आज हमारे देश में डायबिटीज की समस्या जितनी तेजी से बढ़ रही है यह चिंताजनक है, लेकिन इससे कहीं अधिक खतरनाक है इसे हल्के में लेना व अपनी देखभाल न करना।

इसके बारे में विस्तार से बता रहे हैं डायबिटीज के समर्पित प्रबंधन प्रोग्राम डायबिटाकेयर के संस्थापक डॉ. संजीव अग्रवाल। 

क्रोनिक इंसुलिन डिसऑर्डर डायबिटीज से आज दुनिया की एक बड़ी आबादी पीड़ित है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का आकलन है कि सन 2012 में लगभग 15 लाख मौतें सीधे तौर पर डायबिटीज के कारण हुईं। इनमें से डायबिटीज से जुड़ी 80 प्रतिशत मौत निम्न और मध्य आयवर्ग वाले देशों में हुई जहां जागरुकता और निगरानी प्रणाली का स्तर बहुत कम है। 

चीन के बाद पूरे विश्व में डायबिटीज पीड़ितों की तादाद भारत में ही है जहां 6.7 करोड़ भारतीयों में डायबिटीज की पुष्टि हुई है जबकि 7.70 करोड़ लोग प्री-डायबिटिक स्थिति में पाए गए हैं। खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी यह संख्या सन् 2035 तक 10.9 करोड़ तक पहुंच जाने का अनुमान है और इस दौरान भारत को विश्व में इस रोग के सबसे तेजी से बढ़ने वाले देश के रूप में जाना जाने लगेगा। इन आंकड़ों से भी आप चकित या घबराए नहीं हैं तो यह डायबिटीज से जुड़ी परेशानियों और अन्य स्वास्थ्य डिसऑर्डर के बारे में आपकी संपूर्ण जागरुकता के अभाव के कारण हो सकता है। अति खतरनाक देश करार दिए जाने के बावजूद भारत में डायबिटीज को एक बड़ा स्वास्थ्य खतरा मानने के प्रति जानकारी और स्वीकार्यता का अभाव पाया गया है। कार्डियोवैस्क्यूलर रोग, हाइपरटेंशन, मोटापा तथा कैंसर जैसी अन्य लाइफस्टाइल बिमारियों की तरह डायबिटीज पर बहुत ज्यादा चर्चा नहीं होती है और न ही ज्यादातर लोगों में इसे ‘हाई रिस्क’ रोग माना जाता है। लिहाजा इस ओर ध्यान दिलाना जरूरी हो गया है कि उन  डायबिटीज से मुक्त लोगों के मुकाबले कम से कम दोगुना हो गया है। 

 

डायबिटीज की समझ 

जैसा कि पहले बताया गया है आबादी के एक बड़े हिस्से में डायबिटीज को गंभीर स्वास्थ्य खतरा नहीं माना जाता है, क्योंकि ज्यादातर लोग समझते हैं कि कार्डियोवैस्क्यूलर रोग या कैंसर की तरह किसी की मौत सीधे तौर पर डायबिटीज के कारण नहीं होती है। अधिकतर लोग यह नहीं समझते कि डायबिटीज के कारण कुछ ऐसी स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं कि बहुत सारे लोगों की मौत डायबिटीज से होने वाली परेशानियों से ही हो जाती है। यदि आप डायबिटीज पीड़ित हैं तो आपको हाइपरग्लिसेमिया, डिस्लिपिडेमिया और हाइपरटेंशन की समस्या भी उभर सकती है। इन सभी समस्याओं का ताल्लुक कई तरह की गंभीर परेशानियों से रहता है जिनमें हृदय रोग, कमजोर दृष्टि, किडनी फेल्योर, नर्व डैमेज तथा अंग विच्छेदन जैसी समस्याएं शामिल हैं। 

360 डिग्री केयर क्यों जरूरी? 

