिक्शे की सवारी कर सकते हैं। लोकल स्ट्रीट फ़ूड और बनारसी पान खाने के लिए भी जा सकते हैं। वैसे बनारस की गलियों को पैदल घूमने का जो आनंद है वह भी आज़माया जा सकता है। वाराणसी के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों में सारनाथ, आलमगीर मस्जिद, चुनार का किला, रामनगर किला और संग्रहालय, गोडोवालिया मार्केट भी आता है लेकिन इसके लिए आपके पास पर्याप्त समय होना चाहिए। 

वाराणसी कैसे पहुंचे 

इस जगह पर देखने के लिए काफ़ी कुछ है यही कारण है कि देश विदेश से हर दिन लाखों सैलानी घूमने और दर्शन करने के लिए आते हैं। आप भी इस जगह पर आना चाहते हैं तो आपको बता दूँ कि वाराणसी पूरी तरह से सड़क, रेल और हवाई मार्ग से जुड़ा हुआ है। देश के किसी भी प्रमुख नगर से बस अथवा निजी वज़न से यहाँ आ सकते हैं। ट्रेन से आते हैं वाराणसी जंक्शन और हवाई मार्ग से तो लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डा वाराणसी में ही स्थित है। 

वाराणसी में कहाँ ठहरें 

वाराणसी में ठहरने के लिए बहुत सारे होटल और धर्मशालाएँ मिल जायेंगी। आप चाहें तो किसी मंदिर अथवा वहाँ की धर्मशाला में भी रुक सकते हैं। सबसे अच्छा होगा कि सिटी सेंटर अथवा गडोलिया चौक के आसपास ही अपना होटेल बुक करें। क्योंकि यह जगह भीड़भाड़ से थोड़ी सी दूर है। 

संजय शेफर्ड एक लेखक और घुमक्कड़ हैं, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में हुआ। पढ़ाई-लिखाई दिल्ली और मुंबई में हुई। 2016 से परस्पर घूम और लिख रहे हैं। वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लेखन एवं टोयटा, महेन्द्रा एडवेंचर और पर्यटन मंत्रालय...

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