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तीन अक्षर से मिलकर बना है- 

‘अ’ यानी आरंभ या उत्पन्न होना। 

‘ऊ’ यानी उठना या विकास। 

‘म’ यानी मौन हो जाना या ब्रह्मलीन हो जाना।

सिद्धांत या पद्मासन में आंखें बंद करके बैठ जाएं। रीढ की हड्डी सीधी हो, एक गहरी सांस लें और ॐ का उच्चारण करते हुए धीरे-धीरे श्वांस छोड़ें और श्वांस छोड़ते समय मुंह धीरे-धीरे बंद करें और म का उच्चारण मुंह बंद करके करें। मकार लंबा होना चाहिए। यह जाप 6 मिनट तक करें। हमारा पूरा ध्यान दोनों भौं के बीच में आज्ञा चक्र पर स्थित हो। यह जप ज्ञान मुद्रा में करने से विशेष लाभ होता है। अंत में हरी ॐ बोले।

‘ॐ उच्चारण करने से हमारे मस्तिष्क में एक विशेष प्रकार का सकारात्मक कंपन पैदा होता है, जिससे हमारे मस्तिष्क को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन की प्राप्ति होती है और मस्तिष्क में एक नई ऊर्जा का संचार होता है, जिससे घबराहट, बेचैनी, डर, तनाव, अवसाद, उतावलापन आदि रोग दूर हो जाते हैं। जब हम आंखें बंद करके दोनों भौं के बीच में, आज्ञाचक्र में ॐकार का जप करते हैं, तो इससे हमारा मन और मस्तिष्क शांत हो जाता है, और हम ध्यान की स्थिति में चले जाते हैं। इससे हमारी एकाग्रता व याद्दाश्त बढ़ती है और हमें शांति की प्राप्ति होती है। 

ॐकार के जप से मांस पेशियों को शक्ति मिलती है, गले की सूजन दूर होती है, स्वर दोष दूर होते हैं और थायराइड समस्या दूर होती है। फेफड़ों में विशेष कंपन के कारण उच्च स्तर का प्राणायाम होता है जिससे फेफड़े मजबूत होते हैं, श्वसन तंत्र की शक्ति बढ़ती है और केवल 6 माह में अस्थमा, टीबी, आदि रोगों में लाभ मिलता है। साथ ही ऊंकार जाप से रीढ़ की हड्डी को मजबूती मिलती है।

लगातार सुबह-शाम 6-6 मिनट ऊंकार जाप करने से रक्त संचार में सुधार होता है, रक्त में ऑक्सीजन का लेवल बढ़ जाता है, जिससे रक्तचाप घटता है, कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है, और हार्ट अटैक का खतरा कम हो जाता है।

ॐकार के जप से शरीर के विषैले तत्त्व दूर हो जाते हैं, पाचन तंत्र, लीवर व आंतों को शक्ति प्राप्त होती है, पाचन सही होता है व सैंकड़ों  रोग दूर हो जाते हैं।

ॐकार के जप से शरीर में युवावस्था वाली स्फूर्ति का संचार होता है। थकान मिटाने के लिए इससे अच्छा कोई उपाय नहीं है। इससे नींद की समस्या दूर होती है और भरपूर नींद होने से हमारी आयु बढ़ती है। 

मन चंचल है उसे नियंत्रित करने के लिए मौन एक चिंतन है। मौन आत्मा का परमात्मा से संवाद है। यह आपकी जिंदगी बदल सकता है। इससे आत्मविश्वास एकाग्रता व रचनात्मक शक्ति, तर्क करने की शक्ति, जल्द निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। शास्त्रों के मुताबिक एक घड़ी 24 मिनट की होती है, उसके आधे का आधा 6 मिनट होता है। इसीलिए व्याधियों से मुक्ति पाने के लिए सुबह-शाम कम से कम 6 मिनट ऊंकार जप व 6 मिनट का मौन धारण करें,  स्वस्थ रहें एवं नीरोग रहें। 

– बिपिन तिवारी