राखी वह त्यौहार है जिसमें भाई-बहन के खूबसूरत रिश्तों और जुड़ाव का जश्न मनाया जाता है। आपस में खूब झगड़ने के बावजूद हम भाई-बहन के इस प्यार से जुड़े रहतेे हैं, यही इस त्यौहार की खूबी है। इस वर्ष यह त्यौहार 18 अगस्त को है और हर वर्ष यह सावन के महीने में पूर्णिमा के दिन पड़ता है। मिठाइयों और उपहारों से भरपूर इस त्यौहार में बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और बदले में भाई उनको आशीर्वाद देने के साथ ही हर समय किसी भी मुसीबत में रक्षा करने का वचन देते हैं। पूरे उत्तर भारत में रक्षा बंधन का त्यौहार इसी तरह मनाया जाता है, लेकिन देश के कई अन्य हिस्सों और विदेशों में भी राखी का त्यौहार मनाया जाता है, लेकिन बिल्कुल अलग संदर्भ में, अलग तरीके से और बिल्कुल अलग नाम से मनाया जाता है। यहां हम उन अन्य रस्म-रिवाजों पर प्रकाश डालते हैं, जो इसी दिन मनाई जाती हैंः-
बंगाल और ओडिशा :- देश के पूर्वी हिस्से, खासतौर पर पश्चिम बंगाल और ओडिशा में यह त्यौहार झूलन पूर्णिमाकहलाता है। झूलन पूर्णिमा हर वर्ष सावन के महीने में आती है और रक्षा बंधन के दिन ही पड़ती है। हर वर्ष इस उत्साव का आयोजनराधा-कृष्ण के प्रेम के प्रतीक के रूप में किया जाता है। भगवान कृष्ण के भक्तों के लिए होली और जन्माष्टमी के बाद यह सबसे प्रमुख त्यौहार है। इस त्यौहार के दौरान वृंदावन (जहां श्रीकृष्णा का बचपन बीता था से संबंधित सभी तरह के नृत्य और संगीत की झलक मिलती है। इस त्यौहार में ‘झूलन शब्द इस बात का प्रतीक है कि जब राधा-कृृष्ण एक दूसरे के साथ झूलते हैं तो सभी रंगीन फूल भी हवा के साथ झूलने लगतेे हैं। इस वर्ष यह त्यौहार 14-18 अगस्त के दौरान पड़ रहा है।
उपकर्म या अवनि अवित्तम :- उपकर्म का मतलब होता है कुछ नया शुरू करना। यह दक्षिण भारत, खासतौर पर चेन्नई सहित पूरे तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में मनाया जाता है। हर वर्ष यह रक्षाबंधन के दिन पड़ता है और इस पवित्र दिन ब्राह्मण समाज नया पवित्र जनेऊ धारण करता है। पुराने जनेऊ को उतारना सभी पूर्व पापों से छुटकारा पाने का प्रतीक माना जाता है। बिल्कुल इसी तरह की प्रक्रिया उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में भी अपनाई जाती है जिसके तहत चंपावत जिले के देवीधुरा में बैगवाल मेले का आयोजन किया जाता है।
नारियल पूर्णिमा :- यह त्यौहार उन राज्यों में मनाया जाता है जो समुद्र किनारे हैं जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और गोवा। इस दिन समुद्र के देवता वरुण को नारियल चढ़ाया जाता है और नारियल चावल पकायाजाता है। इस त्यौहार को मछुआरे और वे अन्य समुदाय मनाते हैं जिनका जीवनयापन समुद्र पर निर्भर है। नारियल पूर्णिमा को मानसून की समाप्ति का संकेत माना जाता है और एक नए अध्याय का प्रतीक है,क्योंकि जैसे ही मानसून खत्म होगा मछुआरे अपने दैनिक कामकाज के लिए समुद्र में जा सकतेे हैं। इसलिए लोग भगवान वरुण की पूजा करते हैं ताकि उनके आगामी प्रयासों के लिए वरुण देव का आशीर्वाद प्राप्त हो सके। महाराष्ट्र की जनजाति कोली इस त्यौहार को ज्यादा धूमधाम से मनाती है।
