गणेश चतुर्थी का त्यौहार भारत के विभिन्न भागों में धूम-धाम से मनाया जाता है।  महाराष्ट्र में इस त्यौहार की अलग ही रौनक होती है। इस साल यह त्योहार 2 सितंबर को मनाया जाएगा। हिंदू मान्यताओं के अनुसार इसे भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस मौके पर लोग अपने घरों में भगवान गणेश को स्थापित करते हैं और फिर कुछ दिन के अंतराल पर विसर्जन कर दिया जाता है। महाराष्ट्र में बहुत धूमधाम से मनाए जाने वाले इस पर्व के दौरान भक्त आमतौर पर 7 से 11 दिन के लिए अपने घर में गणपति स्थापना करते हैं। वहीं, कुछ लोग 3, 5, 7 या 10 दिन में भी गणपति का विसर्जन करते हैं। इस तरह से 11 दिन चलने वाला गणेशोत्सव अनंत चतुर्दशी के दिन समाप्त हो जाता है। 
 
 
कैसे करें पूजन व स्थापना 
 
गणपति को जब घर में स्थापना के लिए आप लेने जाएं तो स्नान आदि करके नए और साफ़ वस्त्र धारण कर लें। हो सके तो चांदी की थाली में स्वास्तिक बनाकर उसमें गणपति को विराजमान करके लाएं। यदि चांदी का बर्तन नहीं है तो पीतल या तांबे की थाली का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। आप चाहें तो बड़ी मूर्ति को हाथों में लाकर भी विराजमान कर सकते हैं। भगवान की मूर्ति स्थापित करने के बाद उनकी विधिवत पूजा करें। साथ ही मोदक  का भोग लगाएं और सुबह-शाम आरती करें। आप घर में जहां गणपति  को विराजमान करने जा रहे हैं उस जगह को रंगोली, फूल, आम के पत्ते और अन्य सामग्री से सजाएं। साथ ही उनके आसन को भी हल्दी, कुमकुम,फूल आदि से सजा दें। ये सारी तैयारियां गणपति को घर  लाने से पहले ही कर लें। 
 
गणेश चतुर्थी के मौके पर यश, सम्मान, समृद्धि और सुख के लिए गणेश जी की पूजा की जाती है। विघ्नहर्ता गणेश जी का पूजन पूरे विधि-विधान के साथ किया जाता है। इस दिन सुबह-सुबह पूजा करके गणेश भगवान को दूर्वा जरूर चढ़ाएं। कुमकुम से स्वास्तिक बनाएं। गणेश जी  को तुलसी को छोड़कर सभी तरह के फूल  अर्पित किए जा सकते हैं। इसके बाद गणपति को मोदक का भोग लगाया जाता है।