खुशियों के त्योहार दीवाली को मनाने में हम कभी -कभी इतने खो जाते हैं कि अप्रत्याशित खतरा हमारे खुशियों को गम मे बदल देता है। आप अपने बच्चों को खुशियां जीना सिखाइए, सिर्फ पटाखों की शोरगुल में खशियां नहीं मिलती।

इस दीवाली अपने बच्चों को पटाखों से होने वाले नुकसान, उससे बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण के बारें में भी अवश्य समझाएं। इसके बावजूद अगर उनका नन्हा दिल पटाखों के लिए मचले तो यथासंभव कम से कम पटाखें खरीदें। आज बच्चों को दी गई ये सीखें उन्हें भावी जीवन में समझदार एवं जिम्मेदार नागरिक बनाने में अवश्य मदद करेगी अगर बच्चे पटाखें जलाने के लिए बहुत मचल रहे हैं तो उन्हें कुछ बातों का ध्यान रखते हुए अपनी निगरानी में पटाखें जलवाएं ताकि हमारी खुशियों को ग्रहण न लगने पाएं। पटाखे हमेषा अच्छे दुकान से खरीदें एवं बच्चों की पहुंच से दूर रखें।

  • बच्चों को समझा दें कि पटाखे आपसी उपस्थिति में एवं खुले मैदान में जलाएं।
  • सड़क से गुजरती हुई टेलीफोन या बिजली के तार के पास पटाखें न जलाएं।
  • पटाखें हमेशा दीए और माचिस से न जलाकर हमेशा एक बड़ी लकड़ी के द्वारा जलाएं और सीधे खड़े होकर जलाएं।
  • ज्यादा आवाज वाले पटाखे न जलाएं। बच्चे, बुढ़े, और बीमार लोगों का ख्याल रखें।
  • पटाखें डिब्बे में रखकर न जलाएं। इससे खतरे की संभावना बढ़ जाती है।
  • दीवाली सिर्फ परंपरा और धुम-धड़ाके के नाम पर नहीं बल्कि शांत और एकाग्रचित होकर इंज्वाय करते हुए मनाएं।
  • पटाखें जेब में या आंच अथवा किसी गरम जगह के पास न रखें।
  • दीए को किसी ऐसी जगह न रखें, जहां पैर लगकर गिरने की संभावना हो। ऐसा करने पर तेल गिरकर किसी के फिसल जाने से अनहोनी की आशंका हो सकती है।
  • सबसे खास बात बच्चों को बातों बातों में दीपावली मनाने के तरीके, पटाखों से सावधानियां जैसी बातें सिखाती जाएं। ऐसा करके आप स्वस्थ मानसिकता वाली पीढ़ी की नीवं रख सकेगी।

दुर्घटना के बाद-

  • इन सावधानियों के बाद अगर कोई दुर्घटना हो जाए, तो घबराहए मत घबराहट किसी समस्या का समाधान नहीं है। हिम्मत से काम लें और कुछ बातों पर अमल करें।
  • सबसे पहले जली हुई जगह को ठंडें पानी से धोए, और बार-बार धोती रहें।
  • फिर इसे सूती कपड़े से थपथपा कर पानी सुखा लें, फिर कोई एन्टी-सेप्टिक क्रीम लगा लें।
  • इसके बाद मरीज को नजदीक के हस्पताल में लें जाएं और डाॅक्टर के दिए गए निर्देशों के अनुसार मरीज की देखभाल करें।