दरअसल, रोहिणी नक्षत्र व्यापिनी अष्टमी तिथि को ही जन्माष्टमी व्रत करना श्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि श्रीमद्भागवत पुराण में कहा गया है कि श्रीकृष्ण का अवतार भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि, बुधवार, रोहिणी नक्षत्र और चंद्र के वृष राशि में संचार के दौरान आधी रात को हुआ था। लेकिन ऐसा संयोग इस साल नहीं बन रहा है। 
 
शास्त्रकारों ने इस तरह की स्थिति में व्रत को लेकर कहा है कि जिस दिन मध्य रात्रि में अष्टमी तिथि होती है उसी दिन जन्माष्टमी का व्रत रखा जाता है। धर्मसिंधु नामक पुस्तक के अनुसार ‘कृष्ण जन्माष्टमी निशिथ व्यापिनी ग्राह्या। पूर्व दिन एव एव निशीथ योगो पूर्वा।। यानी जिस दिन रात में अष्टमी तिथि निशीथ योगो पूर्वा।। यानी जिस दिन रात में अष्टमी तिथि निशिथ व्यापिनी हो उस दिन ही जन्माष्टमी का व्रत रखना चाहिए। इसी परंपरा के अनुसार गृहस्थ लोग सदियों से उस दिन व्रत करते आ रहे हैं जिस दिन दिन में सप्तमी और रात को अष्टमी तिथि होती है। 
 
जन्माष्टमी दुर्लभ संयोग 
 
यह दुर्लभ संयोग होता है जबकि मध्यरात्रि में अष्टमी तिथि के दौरान रोहिणी नक्षत्र भी मौजूद हो। लेकिन इस बार भी जन्माष्टमी पर कई दुर्लभ संयोग बने हुए हैं जो शुभ फलदायी हैं। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय मध्य रात्रि में चंद्रमा वृष राशि मे उपस्थित था। इस वर्ष भी चंद्रमा उसी प्रकर स्थित होगा जैसे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय था। इस दिन मध्य रात्रि में लग लग्न मे रोहिणी नक्षत्र उपस्थित हो रहा है। इस स्थिति में गृहस्थों के लिए 23 तारीख को जन्माष्टमी का व्रत रखना शास्त्रसम्मत है। बता दें कि मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इसलिए  यहां पर अष्टमी व्यापिनी नवमी के दिन व्रत पूजन की परंपरा रही है।इसलिए मथुरा वृंदावन में 24 अगस्त को व्रत पूजन किया जाएगा।
 
2019 कृष्ण जन्माष्टमी मुहूर्त 
 
  • अष्टमी तिथि समाप्त 24 अगस्त 8 बजकर 32 मिनट 
  • अष्टमी तिथि का आरंभ 23 अगस्त 8बजकर 9 मिनट
  • जन्माष्टमी पूजन मुहूर्त 23 अगस्त निशीथ काल रात 12 बजकर 2 मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक। इसी समय रात में भगवान के बाल रूप की पूजा, झूला झुलाना, चंद्रमा को अर्घ्य देना और जागरण करना सब प्रकार से शास्त्र सम्मत है। 

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