अपार रूप-राशि की धनी, लाल जोड़े में लिपटी, सोलह सिंगार किए रुक्मणि परी-सी लग रही थी। दादी ने दिठौना लगाया तो बुआ ने नून-राई उतारी। द्वारचार के लिए आ रही बारात के साथ बैंड-बाजे की आवाज वातावरण में गूँज रही थी। यह गूँज रुक्मणि उर्फ रुक्मी के हृदय में उल्लास का संचार कर रही थी। […]
Author Archives: कृष्णलता यादव
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रक्षा पेड़ की – 21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां हरियाणा
एक राजा के राज्य में शेखू नाम का बहुरूपिया रहता था। अपनी पहचान छुपाने के लिए वह दूर-दूर तक प्रसिद्ध था। अपनी सूझ-बूझ से कठिन से कठिन स्थिति को सरल बनाना उसके बाएँ हाथ का खेल था। वेश बदलकर जनता के बीच घूमता और उनकी समस्याएँ सुलझाने में मदद करता। इसके बदले उसे राज्य की […]