रचना (52) को छह साल पहले डायबिटीज का पता चला। अपनी उम्र के लोगों से अधिक सतर्क रहने वाली रचना कभी-कभार अपने ब्लड शुगर और बीपी लेवल की भी निगरानी करती रही और किसी तरह की परेशानी होने पर फिजिशियन से अपनी जांच भी कराती रहीं। लेकिन उनका ब्लड ग्लूकोज लेवल बहुत अधिक हो चुका था जिसके परिणामस्वरूप वह असाध्य परेशानियों से जूझने लगीं। लगातार निगरानी के अभाव में ब्लड शुगर लेवल में आई तेज वृद्धि पर भारत के लोग ध्यान नहीं दे पाते हैं और इलाज नहीं कराने के कारण उनकी परेशानियां बढ़ती जाती हैं व अंतत: उनकी मौत हो जाती है। जब उन्होंने भारत में खासतौर से डायबिटीज केयर तथा इसके प्रबंधन की चुनौतियां महसूस की तब उन्हें लगा कि यहां जागरुकता, स्वीकार्यता (पीड़ित लोगों में) का अभाव और डायबिटीज की नियमित निगरानी का अभाव यहां की मुख्य समस्या है। 

डायबिटीज एक ऐसा डिसऑर्डर है जिसमें नियमबद्ध तरीके से निगरानी और प्रबंधन की दरकार होती है। नियमित निगरानी और समय पर इलाज कराते रहने के महत्त्व से वाकिफ लोग उचित स्थान पर उचित चिकित्सा प्राप्त करने में सक्षम हो पाते हैं। डायबिटीज पीड़ित बहुत सारे लोग नियमित रूप से अपने ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर लेवल की निगरानी नहीं रख पाते हैं और अपनी स्थिति को भांपने में विफल रह जाते हैं, कुछ लोग वैकल्पिक चिकित्सा की शरण में चले जाते हैं, जबकि कुछ लोग खानपान और वजन पर नियंत्रण के लिए जरूरी लाइफस्टाइल सुधार करने में लापरवाही बरतने लगते हैं। कई लोग मानते हैं कि अभी वे डायबिटीज के खतरे की चपेट में नहीं हैं, क्योंकि उनकी धारणा रहती है कि इससे सिर्फ बुजुर्ग या मोटे व्यक्ति ही प्रभावित होते हैं। 

 

दरअसल, महिलाओं, युवाओं और बच्चों में अब इसका खतरा ज्यादा रहने लगा है क्योंकि उनके खानपान में बदलाव आया है और उनका लाइफस्टाइल श्रमरहित रहने लगा है। गर्भवती महिलाओं को विशेष रूप से गेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा अधिक रहता है जो नवजात शिशुओं को भी प्रभावित करता है और यह भारत की विकराल होती समस्या बन गई है। यहां आत्म परीक्षण की प्रवृत्ति अभी विकसित नहीं हो पाई है। 

डायबिटीज के लिए 360 डिग्री केयर की अवधारणा में महत्त्वपूर्ण लक्षणों पर 24 घंटे सातों दिन निगरानी रखना, इनकी रिपोर्ट तत्काल फिजिशियनों को देना और उनसे अनिवार्य फीडबैक लेना शामिल है। चूंकि डायबिटीज मैनेजमेंट में लाइऌफस्टाइल बदलाव के सभी पहलुओं को शामिल किया जाता है, इसलिए इसके समस्त मैनेजमेंट सिस्टम में प्रतिदिन के खानपान और व्यायाम के उपायों को भी शामिल किया जाना चाहिए जिनसे व्यक्ति को महत्त्वपूर्ण लक्षणों पर काबू रखने में मदद मिल सकती है। 

भारत के ज्यादातर मामलों में मरीजों को डायबिटीज की जांच और खून की जांच कराने के लिए अलग-अलग समय पर अलग-अलग जगहों पर जाना पड़ता है। इसके बाद जांच रिपोर्ट फिजिशियन को दिखाई जाती है। भागदौड़ वाली इस प्रक्रिया से बहुत से मरीज हतोत्साहित हो जाते हैं और उनके निर्बाध केयर में बाधा आती है। अपने हेल्थकेयर प्रदाताओं के पास नियमित अंतराल पर जाने वाले मरीजों के लिए इस तरह की डायबिटीज सेवा के मॉडल प्रतिकूल बन जाते हैं और वे डायबिटीज सफल इलाज के लिए अनिवार्य नियमित, अनुशासित स्व-प्रबंधन तथा केयर करने में लापरवाही बरतने लग जाते हैं। 

 

डायबिटाकेयर क्या है? 

