Overview: रोहित शेट्टी फायरिंग केस
रोहित शेट्टी फायरिंग मामले में खुलासा हुआ है कि जेल में बंद प्रवीण लोनकर ने पूरी साजिश रची थी। शुभम लोनकर के साथ मिलकर उसने ₹51,000 और हथियारों का इंतजाम किया। क्राइम ब्रांच ने मुख्य शूटर दीपक चंद्रा सहित 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और बिश्नोई गैंग के नेटवर्क की जांच कर रही है।
Rohit Shetty Firing Case: मशहूर फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के जुहू स्थित आवास पर हुई फायरिंग मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि इस पूरी साजिश के तार बिश्नोई गैंग और बाबा सिद्दीकी हत्याकांड के आरोपियों से जुड़े हैं। सबसे सनसनीखेज बात यह है कि हमले की प्लानिंग जेल की सलाखों के पीछे से की गई थी। मुंबई क्राइम ब्रांच के अनुसार, रोहित शेट्टी के घर पर हुई फायरिंग की घटना की पूरी स्क्रिप्ट जेल में बंद प्रवीण लोनकर ने लिखी थी। प्रवीण, बाबा सिद्दीकी हत्याकांड मामले में पहले से ही जेल में है, इसके बावजूद वह बाहर अपना आपराधिक नेटवर्क चलाने में कामयाब रहा।
जेल से कैसे रची गई साजिश?
पुलिस जांच में पता चला है कि शुभम लोनकर (बिश्नोई गैंग का महाराष्ट्र प्रमुख) और उसका भाई प्रवीण लोनकर इस हमले के मुख्य मास्टरमाइंड हैं। प्रवीण लोनकर ने न्यायिक हिरासत में रहते हुए ही शूटरों के साथ संपर्क साधा और उन्हें हमले के लिए तैयार किया। जेल के अंदर से ही निर्देश दिए गए कि मोटरसाइकिल कहाँ से खरीदी जाएगी और पिस्तौल का इंतजाम कैसे होगा। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि जेल में उसने मैसेज भेजने के लिए किन माध्यमों का इस्तेमाल किया।
मोटरसाइकिल, हथियार और ₹51,000 का हिसाब

क्राइम ब्रांच ने आरोपियों के ‘मनी ट्रेल’ और लॉजिस्टिक्स का पता लगा लिया हैl पहले खबर थी कि आरोपियों को 40 हजार रुपये दिए गए, लेकिन जांच में यह रकम 51 हजार रुपये निकली। इसी रकम से हमलावरों ने एक पुरानी स्कूटी/मोटरसाइकिल खरीदी और बाकी पैसे अपनी मूवमेंट और रहने के लिए इस्तेमाल किए। हथियारों की सप्लाई भी शुभम लोनकर के नेटवर्क के जरिए की गई थी।
शूटर दीपक चंद्रा: कम पढ़ा-लिखा और ‘नया’ अपराधी
इस मामले के मुख्य शूटर दीपक चंद्रा (दीपक शर्मा) को हरियाणा और राजस्थान के बॉर्डर से गिरफ्तार किया गया है। दीपक उत्तर प्रदेश का रहने वाला है और बहुत कम पढ़ा-लिखा है। हैरानी की बात यह है कि उसका पहले से कोई बड़ा आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। पुलिस का मानना है कि बिश्नोई गैंग ने उसे एक ‘मोहरे’ के रूप में इस्तेमाल किया ताकि किसी को शक न हो।
क्राइम ब्रांच का 12 टीमों वाला ‘एक्शन प्लान’
मुंबई क्राइम ब्रांच की 12 टीमें इस केस पर दिन-रात काम कर रही थीं। आरोपियों तक पहुँचने के लिए पुलिस ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया l पुलिस ने घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और आरोपियों के मोबाइल लोकेशन (टेक्निकल सर्विलांस) के जरिए उन्हें ट्रैक किया। मामले की गहराई समझने के लिए पुलिस ने जुहू स्थित घटनास्थल पर क्राइम सीन को दोबारा रिक्रिएट किया।
अब तक की गिरफ्तारियां
इस मामले में पुलिस ने अब तक 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारियां पुणे, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से हुई हैं। मुंबई पुलिस का एंटी एक्स्टॉर्शन सेल अब प्रवीण लोनकर की कस्टडी लेने की तैयारी में है ताकि बिश्नोई गैंग की बॉलीवुड से जुड़ी अगली योजनाओं का पता लगाया जा सके।
