यही कारण है कि गाय के द्वारा उपयोग किया भोजन पूरी तरह पच जाता है। एवं कई प्रकियाओं के बाद गाय के शरीर में उसका दूध बन जाता है।
गाय की रीढ़ की हड्डी के भीतर सूर्यकेतु नाड़ी पर सूर्य की किरणों के स्पर्श से स्वर्ण तत्व का निर्माण होता है। यही कारण है कि वैज्ञानिक जाँच में गाय के 100 किलो दूध में एक माशा (लगभग होता है) स्वर्ण पाया गया है।
कैरोटीन तत्व
गाय के दूध में भैंस के दूध से 10 गुना होता है।
कैरोटोन तत्व की कमी होने पर कई तरह के कैंसर की सम्भावना बढ़ जाता है। कैरोटीन विटामिन ई से प्राप्त होता है। विटामिन ई का सर्वोत्तम प्राप्ति स्थल दुध से बना मक्खन है।
भैंस के दूध को गर्म करने से उसके पौष्टिक तत्व समाप्त हो जाते हैं जबकि गाय के दूध के पौष्टिक तत्व गरम होने के बाद भी सुरक्षित रहते हैं।
गाय के सींग पिरामडीय आकार के होते हैं। इसी कारण गाय सभी आकाशीय उर्जाओं को आसानी से संचित कर लेती है। यही उर्जा हमें दूध, गौमूत्र एवं गोबर से प्राप्त होती है।
वैज्ञानिक शोधों से यह भी ज्ञात हुआ है। कि गौमूत्र में कारबोलिक एसिड होता है। कारबोलिक एसिड किटाणओं का शत्रु है एवं शुद्धता तथा स्वच्छता का वाहक हैं।
एक अन्य शोध के अनुसार गौमूत्र में नाइट्रोजन, फास्फेट, यूरिक, एसिड, पोटेशियम सोडियम तथा लैक्टोज आदि तत्व भी पाये जाते हैं। ये सारे तत्व मानव स्वस्थ के मित्र तत्व हैं जो मानव शरीर के पोषण में सहायक हैं।
गय के गोबर एवं गौमूत्र के मिश्रण के फलस्वरूप प्रोपलीन ऑक्साइड गैस का उत्सर्जन होता है। ये गैस बारिश को आमंत्रण देती है।
इसी मिश्रण से उत्पन्न एक अन्य गैस इथरीन ऑक्साइड आपरेशन थियेटर में उपयोगी है।
नेशनल रिसर्च इन्स्टीट्यूट करनाल (हरियाणा) से प्रकाशित शोध आलेख के अनुसार गाय के घी में वैक्सीन एसिड, ब्यूटिक एसिड एंव वीटा कैरेटीन नामक समाहित हैं। ये सभी तत्व कैंसर प्रतिरोधी तत्व हैं ये कैंसर से युद्ध में सहायक है।

10 ग्राम गाय का घी दीपक में जलाने या गोबर के जलते उपलों पर डालने या यज्ञ में आहुति देने से लगभग एक टन प्राण वायु (ऑक्सीजन) प्राप्त होती है। इस तथ्य से यह प्रमाणित होता है। कि भारतीय संस्कृति की यज्ञ परम्परा के मूल में सर्वाधिक सशक्त कारण इसके द्वारा प्राणवायु का उत्सर्जन है। आज सारा विश्व ऑक्सीजन विशेष का शुद्ध ऑक्सीजन की कमी से चिन्तित है। देशी गाय का देशी घी एवं उससे यज्ञ इस समस्या का सरल श्रेष्ठ एवं सर्वसुलभ-सर्वसाध्य समाधान है।

गाय के दूध में विटामिनों का भण्डार है एवं विटामिन-ए की अधिकता होती है। जो शरीर को सशक्त बनाती है।
गाय के दूध एवं घी में जतवदजपंद नामक तत्व पाया जाता है। जो अणु विकिरण का विरोधी है।
गाय के दूध में व्याप्त सेरीब्रोसाइड नामक तत्व बुद्धि विकास में सहायक हैं।