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भूतनाथ – बाबू देवकीनन्दन खत्री

Bhootnath novel by Devkinandan Khatri Babu लेखक का परिचय: -देवकीनन्दन खत्री बाबू देवकीनन्दन खत्री (18 जून 1861 – 1 अगस्त 1913) हिंदी के प्रथम तिलिस्मी लेखक थे। उन्होने चंद्रकांता, चंद्रकांता संतति, नरेंद्र-मोहिनी, कुसुम कुमारी, वीरेंद्र वीर, काजर की कोठरी, गुप्त गोदना, कटोरा भर, भूतनाथ जैसी रचनाएं की। ‘भूतनाथ’ को उनके पुत्र दुर्गा प्रसाद खत्री ने […]

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गीदड़ और मोर – २१ श्रेष्ठ लोक कथाएँ हरियाणा

एक जंगल में एक मोर और गीदड़ रहते थे। दोनों में बिन बात बेमेल दोस्ती हो गई। मोर को उसके माँ-बाप ने कहा कि यह बेमेल दोस्ती निभेगी नहीं। यह भी बताया कि कहावत है कि “नादां की दोस्ती जी का जंजाल”। लेकिन जैसे चीकले आजकल माँ-बाप की नहीं सुनते, मोर ने भी नहीं सुनी। […]

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गोदान – मुंशी प्रेमचंद भाग-5

उधर गोबर खाना खाकर अहिराने में पहुँचा । आज झुनिया से उसकी बहुत-सी बातें हुई थी । जब वह गाय लेकर चला था, तो झुनिया आधे रास्ते तक उसके साथ आयी थी । गोबर अकेला गाय को कैसे ले जाता । अपरिचित व्यक्ति के साथ जाने में उसे आपत्ति होना स्वाभाविक था । कुछ दूर […]

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गोदान – मुंशी प्रेमचंद भाग-3

होरी अपने गाँव के समीप पहुंचा, तो देखा, अभी तक गोबर खेत में ऊख गोड़ रहा है और दोनों लडकियाँ भी उसके साथ काम कर रही हैं । लू चल रही थी, बगूले उठ रहे थे, भूतल धधक रहा था । जैसे प्रकृति ने वायु में आग घोल दिया हो । यह सब अभी तक […]

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