कजरी पूर्णिमा :- राखी का यह रूप मध्य भारत के राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार में मनाया जाता है। इस दिनको कृाि के नए सीजन का प्रतीक माना जाता है, इसलिए यह परम्परा किसानों के बीच काफी आम है। यह त्यौहार 7 दिन तक चलता है जिसकी शुरुआत कजरी अमावस्या(जिस दिन चांद बिल्कुल न दिखे) के 9 दिन बाद होती है। यह त्यौहार उन किसानों और महिलाओं के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण होता है जिनके पुत्र हैं।वे सब अपने बेटों के स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन के लिए प्रार्थना करते हैं। इसमें धन की देवी की पूजा की जाती है और गेहू एवं जौ की बुवाई कर परंपरा का पालन किया जाता है। किसान भगवान से आगाामी फसल सीजन के लिए आशीर्वाद लेते है।

पवित्रोपाना:- पवित्रोपाना को गुजरात के ज्यादातर लोग मनाते हैं। इस पवित्र दिन पर भगवान शिव की पूजा की जाती है और नजदीक के मंदिर जाकर शिवलिंग पर दूध और जल चढ़ाया जाता है। लोग जो कुछ भी उनके पास है उसके लिए भगवान शिव का आभार जताते हैं और भविष्य के जीवन के लिए उनका मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पवित्रोपाना के अनुष्ठान में पवित्रा,काॅटन के कुछ तंतु और कभी-कभी कासा घास लेकर उनको एक साथ जोड़ लेते हैं और उनको पंचगव्य (गाय का घी, दूध, दही, मूत्र और गोबर) के मिश्रण में भिगो लेते हैं। पवित्रोपाना या श्रावण पूर्णिमा को त्रिनेत्र धारी भगवान शिव की आखिरी पूजा के लिए पवित्र दिन माना जाता है। पवित्रोपाना अनुष्ठान में कपास के तिनकों को पंचगव्य (गाय का घी, दूध, दही, मूत्र और गोबर) के मिश्रण में भिगो लेते हैं और शिवलिंग के चारों तरफ छिड़कते हैं। पंचगव्य यानी की पांच तत्व गाय से लिए जाते हैं जिसको हिन्दू मान्यता के मुताबिक सबसे पवित्र जानवर माना गया है।
किसी एक त्यौहार को विभिन्न तरीकों से मनाना भारत की खूबी है जिसमें उस त्यौहार काआनंद,खुशी और मग्न करने वाला तत्व हमेशाा बना रहता है। लेकिन यह यहीं खत्म नहीं होता, यह त्यौहार नेपाल में भी मनाया जाता है जिसमें भारतीय संस्कृति का मिश्रण होता है जो इसकी खूबसूरती है। वे इस त्यौहार को केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं करते बल्कि पूरे परिवार को शामिल करते हैं। वे भगवान शिव की पूजा करते हैं, पुराना जनेऊ उतारते हैं और छोटे भाई-बहनों को राखी बांधते हैं। इसलिए जहां कहीं भी हों अपने भाई-बहन और परिवार के साथ इस त्यौहार को जरूर मनाएं और राखी की भावना को जिंदा रखें। यदि आप राखी पर अपने घर से बाहर हों तो भी अपनी प्यारी बहन को कुछ उपहार जरूर भेजें,उसके लिए इससे बड़ी खुशी कुछ नहीं हो सकती। अपनी बहन या किसी अन्य प्रिय की इच्छाओं को पूरा करते हुए इस वर्ष इस त्यौहार की खुशी को चारों तरफ फैलाइए।
(मेक माई विश डॉट कॉम की सी ई ओ एवं सह संस्थापक अनु गुप्ता द्वारा बातचीत पर आधारित)
