Posted inहिंदी कहानियाँ

बोझिल पलकें, भाग-21

जिस उम्मीद का दामन थामकर अजय अंशु के साथ अपनी जिंदगी की एक नई शुरुआत चाहता था, वह उम्मीद खत्म हो चुकी थी। अब अजय एक बार फिर अपराध की दुनिया के उसी अंधेरे में लौट चुका था और अगला गुनाह अंजाम देने जा रहा था, लेकिन क्या वह इस बार भी उतना ही सौभाग्यशाली था, जितना ही हमेशा हुआ करता था या फिर किस्मत उसे पूरी तरह से निराश कर देने पर उतारू थी?

Gift this article