Airport Divorce
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Summary: टेंशन से दूर करता है एयरपोर्ट डिवोर्स

कोई गेट मिस होने के डर में चकरा रहा होता है, दूसरा प्री-फ्लाइट ड्रिंक का प्लान बनाता है। इन्हीं वजहों से लड़ाई का मौका तैयार रहता है।

Airport Divorce Trend: एयरपोर्ट पर वो टेंशन वाला, हल्का-सा लड़ाई वाला माहौल तो लगभग हर कपल ने झेला ही होगा। एक को गेट पर एक घंटा पहले जाकर बैठना है और दूसरा अभी भी कॉफी ढूंढ रहा होता है। कोई ड्यूटी-फ्री को ओलिंपिक की तरह लेने को तैयार, तो दूसरा सिर्फ लाउंज में जाकर झपकी लेने का सोच रहा है। एक को बैग की जल्‍दी है, दूसरे को पावर बैंक कहीं रखना याद ही नहीं रहता। अगर ये सब कभी आपके साथ हुआ है, तो बधाई – आपने इस साल के सबसे मजेदार और सबसे रिलेटेबल ट्रेंड का ट्रेलर देख लिया… एयरपोर्ट डिवोर्स।

अब नाम सुनकर डरने की जरूरत नहीं। यहां असली तलाक वाली बात नहीं है। एयरपोर्ट डिवोर्स मतलब हल्का-फुल्का, अच्छे मूड वाला अस्थायी ब्रेक। ट्रैवल के दौरान कपल्स के बीच शांति बनाए रखने का स्मार्ट तरीका। यानी चेक-इन से लेकर बोर्डिंग तक हर मिनट साथ रहने की बजाय, बहुत लोग अब बोले जाते हैं “ठीक है, गेट पर मिलते हैं” और फिर एयरपोर्ट के अंदर दोनों अपनी-अपनी मर्जी से घूमते रहते हैं।

Airport Divorce New Trend
Airport Divorce New Trend

सिंपल आइडिया है… दोनों साथ एयरपोर्ट पहुंचो, जरूरी चीजें जैसे चेक-इन, लगेज ड्रॉप, सिक्योरिटी लाइन…ये सब साथ मिलकर निपटा लो। इसके बाद… दोनों अपने-अपने मूड के हिसाब से निकल लो। वो ड्यूटी-फ्री में परफ्यूम ट्राई कर रही है, इधर ये किसी सुशी काउंटर पर टूट पड़ा है। वो फोटो के लिए अच्छी लाइट ढूंढ रही है और ये बुकस्टोर में नई किताबों को देख रहा है। दोनों आखिर में गेट पर फिर से मिलते हैं…थोड़ा फ्रेश, थोड़ा रिलैक्स, और रिश्ते में कोई खटपट नहीं। सुनने में थोड़ा मजाकिया लगता है, पर ये ट्रेंड तेज़ी से फैल रहा है। ट्रैवल राइटर Huw Oliver ने इस शब्द को इस साल पॉपुलर किया और सोशल मीडिया इसे हाथों-हाथ ले रही है। रिलेशनशिप में “you do you” वाला जो कॉन्सेप्ट है, बस उसी का एयरपोर्ट वर्ज़न। कपल्स इसे “रिलेशनशिप सेवियर” बता रहे हैं… मतलब टेंशन से बचने का उपाय, ना कि ब्रेकअप का सिग्नल।

ये ट्रेंड तब वायरल होना शुरू हुआ जब ट्रैवल ब्लॉगर बताते नज़र आए कि वे सिक्योरिटी के बाद अपने पार्टनर से “डिवोर्स” ले लेते हैं। नकली ब्रेकअप टाइप… एक प्लान्ड “अलग-अलग घूमो” एक्सपीरियंस। Huw Oliver के अनुसार ये तरीका कपल्स में होने वाली परेशानियों को कम कर देता है। क्या है कि एयरपोर्ट हर इंसान के अंदर छुपे कंट्रोल फ्रीक को बाहर निकाल देता है—कोई प्लानिंग में माहिर होता है, दूसरा सबकुछ चिल मोड में करता है। कोई गेट मिस होने के डर में चकरा रहा होता है, दूसरा प्री-फ्लाइट ड्रिंक का प्लान बनाता है। इन्हीं वजहों से लड़ाई का मौका तैयार रहता है। एयरपोर्ट डिवोर्स इसमें ब्रेक लगा देता है। थोड़ा स्पेस मिलता है… शॉपिंग, स्क्रोलिंग, स्नैक्स, जो मन करे वही। और बीच में “किसने बोर्डिंग पास रखा था?” वाली क्लासिक लड़ाई से छुटकारा भी।

आजकल के रिश्ते “इंडिपेंडेंस + साथ” वाले फॉर्मूले पर चलते हैं। अलग-अलग फ्रेंड सर्कल, कभी-कभी सोलो ट्रिप, खुद के लिए टाइम… ये सब नॉर्मल है। तो फिर एयरपोर्ट पर थोड़ा पर्सनल टाइम क्यों नहीं? ये मानो रिश्ते में पॉज बटन दबाने जैसा है… वो भी बिना किसी ड्रामा के। एयरपोर्ट वैसे भी एक झंझट वाली जगह है… लंबी लाइनें, बैगेज की टेंशन, बोर्डिंग टाइम, गेट बदलना… और तनाव बढ़ाने के लिए बस एक गलत बात काफी है। थोड़ा – सा स्पेस लेकर पूरा हॉलिडे मूड बर्बाद होने से बच जाता है।

ढाई दशक से पत्रकारिता में हैं। दैनिक भास्कर, नई दुनिया और जागरण में कई वर्षों तक काम किया। हर हफ्ते 'पहले दिन पहले शो' का अगर कोई रिकॉर्ड होता तो शायद इनके नाम होता। 2001 से अभी तक यह क्रम जारी है और विभिन्न प्लेटफॉर्म के लिए फिल्म समीक्षा...