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Feedback Tips: श्रेया अपनी जिंदगी में आए बदलावों से थोड़ा परेशान थी। यही वजह थी कि वह चाहती थी कि उसके जीवन में हो रहे बदलाव को लेकर वह किसी से फीडबैक मांगे। उसने पहले तो अपनी बेस्ट फ्रेंड से फीडबैक मांगा लेकिन संतुष्ट नहीं हुई। बाद में उसने अपने पति से भी फीडबैक मांगा लेकिन वहां भी उसे असंतुष्टि ही हाथ लगी। यह समस्या सिर्फ श्रेया की नहीं बल्कि श्रेया जैसी कई महिलाओं की है, जो अपने जीवन में हो रहे बदलावों को लेकर फीडबैक मांगती तो हैं लेकिन बड़ी मुश्किल से संतुष्ट होती हैं। फीडबैक लेना एक मुश्किल चीज है, खासकर तब जब हम अपने जीवन में आई दुविधाओं से जूझ रहे होते हैं। तब मन में कई सवाल उठते हैं, मसलन- क्या मुझे उसे फोन करना चाहिए? क्या बॉस मेरे काम को पसंद करते हैं? क्या मैं ऑफिस में सही तरह से काम कर रही हूं? क्या मैंने आज अच्छा खाना बनाया है? क्या मैं एक अच्छी दोस्त हूं?

ऑफिस में फीडबैक

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Feedback Tips: आसान हो सकता है फीडबैक लेना, ऐसे करें कोशिश 6

सबसे पहले तो यह जान लें कि ऑफिस में सहकर्मियों से सही फीडबैक मिले, इसके लिए आपको सबसे पहले एक- दूसरे पर विश्वास और कंफर्ट होना जरूरी है ताकि वे आसानी से ईमानदार होकर आपको फीडबैक दे सकें। यदि आप बार- बार उन पर दबाव डालकर फीडबैक मांगेंगी तो वह फीडबैक सही नहीं होगा। हम सब दरअसल जानते हैं कि हम किस तरह का काम करते हैं और हमें किस तरह का काम करना चाहिए। लेकिन यह भी याद रखना जरूरी है कि एक अजनबी यदि आपसे फीडबैक मांग रहा है तो आप कभी भी उसे सच बताने के लिए कंफर्टेबल नहीं होंगे। इसलिए ईमानदार फीडबैक लेने के लिए आपका अपने सहकर्मियों के साथ विश्वास पूर्ण रिश्ता होना आवश्यक है। अब सवाल उठता है कि विश्वास कैसे विकसित किया जाए। समय पर ऑफिस पहुंचना, काम होने पर ऑफिस के तयशुदा समय के बाद भी रुक जाना, ऑफिस गॉसिप से दूर रहना के साथ ही अपनी साख एक विश्वासपात्र सहकर्मी के तौर पर बनाने के लिए इन सबमें सबसे आवश्यक है- सुनना। आखिरकार, आपके साथ कुछ भी शेयर करने से पहले सामने वाला यह जानना चाहेगा कि आप किस तरह सुनते हैं। इसका अभ्यास आप रोजाना कर सकती हैं। सामने वाला जब भी बात कर रहा हो, आप एकाग्र होकर केवल उसे सुनिए। इस बीच आई कॉन्टैक्ट बनाए रखिए, भले ही आपकी रुचि उसकी बातों में न हो। उसे इस बात का अहसास भी दिलाना जरूरी है कि आप उसके समय की कद्र करती हैं। इस तरह से सामने वाला आप पर विश्वास करने लगेगा और धीरे- धीरे आपको स्वयं ही फीडबैक मिले लगेगा। सहकर्मियों से फीडबैक लेने में समय, धैर्य और योजना की आवश्यकता रहती है तभी आपको ईमानादार और सच्चा फीडबैक मिल सकता है।

पति से फीडबैक

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आपने आज मेहनत से नई डिश बनाई है और अब चाहती हैं कि आपके पति आपको सच बताएं कि वह डिश कैसी बनी है। आप यह फीडबैक क्यों चाहती हैं, यह सवाल जरूरी है। क्या इसलिए कि वह आपकी तारीफ करें या इसलिए कि यदि डिश में किसी सुधार की जरूरत हो तो अगली बात आप वह सुधार कर लें। अपने पति की बात सुनने और उसे स्वस्थ तरीके से लेने के भी कई फायदे हैं। इस सबके बीच यह याद रखें कि आपके पति आपके लिए बेस्ट चाहते हैं। यही वजह है कि वह आपको फीडबैक दे रहे हैं, भले ही आप दोनों के बीच किसी बात को लेकर मनमुटाव हो गया हो। यदि आपने इस बात को दिमाग में रखा तो आप उनकी बातों को ध्यान से सुनेंगी और समझेंगी भी। कान से सुन लेना और असल में सुनना, इन दोनों में बहुत बड़ा अंतर है। असल में सुनते समय आप मिलने वाले संदेश को अपने अंदर डिलीवर करा रही होती हैं। यह भी उतना ही सही है कि जरूरी नहीं है कि आपके पति हमेशा सही हों। ऐसा इसलिए क्योंकि कई बार आप उनके फीडबैक से राजी नहीं होती हैं। उनकी फीडबैक को न मानते हुए उन्हें चुप करा देना और उनकी बातें सुनकर अपनी मतलब का फीडबैक लेने में अंतर है। अपने पति की बातें सुनकर उन्हें बता देना कि आपने क्या- क्या सुना जरूरी है। भले ही आप उनकी बातों से रजामंद न हों, लेकिन कम से कम उन्हें यह तो पता चलेगा कि आपने सुना तो है। उनकी स्थिति और उनके पक्ष को समझने की कोशिश तो करें। उनके स्थान पर खुद को रखकर देखें और सोचें कि शायद आपने भी यही फीडबैक दिया होता।

