योगासन

गृहिणी घर में भले ही हर सदस्य की छोटी से छोटी जरूरत का ख्याल रखे, लेकिन वह अक्सर दूसरों का ख्याल रखते-रखते खुद की केयर करना भूल जाती हैं। शायद यही कारण है कि उन्हें कम उम्र में भी कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। दरअसल, वह घर-गृहस्थी के काम में इतना बिजी रहती हैं कि उनके पास खुद के लिए भी वक्त नहीं होता। हो सकता है कि आप भी खुद का ख्याल रखने के लिए जिम या फिटनेस सेंटर ज्वॉइन करना चाहती हों, लेकिन आपके पास समय की कमी हो।

ऐसे में आप घर पर ही कुछ योगासन करके खुद को चुस्त-तंदरूस्त रख सकती हैं। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे ही योगासनों के बारे में बता रहे हैं, जो एक हाउसवाइफ की सेहत का ख्याल रखने में उसकी मदद करेंगे-

ताड़ासन

अगर आप एक बिगनर हैं तो ऐसे में आप ताड़ासन का अभ्यास करें। यह आसन आपकी फुल बॉडी को स्ट्रेच करता है, बल्कि बॉडी पॉश्चर को भी बेहतर बनाता है। आप योगासनों की शुरूआत में इसका अभ्यास कर सकती हैं। ताड़ासन आपकी बॉडी को अधिक फ्लेक्सिबल बनाता है। इसलिए, नियमित रूप से इस आसन का अभ्यास करना चाहिए।

  • ताड़ासन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले मैट पर सीधी खड़ी हो जाएं।
  • इस अवस्था में आप अपनी एड़ियों को एक-दूसरे के साथ मिला कर रखें।
  • अब अपने दोनों हाथों को ऊपर की तरफ उठाएं।
  • अब सांस लेते हुए, अपने शरीर को ऊपर की ओर खीचें।
  • यथासंभव इस अवस्था में रूकें और फिर धीरे-धीरे सांस को छोड़ते हुए सामान्य स्थिति में लौट आएं।

भुजंगासन

यह एक बेहद ही साधारण आसन है, जो महिलाओं को होने वाले तनाव और थकान को कम करने में सहायक है। इतना ही नहीं, अधिकतर गृहिणियों को अक्सर कमर में दर्द की शिकायत रहती है, उनके लिए भी यह आसन लाभदायक है, क्योंकि यह पीठ के निचले हिस्से में होने वाले दर्द से राहत दिलाता है।

  • इस आसन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले मैट बिछाकर पेट के बल लेट जाएं।
  • अपने हाथों को छाती के बगल में रखें और माथे को जमीन पर टिकाएं।
  • अब अपने दोनों पैरों के बीच हल्का सा गैप रखते हुए उन्हें सीधा रखें।
  • अब लंबी सांस भरते हुए अपनी हाथों की मदद से नाभि तक शरीर को ऊपर उठाने का प्रयास करें।
  • ध्यान रखें कि आप पहले सिर को, फिर छाती और आखिर में नाभि वाले हिस्से को ऊपर उठाना होगा।
  • यथासंभव इस अवस्था में रूकें और फिर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट आएं।

पश्चिमोत्तानासन

पश्चिमोत्तानासन का अभ्यास करने से महिलाओं को एक साथ कई लाभ होते हैं। यह आपकी बैक को मजबूत बनाने से लेकर डाइजेशन को बेहतर बनाता है। इतना ही नहीं, जिन महिलाओं में सिर में दर्द या फिर तनाव व चिंता की शिकायत रहती है, उन्हें भी इस आसन का अभ्यास करना चाहिए। अगर आप थकान, मोटापा या अनिद्रा से परेशान हैं तो ऐसे में भी पश्चिमोत्तानासन बेहद लाभदायक है।

  • इस आसन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले मैट बिछाकर उस पर पैर सीधे करके बैठ जाएं।
  • इस अवस्था में आपके घुटने एकदम सीधे होने चाहिए और दोनों पैर आपस में मिले हुए हों।
  • इसके बाद, आप दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाते हुए और धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें।
  • अब आप माथे को घुटनों से सटाने की कोशिश करें। साथ ही हाथों से पैरों के अंगुठों को पकड़ने का प्रयास करें।
  • शुरूआत में हो सकता है कि आप ऐसा ना कर पाएं, लेकिन घुटने को मोड़े बिना जितना संभव हो, करें।
  • अब अपनी सुविधानुसार कुछ सेकंड के लिए इसी अवस्था में रूकें।
  • फिर धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में लौट आएं।

पवनमुक्तासन

पवनमुक्तासन को मुख्य रूप से पाचन तंत्र के लिए काफी अच्छा माना जाता है, क्योंकि यह कब्ज और गैस की परेशानियों को दूर करने में कारगर है। लेकिन इसके अलावा, इस आसन के नियमित अभ्यास से पीठ के निचले हिस्से की मांसपेशियां भी मजबूत होती है। वहीं, महिलाओं के लिए इसे विशेष रूप से लाभदायी माना गया है, क्योंकि यह महिलाओं की पीरियड्स प्रॉब्लम और बांझपन की समस्या को भी काफी हद तक दूर कर सकता है।

  • पवनमुक्तासन का अभ्यास करने के लिए मैट बिछाकर सीधे लेट जाएं।
  • अब एक गहरी श्वास लें और सांस छोड़ते हुए, दोनों पैरों को ऊपर उठाकर घुटनों को मोड़ें।
  • अब, अपने दोनों हाथों से अपने घुटने को पकड़ लें और कुछ सेकंड तक मजबूती से दबाए रखें।
  • अब अपने हाथों को छोड़ें और फिर पैरों को दोबारा सीधा करें।
  • इसी प्रक्रिया को आप एक-एक पैर से भी कर सकते हैं।

उष्ट्रासन

उष्ट्रासन के लाभ – Ustrasana benefits in hindi

उष्ट्रासन श्वसन तंत्र के लिए काफी अच्छा माना गया है। इसके अभ्यास से शरीर में ऑक्सीजन लेवल बेहतर होता है। साथ ही अगर नियमित रूप से इस आसन का अभ्यास किया जाए तो जांघों का फैट कम होता है और जो महिलाएं हेयर फॉल की समस्या से जूझ रही हैं, उन्हें भी यह आसन अवश्य करना चाहिए। यह आसन आपके कंधों और पीठ को स्ट्रेच करता है, जिससे रीढ़ अधिक फ्लेक्सिबल बनती है।

  • उष्ट्रासन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले घुटने टेककर चटाई पर बैठ जाएं।
  • इस दौरान आपके दोनों घुटनों के बीच में हल्का सा गैप हो।
  • अब आप धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकते हुए हाथों को पीछे की ओर ले जाएं।
  • अब आप, अपनी एड़ी को धीरे से पकड़ने की कोशिश करें।
  • इस अवस्था में आप अपनी चिन को ऊपर उठाएं और पेट को हल्का आगे की ओर करें।
  • कुछ देर इस अवस्था में रूकें।
  • अंत में, सांस छोड़ते हुए धीरे से वापिस सामान्य अवस्था में लौट आएं। 
  • अगर आप पहली बार यह आसन कर रही हैं या फिर आपको घुटनों में कोई समस्या है तो आप पहले मैट के उपर कुशन रख लें और उसके बाद ही इस आसन का अभ्यास करें।

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