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क्या है बच्चों में होने वाला सेंसरी डिसऑर्डर, जानें इसकी थेरेपी: Sensory Disorder Therapy
Sensory Disorder Therapy

Sensory Disorder Therapy: सेंसरी इंटीग्रेशन हमारी 5 इंद्रियों (वास्तव में 8) का उपयोग करके पर्यावरण से जानकारी प्राप्त करने की क्षमता है, जो इसे हमारे शरीर के भीतर व्यवस्थित करती हैं और उसी के अनुसार काम करती हैं। सेंसरी इंटीग्रेशन का एक आसान उदाहरण किसी से बात करते समय हॉर्न बजाते हुए गाड़ी की अनदेखी करना है। जब आप अचानक किसी पत्थर पर ठोकर खाते हैं तो तुरंत अपने आप को संतुलित करने का प्रयास करते हैं, यह भी सेंसरी इंटीग्रेशन का एक उदाहरण है। आइए लेक्सिकन रेनबो एंड चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर की सीनियर लाइसेन्स्ड ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट और सर्टिफाइड सेंसरी इंटीग्रेशन थेरेपिस्ट डॉ ईशा सोनी से सेंसरी इंटीग्रेशन थेरेपी के बारे में विस्तार से जानते हैं।

कुछ बड़ों और बच्चों को सेंसरी परेशानियां होती हैं। हम सभी की अपनी सेंसरी संवेदी प्राथमिकताएं होती हैं, कुछ को केवल मुलायम कपड़े या केवल पूरी बाजू/पैंट पहनना पसंद होता है, कुछ को बहुत तेज़ आवाज़ से दिक्कत होती है, कुछ सोचते समय अपने बालों के साथ खेलते हैं या दोस्तों को दूर से गले लगाना पसंद करते हैं। कुछ बच्चों को बाल कटवाना बेहद परेशान करने वाला लगता है, रोजाना की आवाज़ के लिए भी कान ढक लेते हैं, झूलों से डरते हैं, सीढ़ियां उतरते समय बेहद सतर्क होते हैं या चलते समय अपने पैर को थपथपाते हैं।

इस तरह से, विशेष सेंसरी (संवेदी) उत्तेजना को सहन करने के लिए हम सभी की अपनी संवेदी सीमाएं हैं। जब वे आपकी दिनचर्या में हस्तक्षेप करना शुरू कर देते हैं तो एक संवेदी मुद्दा बन जाते हैं। उदाहरण के तौर पर, एक बच्चे की लगातार चलने की जरूरत उसके ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई का कारण बनती है, घूमते हुए  वस्तुएं या खिलौनें उसे किसी दोस्त के साथ शेयर करने या खेलने में भाग लेने से रोकते हैं। या कुछ बच्चे बालों को ट्रिम करने और/या कंघी करने की इजाजत नहीं देते हैं। इस तरह की संवेदनशीलता को सेंसरी प्रोसेसिंग डिसऑर्डर (संवेदी प्रसंस्करण विकार) या सेंसरी प्रोसेसिंग इशू (संवेदी प्रसंस्करण मुद्दे) कहा जाता है।

किसे है इसकी जरूरत?

Sensory Disorder Therapy
These sensory issues are commonly reported in autistic children, ADHD children or those with cerebral palsy

ये सेंसरी इशू आमतौर पर ऑटिस्टिक बच्चों, एडीएचडी बच्चों या सेरेब्रल पाल्सी में रिपोर्ट किए जाते हैं। ये मुद्दे अन्य विकास डोमेन जैसे स्पीच, मोटर या सामाजिक विकास में बाधा डाल सकते हैं क्योंकि बच्चा लगातार अपनी संवेदी जरूरतों को पूरा करने या संवेदनशीलता के कारण कई परिस्थितियों से बचने के अवसरों की तलाश में रहता है।

इन मुद्दों को सेंसरी इंटीग्रेशन थेरेपी यानी संवेदी एकीकरण चिकित्सा द्वारा ठीक किया जा सकता है। यह सेंसरी इंटीग्रेशन थेरेपी में प्रमाणित एक ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट द्वारा प्रदान किया जाता है।

माता-पिता को क्या पता होना चाहिए?

• यह कोई टेबल-टॉप थेरेपी नहीं है। यह सेंसरी इंटीग्रेशन थेरेपी फाइन  मोटर स्किल्स आधारित टेबल टॉप गतिविधियों से बिल्कुल अलग है। 

• एक सेंसरी इंटीग्रेशन थेरेपी रूम में उपचार के दौरान उपयोग के लिए हमेशा सस्पेन्शन और इससे सस्पेन्डेड इक्विप्मेन्ट्स रहते हैं। जैसे प्लेटफॉर्म स्विंग, ट्यूब स्विंग, ट्रैपेज़, लाइक्रा स्विंग। 

• यह थेरेपी कभी पैसिव नहीं होती है। एक अच्छा सेंसरी इंटीग्रेशन थेरेपिस्ट बच्चे से “अनुकूली प्रतिक्रिया” प्राप्त करने के लिए हमेशा बच्चे को फॉलो करता है।

• यह हर बच्चे के लिए फिक्स एक्टिविटी का सेट नहीं है बल्कि एक्टिविटी बच्चे के सेंसरी प्रोफाइल पर निर्भर करती हैं। बच्चे के साथ थेरेपिस्ट की पहली विजिट में इसका पता लगाया जाता है।

• एक ही थेरेपी इक्विप्मेन्ट्स का इस्तेमाल होता है, लेकिन यह जरूरी है कि इसका इस्तेमाल कैसे, कब और कितनी तेजी के साथ किया जाता है। जैसे, कम या ऊंचा स्विंग, तेज या धीमा स्विंग। 

• सेंसरी पिरामिड के विभिन्न स्तरों पर स्किल्स को प्राप्त करने के बाद बच्चे के लिए एक्टिविटीज की जटिलता को बढ़ा दिया जाता है। 

• यह माता-पिता को सिर्फ “खेल” लग सकता है, लेकिन एक थेरेपी सेशन के दौरान थेरेपिस्ट द्वारा बच्चे के लिए कई योजनाएं बनाई जाती हैं।

• एक अच्छा थेरेपिस्ट आपको नियमित अंतराल पर घर पर फॉलो करने के लिए हमेशा एक “सेंसरी डाइट” देगा। सेंसरी एक्टिविटीज के सेट भी बताए जाते हैं, जिन्हें बच्चे की दैनिक दिनचर्या में शामिल किया जाना चाहिए ताकि उसकी भागीदारी को और अधिक उत्पादक बनाया जा सके। जैसे, पढ़ाई के समय या स्पीच सेशन से पहले मूवमेंट एक्टिविटीज। 

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