दोस्तों से फीडबैक

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दोस्तों से फीडबैक लेते समय हम पहले से ही यह धारणा बनाकर चलते हैं कि हमें वही सुनने को मिलेगा, जो हम सुनना चाहते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि हम उनसे सबसे ज्यादा नजदीकी महसूस करते हैं। लेकिन इस सबके बीच इस तरह का फीडबैक लेने से बेहतर तो यह है कि हम फीडबैक न ही लें। यह याद रखें कि सच्चा दोस्त वही है, जो आपको सही फीडबैक देगा, न कि आपकी हां में हां और ना में ना मिलाएगा। इसलिए यदि आपकी सहेली आपकी आलोचना कर रही है तो उसे अपनाने के लिए तैयार रहें। जरूरी नहीं है कि सारी आलोचनाएं जरूरी ही हों लेकिन यदि आपने बिना नफरत के उन आलोचनाओं को स्वीकार कर लिया तो यकीन मानिए आपको सही और ईमानदार फीडबैक ही मिलेगा। सही सवाल पूछने से ही सही जवाब मिलेगा। यह भले ही आपको सीधा- सपाट लग रहा होगा लेकिन है सबसे मुश्किल। जैसे- तुम्हें मेरी ड्रेस कैसी लगी? यह न पूछें कि मेरी ड्रेस अच्छी लग रही है ना? बेचारी आपकी सहेली को अच्छी न लग रही होगी तो भी वह अच्छी बोलने पर मजबूर हो जाएगी।

बच्चों को फीडबैक

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फीडबैक लेना तो आपको आता है लेकिन इससे कहीं ज्यादा मुश्किल काम अपने बच्चों को फीडबैक देना है। फीडबैक का अर्थ केवल बच्चों की पढ़ाई से संबंधित नहीं है बल्कि उनके जीवन के सभी क्षेत्रों में फीडैबक देना है। उन्हें यह बताना कि वे जो करते हैं, वह कितना सही या गलत है। यह ध्यान रखें कि फीडबैक के तौर पर आपसे प्रशंसा पाकर वे और अच्छा करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं और आलोचना सुनकर दुखी एवं उदास हो सकते हैं। कभी भी फीडबैक की शुरुआत नकारात्मक बात से न करें। फीडबैक देने की शुरुआत सकारात्मक बात से करेंगी तो वह प्रोत्साहित होगा। इसलिए पहले उसकी अच्छाई की बात करें, उसके बाद ही नकारात्मक चीजों पर जाएं। बातें करते समय शब्दों का चयन करना जरूरी है।  जैसे- उसे यह न कहें कि तुमने अपने खिलौने संभालकर क्यों नहीं रखें। इसकी जगह यह कहें कि तुम्हारे खिलौने सही जगह पर न रखने की वजह से मैं बहुत दुखी हूं। इस तरह से वह आपकी बात को समझेगा और अगली बार अपने खिलौने संभालकर जगह पर रखेगा। मसलन- तुम्हें इस बार अच्छे नंबर लाने हैं तो थोड़ी ही ज्यादा पढ़ाई करनी होगी। यदि उसे कोई गलती हुई है और उसकी इस हरकत से दुखी हैं तो उसे सीधे लफ्जों में कहिए कि इसे तुम्हें खुद ठीक करना चाहिए। उसकी कोशिश के बाद भी यदि वह चीज ठीक नहीं हो रही है तो ही उसकी मदद के लिए आगे बढ़ें। बच्चों को फीडबैक हमेशा उदाहरण के साथ दें। यदि उसने आपकी पर्स से पांच रुपये निकालकर टॉफी खा ली है तो उसे बताएं तक यदि मैं तुम्हारी चीजें लेती हूं तो तुम्हें कैसा लगेगा। उसे सही और गलत के बीच का अंतर समझाएं। उसे फीडबैक देते समय शुगर एंड स्पाइस का इस्तेमाल करें यानी बहुत बुरा न बोलें, साथ में कुछ अच्छा भी बोलें।

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