Mahakumbh 2025
Mahakumbh 2025

Mahakumbh 2025: त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने के बाद क्या आप सच में पुण्य के भागी बने? क्या गंगा की पवित्र लहरों ने आपके पाप धो दिए या अभी भी कुछ अधूरा रह गया है? महाकुंभ में स्नान करना एक अलौकिक अनुभव है, लेकिन इस दिव्यता को अपने जीवन में स्थायी रूप से उतारने के लिए आपको कुछ आवश्यक कार्य करने होंगे। क्योंकि यदि यह स्नान आत्मा की शुद्धि का द्वार है, तो इसके बाद किए गए कर्म सौभाग्य की कुंजी!

यदि आपने प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान कर लिया है या करने वाले हैं, तो घर लौटने के बाद कुछ कार्य करने से यह यात्रा और भी फलदायी हो सकती है। ये छोटे-छोटे शुभ कार्य आपके जीवन में समृद्धि, शांति और ईश्वरीय कृपा का संचार करेंगे। इन शुभ कार्यों को करके आपको मन में सुकून और शांति का अनुभव होगा।

महाकुंभ की दिव्य लहरों में नहाकर लौटा शरीर तो शुद्ध हो गया, लेकिन मन और घर का वातावरण? क्या आपने उस आध्यात्मिक ऊर्जा को अपने घर तक पहुंचने दिया? घर लौटते ही सत्यनारायण कथा या भजन-कीर्तन का आयोजन करें, ताकि देवी-देवताओं की कृपा आपके आंगन में स्थायी रूप से बस जाए।

कहते हैं, जो मिला है उसे बहा दो, तभी उसका असली फल मिलता है। महाकुंभ से लौटकर अन्न, वस्त्र या धन का दान करें। यह सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि देवताओं के आशीर्वाद को स्थायी रूप से अपने जीवन में उतारने का तरीका है। याद रखें, दान नहीं किया, तो स्नान अधूरा रह जाएगा!

आपके पूर्वज भी आपकी इस पवित्र यात्रा के सहभागी हैं। क्या आपने उनके लिए तर्पण किया? महाकुंभ में स्नान करने से पितरों की आत्मा को मुक्ति मिलती है, लेकिन यदि घर लौटकर आपने उनके निमित्त कोई कर्म नहीं किया, तो क्या वे सच में तृप्त हुए? एक छोटा-सा तर्पण और आपके कुल पर आने वाले दोष सदा के लिए समाप्त!

त्रिवेणी संगम में जाकर अपने पाप धो आए, लेकिन क्या घर की नकारात्मकता भी धो दी? एक हवन कराइए, गंगाजल से घर का शुद्धिकरण कीजिए और पवित्र भस्म को अपने पूजास्थल में स्थापित करें। तभी वह आध्यात्मिक ऊर्जा आपके घर में प्रवाहित होगी, जो आपको महाकुंभ में प्राप्त हुई थी।

तीर्थ यात्रा के बाद अन्नदान को सर्वोत्तम कर्म कहा गया है। किसी भूखे को भोजन कराइए, मंदिर में अन्न अर्पित कीजिए, या गरीबों को भोजन बांटिए। तभी आपके पुण्य का लेखा-जोखा पूर्ण होगा।

महाकुंभ में देवी-देवताओं का प्रसाद पाया, लेकिन क्या आपने इसे अपनों में बांटा? तीर्थ से लाए गए प्रसाद को घर के सदस्यों और प्रियजनों के साथ साझा करें, ताकि यह पुण्य केवल आपके तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे समाज में फैले।

महाकुंभ की यात्रा का सच्चा फल तब ही मिलेगा जब…

आपने केवल संगम में स्नान नहीं, बल्कि पुण्य कर्मों से अपने भाग्य को जागृत किया।

स्नान से मिली आध्यात्मिक शक्ति को घर तक पहुंचाया।

ईश्वर की कृपा को केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज के लिए समर्पित किया।

राधिका शर्मा को प्रिंट मीडिया, प्रूफ रीडिंग और अनुवाद कार्यों में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। हिंदी और अंग्रेज़ी भाषा पर अच्छी पकड़ रखती हैं। लेखन और पेंटिंग में गहरी रुचि है। लाइफस्टाइल, हेल्थ, कुकिंग, धर्म और महिला विषयों पर काम...