सदियों से लोग टाइट फिट कपड़े पहनने में विश्वास रखते आये हैं चाहे वे विक्टोरियन कॉर्सेट हो या आज के ज़माने में स्किनी जीन्स। लड़कियों को खासकर इस तरह की जीन्स पहनना बहुत अच्छा लगता है लेकिन सुंदरता के साथ साथ हम यह नही सोचते की यह हमारे शरीर और स्वास्थ के लिए हानिकारक हो सकता है। इसका प्रभाव हमे कमर से लेकर पैरों तक महसूस हो सकता है।
1. रक्त परिसंचरण:- टाइट कपड़े पहनने से जोड़ों के संचलन में रुकावट आ जाती है, जिससे हमारी मांसपेशियां कड़ी हो जाती है, और साथ ही इससे रखत के परिसंचरण में भी रुकावट आती है। इससे शरीर में दर्द, सूजन, गांठ पड़ना, नसों पर दबाव पड़ने की वजह से वैरिकोस वेइन्स इत्यादि जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बहुत टाइट शर्ट या टी शर्ट पहनने से भी प्राकृतिक संचलन में रुकावट आती है,जिससे कन्धों में भारीपन महसूस होता है और आपको मांसपेशियों में दर्द और गुदगुदी महसूस हो सकती है।
2. कमर में दर्द:- लोगों को टाइट कपड़े पहनना पसन्द होता है लेकिन वे ये नही सोचते की यह उनके शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है। स्किनी या लौ वेस्ट टाइट जीन्स पहनने की वजह से हमारी कमर की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है जिससे हमारे हिप जॉइंट के संचलन पर असर पड़ता है और इसके कारण हमारी कमर व रीड़ हड्डी पर प्रभाव पड़ता है जिससे हमे कमर में दर्द महसूस होने लगता है।
3. थाई सिंड्रोम :- हर वक्त स्किनी जीन्स पहनने से टिंगलिंग थाई सिंड्रोम हो सकता है। इसको मेराल्जिया परेन्थेटिकल के नाम से भी जाना जाता है। यह एक ऐसी समस्या होती जिसमे जांघों पर झुनझुनी, सुन और जलन महसूस होने लगती है।
4. कम्पार्टमेंट सिंड्रोम :- बहुत लम्बे समय तक स्किनी जीन्स पहनकर रखते हैं जिससे कम्पार्टमेंट सिंड्रोम हो जाता है। यह एक ऐसी स्थिति होती है जिसमे अधिक प्रभाव की वजह से मांसपेशियां और नसें को क्षति हो सकती है और रक्त के प्राकृतिक परिसंचरण में रुकावट आ जाती है। इससे किसी भी व्यक्ति को सूजन, सेंसेशन में कमी, स्तब्धता इत्यादि जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
5. डीप वैन थ्रोम्बोसिस :- जो लोग अपने शरीर को बहुत लम्बे समय तक टाइट कपड़ों में बांधकर रखते हैं उन्हें यह समस्या हो सकती है। यह एक ऐसी समस्या होती है,जिसमे किसी भी व्यक्ति को पैर की अंदर वाली नसों में गाँठ पड़ सकती है। वे नसें जो हमारे दिल से लेकर पैरों तक खून पहुंचाती हैं उनके कार्य में दबाव पड़ जाता है, जिससे खून के भाव की गति धीमी पड़ जाती है।
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6. फर्टिलिटी :- बहुत टाइट पकड़े पहनने से हमे यूरिनरी ट्रैक्ट में संक्रमण हो सकता है जिससे हमारा ब्लैडर बहुत तेज़ी से काम करने लगता है, हमारा ब्लैडर कमज़ोर पड़ जाता है, स्पर्म की मात्रा घटने लगती है और फंगल इन्फेक्शन भी होने लगते हैं। टाइट जेनस पहनने से टेस्टिकल्स का तापमान बढ़ने लगता है। जर्मनी के एक विश्विद्यालय द्वारा किये गए एक शोध से यह पता चला की टाइट कपड़े पहनने से टेस्क्टीकल्स और स्क्रोटम का तापमान बढ़ता है और लूस कपड़े पहनने से ऐसा कुछ नही होता।
7. पेट में दर्द :- टाइट जीन्स जो लम्बे समय तक हमारे पेट के निचले हिस्से पर बंधी रहती हैं उससे हमारे पेटपर दबाव पड़ता रहता है जिससे एसिड रिफ्लक्स और यूरिनरी ब्लैडर पर दबाव पड़ता है। मांसपेशियों में दर्द, जलन और यूरिनरी इन्फेक्शन जैसी समयाएं होती है।
8. कैंडिडा यीस्ट इन्फेक्शन :- यीस्ट इन्फेक्शन एक प्रकार के फंगस की वजह से होता है जिसे कैंडिडा कहते हैं। यह पहनने की वजह से होता है। टाइट जीन्स और अंडरवियर की वजह से यीस्ट के लिए के ऐसा वातावरण बन जाता है जिससे वे बहुत जलेगी पैदा हो और आपको उसका असर पड़ता है। अगली बार आप जब भी टाइट जीन्स खरीदें जो इस बात को ज़रूर ध्यान में रखें। यह देखा गया है कि टाइट कपड़े पहनने से गुप्त अंगों में बहुत जल्दी नमी पैदा होने लगती है जिससे फंगी और सूक्ष्मजीवों द्वारा बहुत से इन्फेक्शन हो सकते हैं।
9. बेहोशी :- टाइट कपड़े पहनने से हम अपने फेफड़ों को सांस लेने की जगह नही दे पाते जिससे हमारी सांस धीमी हो जाती है और ऑक्सीजन की मात्रा भी कम होने लगती है।
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