Summary: महंगे जिम नहीं, देसी जुगाड़ से बना लोहा जैसा शरीर—जानिए ‘ताऊ’ का राज
हरियाणा के संजय उर्फ ‘सिक्स पैक ताऊ’ ने देसी अंदाज और कड़ी मेहनत से 50 की उम्र में भी जबरदस्त फिटनेस हासिल की है।
रोज 25 किलोमीटर दौड़ और सैकड़ों सपाटों के साथ उन्होंने साबित किया कि जुनून हो तो उम्र मायने नहीं रखती।
Haryana Six Pack Tau: हरियाणा की मिट्टी को पहलवानों की धरती कहा जाता। इसी धरती से एक और ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने उम्र की सीमाओं को तोड़कर फिटनेस की नई मिसाल कायम की है। सोनीपत के जठेड़ी गांव के रहने वाले संजय उर्फ काला पहलवान, जिन्हें लोग प्यार से “सिक्स पैक वाले ताऊ” कहते हैं, आज अपने देसी अंदाज और जबरदस्त फिटनेस के चलते चर्चा में हैं।
करीब 50 की उम्र पार कर चुके संजय न सिर्फ खुद फिट हैं, बल्कि युवाओं के लिए भी एक प्रेरणा बन चुके हैं। उनकी दिनचर्या, मेहनत और अनुशासन यह साबित करते हैं कि अगर जुनून सच्चा हो, तो उम्र सिर्फ एक संख्या बनकर रह जाती है। उन्हें “देसी पहलवान”, “रनिंग ताऊ” और “हरियाणवी सलमान खान” जैसे नामों से बुलाने लगे।
बचपन से था पहलवानी का शौक
संजय बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें पहलवानी का शौक था। उन्होंने अपने गुरु रघुबीर सिंह रायपुरिया के अखाड़े में एक साल तक प्रशिक्षण भी लिया। लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उन्हें यह सफर बीच में ही छोड़ना पड़ा। घर की हालत ऐसी थी कि पहलवानों की तरह दूध और देसी घी जैसी डाइट मिलना मुश्किल था। लेकिन, उन्होंने हार नहीं मानी। जहां दूसरे पहलवान घी पीते थे, वहीं संजय सरसों का तेल पीकर अभ्यास करते रहे। हालांकि हालात के चलते अखाड़ा छूट गया, लेकिन उनके भीतर का जुनून कभी खत्म नहीं हुआ।
बेटे के साथ फिर जगा पुराना जुनून

सालों बाद, जब उनका बेटा बड़ा हुआ और पहलवानी की ओर बढ़ा, तो संजय उसे स्टेडियम लेकर जाने लगे। इसी दौरान उनके अंदर फिर से वही पुराना जोश जाग उठा। उन्होंने तय किया कि जो सपना कभी पूरा नहीं कर पाए, अब उसे जीकर दिखाएंगे। धीरे-धीरे उन्होंने खुद भी नियमित अभ्यास शुरू कर दिया और आज वे युवाओं के साथ स्टेडियम में कंधे से कंधा मिलाकर दौड़ लगाते हैं।
बिना जिम बनाए शरीर लोहे जैसा
काला पहलवान की सबसे खास बात यह है कि वे किसी महंगे जिम या मशीनों पर निर्भर नहीं हैं। वे घर में मौजूद चीजों से ही एक्सरसाइज करते हैं। वे एलपीजी सिलेंडर उठाकर वर्कआउट करते थे। इसके अलावा वो पत्थर की ओखली और मूसल या पानी से भरी बाल्टियों को वजन बनाकर अभ्यास करते थे। उनका मानना है कि फिट रहने के लिए महंगे उपकरण नहीं, बल्कि मजबूत इरादा जरूरी होता है।
रोज लगाते हैं 25 KM दौड़ और 800 सपाटे
संजय की दिनचर्या किसी प्रोफेशनल एथलीट से कम नहीं है। वे रोज सुबह 3 बजे उठते हैं और अपनी फिटनेस की शुरुआत करते हैं। हर दिन 20-25 किलोमीटर की दौड़, 700 से 800 दंड बैठक लगाते हैं और 3 से 4 घंटे की लगातार प्रैक्टिस करते हैं। उनकी स्पीड इतनी तेज है कि कई युवा धावक भी उनसे पीछे रह जाते हैं। स्टेडियम में अक्सर लोग उन्हें देखकर हैरान रह जाते हैं और उनकी हौसला अफजाई करते हैं।
बिना सप्लीमेंट के है दमदार शरीर
जहां आजकल युवा महंगे प्रोटीन शेक और सप्लीमेंट्स पर निर्भर हैं, वहीं संजय की डाइट पूरी तरह देसी है। इनमें सुबह भीगे हुए मुनक्के, मौसमी का ताजा जूस, 60-70 बादाम का सेवन और साधारण रोटी, दाल और सब्जी शामिल हैं। वे मानते हैं कि प्राकृतिक आहार ही शरीर को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखता है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो
संजय की मेहनत तब चर्चा में आई जब उनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। लोग उन्हें “देसी पहलवान”, “रनिंग ताऊ” और “हरियाणवी सलमान खान” जैसे नामों से बुलाने लगे। संजय ने दिल्ली में आयोजित 42 किलोमीटर मैराथन में गोल्ड मेडल जीतकर यह साबित कर दिया कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। अब उनका अगला लक्ष्य 100 किलोमीटर रेस जीतना है।

