बेशक दीवाली हम बड़ी धूमधाम से मनाते हैं और दिल खोलकर पटाखों पर पैसे खर्च करते हैं। खुशियों के बीच यह भूल जाते हैं कि पटाखे चलाकर हम उनके धुएं से वातावरण को कितना दूषित कर रहे हैं। छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए प्रदूषण बेहद खतरनाक होता है, तभी तो उन्हें पटाखों के शोर व धुंए से दूर रखा जाता है। ऐसे में क्यों ना इकोफैंडली दीवाली मनाई जाए, जिसमें प्रदूषण के बजाए भाईचारा फैलाया जाए।
दीपावली यानि दीपों का उत्सव, तो विभिन्न तरह की मिलने वाली बिजली की टिमटिमाती लड़ियों की बजाए मिट्टी के दीए जलाएं।
मिठाई या अन्य गिफ्टस की बजाए आर्गेनिक गिफ्टस दें। ये गिफ्ट देकर आप गो-ग्रीन का संदेश भी फैला सकते हैं। आपके मित्र व रिश्तेदार खुश हो जाएंगे और वे भी ऐसा कदम उठाने को प्रेरित होगें।
आजकल बढ़ते हुए प्रदूषण को देखते हुए इको फ्रैंडली पटाखे बेचे जाने लगे हैं। इनकी यह खासियत होती है कि ये रिसाईकल्ड पेपर के बने होते हैं और स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक नहीं होते ।

सजावट की चीजें खरीदते समय ध्यान रखें कि कोई भी ऐसी चीज ना खरीदें जो रिसाईकल ना हो सके। दीवाली के बाद प्लास्टिक की लड़ियां कंदीलें या अन्य डेकोरेटिव प्रोडक्ट्स फेंक दिए जाते हैं जो रिसाईकल नहीं होते और वातावरण को नुकसान पहुंचाते हैं।
हम अपने व बच्चों के कपड़े, क्राॅकरी, सजावट के सामान, खाने-पीने के सामान आदि खरीदने पर कितना ही पैसा बेकार में खर्च कर देते हैं लेकिन ये सब हमें कुछ पल की ही खुशियां देते हैं। अगर हम इन्हीं पैसों से गरीब बच्चों को उनकी जरूरत का सामान लेकर देंगे, तो उनकी एक मुस्कराहट और आंखों की चमक देखकर जो हमें आत्मिक सुख मिलेगा। उसकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती।
अपने फेंडस और रिश्तेदारों को पौधे गिफ्ट करें। और उन्हें भी पौधे लगाने को प्रेरित करें।
खरीदारी करने जब भी जांए अपने साथ जूट य कपड़े का बना बैग लेकर जाएं, प्लास्टिक की थैली को कहें अलविदा।
घर पर रंगोली बनाते समय फूलों, पत्तों या रसोईघर में उपलब्ध चीजों जैसे पालक, चुकंदर गुलाब, हिना आदि के कलर्स में अलग-अलग चावल भिगोकर व सुखाकर हो सके तो सोसाइटी के सभी लोग एक जगह इकट्ठे होकर दीवाली मनाएं। खांए -पीएं व दीवाली को एंज्वाॅय करें।
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