सदियों पहले लिखे गए पुराण और धर्मग्रन्थ मानवीय जीवन के लिए आज भी बेहद उपयोगी हैं। इनमें धर्म और व्यक्तिगत जीवन से उपयोगी कई सारी बात बताई गई हैं। गरुण पुराण भी 18 पुराणों में से एक ऐसा ही बेहद उपयोगी ग्रन्थ है, जिसमें मृत्यु से लेकर आत्मा के रहस्य के नीति, धर्म और जीवन से उपयोगी बातें बताई गई हैं। जैसे कि गरुण पुराण में मनुष्य के लिए कुछ कर्मों को निषेध माना गया है, माना जाता है कि ऐसा करने से व्यक्ति की आयु कम हो जाती है। जी हां, आज हम ऐसे ही कुछ कर्मों के बारे में आपको बताने जा रहे हैं।
सुबह देर तक सोना

शास्त्रों में हमेशा सूर्योदय से पहले उठने की बात की गई है, दरअसल ये समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। दरअसल, सूर्योदय के पहले की वायु स्वास्थय के लिहाज से बेहद लाभकारी होती है, लेकिन बहुत से लोग देर से सोते हैं और वो इससे वंचित रह जाते हैं। ऐसे में देर तक सोने के कारण कई सारी शारीरिक समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं। इसलिए गरुण पुराण में देर तक सोना जल्दी मृत्यु का कारण माना गया है।
भोग-विलास में लिप्त रहना

गरुण पुराण के अनुसार, मैथुन क्रिया और दूसरे भोग विलास में अधिक लिप्त रहना भी व्यक्ति के लिए हानिकारक होता है। इससे शरीर की ऊर्जा का हनन होता है, जिससे शरीर कमजोर होता है और कई तरह के रोगों से ग्रस्त हो जाता है। इसलिए गरुण पुराण में अत्यधिक भोग-विलास में लिप्त रहने को भी आकस्मकि मृत्यु का कारण माना गया है।
मांस-मदिरा का सेवन

मांस-मदिरा का अधिक सेवन भी घातक होता है, इससे कई शरीर तरह के रोग और शारीरिक समस्याओं का शिकार हो जाता है। इसलिए गरुण पुराण में मांस-मदिरा के सेवन को निषेध किया गया है।