इस तरह की बाधाओं को देखते हुए हमने 24 घंटे सातों दिन का एक केयर सपोर्ट प्लेटफॉर्म बनाने का मन बनाया जहां डायबिटीज केयर के सभी पहलुओं का ऑटोमेटिक तरीके से ख्याल रखा जा सके- स्क्रीनिंग, इलाज से लेकर निगरानी तक। डायबिटाकेयर एक ऐसा सिस्टम है जिसमें मरीज को जांच कराने के लिए एक जगह से दूसरी जगह नहीं जाना पड़ता है, इसमें हमारे सेंट्रलाइज्ड मॉनिटरिंग केंद्र से डाटा प्रसारित करने वाले अत्याधुनिक डिवाइसेज के जरिये 24 घंटे सातों दिन दूरदराज के मरीजों पर निगरानी रखी जाती है और उनका ख्याल रखा जाता है। अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी से संचालित रिमोर्ट मॉनिटरिंग सिस्टम के साथ यथोचित मॉनिटरिंग डिवाइस भी लगे होते हैं। डायबिटाकेयर ने एक विशेष कनेक्टेड आधुनिक ग्लूकोमीटर पेश किया है जो मरीज के व्यक्तिगत इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड में अपडेट रखने के लिए हमारे सुरक्षित डाटाबेस तक उसकी ग्लूकोज रीडिंग ट्रांसमिट करता है। इसके बाद इस रिकॉर्ड को मरीज के डॉक्टरों तक अलर्ट के तौर पर भेजा जाता है ताकि उपयुक्त कार्यवाही शुरू की जा सके। 

इस अत्यंत व्यक्तिगत और संपूर्ण ऑटोमेटिक सिस्टम में मरीजों को न सिर्फ आने-जाने की बेवजह समस्या से निजात मिलती है और उन्हें मॉनिटरिंग और कंसल्टेशन के लिए भी कहीं नहीं जाना पड़ता है बल्कि यह भी सुनिश्चित होता है कि मरीज के संकेतकों पर प्रतिदिन नजर रखी जा रही है तथा असामान्य स्थिति में देरी किए बिना उपयुक्त कार्यवाही की जाती है। जांच से जुड़े आंकड़े फिजिशियन तक 60 मिनट के अंदर पहुंचा दिए जाते हैं ताकि मरीज को उसी जगह तत्काल हर तरह का इलाज दिया जा सके और अलग-अलग चीजों के लिए उसे एक-जगह से दूसरी जगह चक्कर न काटना पड़े। यह सिस्टम हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स को भी मरीज के संपर्क में रखता है और नियमित अंतराल पर होने वाली जांच का विवरण फोन कॉल या टेक्स्ट मैसेज के जरिये प्राप्त किया जा सकता है जिससे मरीज का उपचार जारी रखने में प्रोफेशनल्स को मदद मिल सके। 

डायबिटीज की महामारी को परास्त करने के लिए बचाव, नियंत्रण और उपयुक्त प्रबंधन महत्त्वपूर्ण माना जाता है जिसकी बदौलत भारत में कार्डियोवैस्क्यूलर की महामारी पर भी काबू पाया जा सकता है। रोग की गंभीरता और मृत्यु दर में कमी लाने के लिए 360 डिग्री केयर जरूरी है और इसके जरिये रचना जैसे मरीजों को बचाया जा सकता है।

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