शत-शत दीप प्रज्वलित रहे पर,
मिट ना सका जग का अंधियारा।
आओ जीवन दीप जलाकर
करें प्रकाशित भारत सारा।
आज पृथ्वी पर दीप जलाकर
हंसी हवायें मंद रही हैं।
जगमग-जगमग रोशनी हुई तब,
ज्योति किरन द्वार खड़ी है।

उजियाले की यह पाव से,
रातें रही हैं पखारा…॥
आओ जीवन…।।
जीवन का संघर्ष यही है,
अंधकार की गेह सारा,
दीपक मेरे मन में उठा है,
इस बाती का नेह सारा,
आओ जीवन…॥
खुशबू सा दीपक बना है,
दीपक निर्मल शांत।
दीप जलाकर रातें हंसी हैं,
ब्रह्मांडों की देह भी।
जलना दीपक देखकर है
खूब हंसा भारत सारा।
आओ जीवन…॥

नाम : यासू गर्ग
उम्र : 10 वर्ष
पता : रेवाड़ी (हरियाणा)