यूं तो हम सभी दीवाली पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं, क्योंकि यह त्योहार जितनी पवित्रता के साथ मनाया जाएगा मां लक्ष्मी हम पर अपनी उतनी ही अधिक कृपा बरसाएंगी। दीपावली पर्व केवल पर्व ही नहीं इसके साथ ज्योतिष एवं वास्तु का समावेश भी है। वास्तुशास्त्र में चार दिशाएं होती है। तथा स्वास्तिक चारों दिशाओं का बोध कराता है। पूर्व, दक्षिण, पश्चिम, उत्तर। चारों दिशाओं के देव पूर्व के इन्द्र, दक्षिण के यम, पश्चिम के वरुण, उत्तर के कुबेर। सुख, शान्ति व समृद्धि के लिए जरूरी है चारों दिशाओं की सफाई, सजावट व पूजना जिसका सही अवसर है दीवाली। वास्तु के निम्न उपायों द्वारा आप न केवल लक्ष्मी जी को प्रसन्न कर सकते हैं बल्कि जीवन में सुख समृद्धि भी पा सकते हैं –

  • घर में किसी भी प्रकार का टूटा-फूटा या खराब सामान न रखें। दीवाली के लिए जिस दिन भी सफाई करना प्रारम्भ करें सर्व प्रथम इस प्रकार के कूड़े-करकट को ठिकाने लगा दें।
  • जब घर में पोछा लगाएं तो ध्यान रखें कि पानी में थोड़ा सा नमक अवश्य मिला दें तथा तिजोरी, अलमारी तथा अन्य फर्निचर्स को भी नमक मिले पानी से ही पोछ कर साफ करें।
  • घर को जितना हो सके उतना खुला तथा प्रकाशमान रखें तथा यदि सम्भव हो तो घर के प्रत्येक कमरे को अवश्य रंगवाएं।
  • सफाई से संबंधित इन तैयारियों के बाद में धूपबत्ती, कपूर या अगरबत्ती अवश्य जलाएं।
  • घर के अंदर की सफाई करने के बाद इस बात का भी धन रखें कि घर के बाहर तथा छत पर किसी भी प्रकार का कूड़ा एकत्रित न हो।
  • मुख्य द्वार पर स्वास्तिक अस्थ मंगला का चिन्ह अवश्य लगाएं, क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा घर के अंदर नहीं आती।
  • इसके साथ ही मुख्य द्वार पर मां लक्ष्मी के पद चिन्ह इस प्रकार चिपकाएं जेसे वो घर के अंदर आ रही हों। यह सारे चिन्ह बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं।
  • घर के मुख्य द्वार के पास जो भी खाली जगह हो वहां पर समुद्री नमक से रंगोली बनाएं तथा इसे मिट्टी के दिए से सजाएं।
  • घर के मुख्य द्वार पर सजावट हेतु गेंदे के फूल तथा आम के पत्तों से बने तोरण का प्रयोग करें। यह बहुत शुभ होता है।
  • दीवाली में प्रयोग किए जा रहे मिट्टी के दीयों में सरसों के तेल या घी का प्रयोग करना शुभ होता है। पूरे घर में यदि घी के दीए जलाना सम्भव न हो तो पूरे घर में सरसो के तेल का दीया जलाएं तथा कम से कम पांच दीए घी के अवश्य जलाएं।
  • घर तथा मुख्य द्वार की सजावट के साथ-साथ घर के बाउंड्री वॉल पर दीए जलाना न भूलें।
 
 

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वास्तु आनुसार करें लक्ष्मी पूजन
 
लक्ष्मी पूजन करते समय वास्तु के निम्नलिखित विधियों तथा उपायों का ध्यान रखने से पूजन अधिक फलदायी होता है —
 
  • उत्तर दिशा धन व सम्पत्ति की दिशा होती है। इस कारण से पूजा के लिए इस दिशा का चुनाव करें तथा भगवान लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियों को पूजा घर में उत्तर-पूर्व में रखें।
  • इस बात का भी ध्यान रखें कि भगवान की मूर्तियों का मुख दरवाजे की ठीक सामने न हो।
  • पूजा स्थल की सफाई व स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
  • पूजाघर के पूर्व या उत्तर दिशा में पानी से भरे कलश की स्थापना करना बहुत ही शुभ माना जाता है।
  • शुद्ध देशी घी का दीपक या फिर कपूर अथवा अगरबत्ती जला कर पूजा का प्रारम्भ करें।
  • पूजा के दौरान भगवान गणेश सर्वप्रथम पूजे जाने के अधिकारी होते हैं। तथा उनके बाद नवग्रह फिर मां लक्ष्मी जी का आवाहन प्रारम्भ करें।
 
पूजन की विधि
 
  • माता लक्ष्मी की मूर्ति को दूध, दही, घी, गंगाजल तथा शहद से पंचामृत बनाकर उससे स्नान कराएं और उसके बाद उसे गंगाजल से पुन: स्नान करा कर एक साफ कपड़े से पोछ लें फिर मां की मूर्ति की स्थापना कर लें।
  • मां लक्ष्मी की मूर्ति को तिलक लगाएं तथा श्रृंगार की सामाग्री तथा वस्त्र चढ़ाएं।
  • मां के समक्ष धूप व दीप दिखाते हुए उनकी कथा वाचें फिर भोग लगाकर दक्षिणा दें तथा उसके बाद आरती करें।
  • अंत में पुन: मां को पुष्प अर्पण करने का विधान है तथा इसके बाद पूरी श्रद्धा से मां से प्रार्थना करें।
 

 

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