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Lifestyle tips : लॉकडाउन के बाद स्कूल खुलने को लेकर अधिकतर बच्चे काफी उत्साहित हैं तो कुछ बच्चों के दिमाग में उथल-पुथल मच रही है। इस मानसिक बेचैनी को उनके अभिभावक ही शांत कर सकते हैं और स्कूल जाने के लिए फिर से तैयार कर सकते हैं।

कोविड-19 महामारी ने स्कूल बंद होने और घर बैठे कार्य करने की वजह से कई परिवारों की जिंदगी में बदलाव किया। ज्यादातर लोगों को इस महामारी की वजह से काफी समय घर पर एक साथ बिताने का अवसर मिला।

कई बच्चे अब पूरे दिन अपने माता-पिता के साथ रहते हैं। अब स्कूल खुलने की खबरें आ रही हैं और कुछ बच्चे फिर से स्कूल लौटने के लिए इच्छुक नहीं दिख रहे हैं, क्योंकि वे कई महीनों से घर से ही पढ़ाई कर रहे हैं।

लेकिन घर के बड़े सदस्यों को इस समस्या को शांतिपूर्वक संभालना चाहिए। माता-पिता को अपने बच्चों और दूसरों को सुरक्षित बनाए रखने में मदद के लिए उन्हें सुरक्षा उपायों के बारे में समझाने की जरूरत है।

बच्चों को किसी तरह की अनिश्चितता से दूर रखने के बजाय उसके बारे में समझाना जरूरी है। अनिश्चितता से पैदा होने वाली चिंता से बच्चों को यह अवगत कराना जरूरी होता है कि हम क्या जानते हैं और क्या कर सकते हैं।

अपने बच्चे को यह समझाएं कि वे आराम से स्कूल जाने की तैयारी कर सकते हैं। उन्हें तुरंत दौड़ लगाने की जरूरत नहीं है। फिर से दोस्तों के साथ खेलने में सहज होने में समय लग सकता है और यह पूरी तरह से ठीक है।

इसकी संभावना है कि कुछ बच्चे स्कूल जाने के नाम से नाराज हो सकते हैं, खासकर 8 महीने से लेकर 3 साल के और यह आपके बच्चे के विकास का सामान्य हिस्सा है। कोविड-19 महामारी के दबाव और अनिश्चितता का मतलब है कि ऐसे व्यवहार कई बार बड़े बच्चों में भी देखे जा सकते हैं।

यह समय ऐसा है कि बच्चे डेकेयर या स्कूल जाते वक्त अलग होने की चिंता जता सकते हैं। इस बीते वर्ष के घटनाक्रमों की वजह से बड़े बच्चों को भी स्कूल आते-जाते ज्यादा कठिन समय का सामना करना पड़ सकता है, साथ ही यह भी डर सता सकता है कि वे कोविड-19 से सुरक्षित रह पाएंगे या नहीं।

बच्चों के अभिभावकों को स्कूल में फिर से भेजने के अनुभव को सुखद बनाने के लिए कुछ उपाय करने की जरूरत होगी। इस बदलाव की स्थिति में अपने बच्चे की मदद करें, क्योंकि इस प्रक्रिया में समय लगता है। नीचे ऐसे कुछ बिंदुओं पर प्रकाश डाला जा रहा है, जिन्हें ध्यान में रखने की जरूरत होगी-

अपने बच्चों की सुनें

अपने बच्चों की चिंताओं को समझें और उन पर गंभीरता से विचार करें तथा उनकी मदद करें। यह सुनिश्चित करें कि आप अपने बच्चे को यह बताएं कि वे जो भी बदलाव देख रहे हैं, वह सब सामान्य है। यदि आपका बच्चा इस नए अनुभव के बारे में अच्छी तरह से समझेगा तो चुनौतियां दूर हो जाएंगी। कई किशोर अपनी भावनाओं के बारे में माता-पिता से बात करने में असहज महसूस कर सकते हैं, इसलिए उन्हें अपनी बात बताने को प्रोत्साहित करें।

स्कूल का दौरा करें

आपके बच्चे के मन में पैदा हुई आशंकाओं को दूर करने के लिए बच्चे के साथ स्कूल जाएं। इससे बच्चे को स्कूल में बेहतर परिवेश के लिए अवसर तैयार करने में मदद मिलेगी।

नियम का पालन करें

अब सामान्य की परिभाषा बदल गई है, इसलिए अपने बच्चे को कोविड के बाद स्कूल के नए नियमों और शर्तों को समझाएं। अपने बच्चे से पूछें कि वह स्कूल फिर से जाने को लेकर कैसा अनुभव कर रहा है और यह सुनिश्चित करें कि यदि किसी तरह की चिंताएं या समस्या है तो आप उनके शिक्षक को अवगत कराएंगे।

सक्रिय बनें

बच्चे अक्सर अपनी जिंदगी में बड़ों से प्रेरणा लेते हैं, इसलिए आपको बच्चे की चिंताओं को सुनना चाहिए, उनसे प्यार से बात करनी चाहिए और आश्वासन देना चाहिए। इसके लिए तैयार रहें कि उनकी भावनाएं बदल सकती हैं और उन्हें समझाएं कि यह सब पूरी तरह ठीक है।

अपने बच्चे को यह सिखाएं कि आप उस पर भरोसा रखते हैं और जानते हैं कि इस नए दौर के दौरान पैदा होने वाली चुनौतियों से वह पूरी तरह मुकाबला करने में सक्षम है।

हालात काफी हद तक इस पर भी निर्भर करते हैं कि स्थिति को लेकर प्रतिक्रिया दिखाने का बच्चों का तरीका कैसा है। यदि कोई बच्चा अपने आपमें खोया रहता है तो आपको हमेशा यह पूछना होगा कि वह कैसे कर रहा है।

माता-पिता या अभिभावक यह निर्णय ले सकते हैं कि बच्चा किस दिशा में जा रहा है, लेकिन उसके बाद स्थिति का प्रबंधन करने के लिए कार्य योजना बेहद सतर्कता के साथ बनाई जानी चाहिए।

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