अब जैसे ही भारत क्या कोविड की दूसरी लहर के दौरान वैक्सीन लगाने पर महत्त्व डाल रहा है, वैसे ही नई वैक्सीन भी प्रयोग में आने वाली हैं। अगर आप भी जानना चाहते हैं इन अलग अलग वैक्सीन के बीच का फर्क तो जरूर पढ़िए आज का यह आर्टिकल ।

भारत ने खुद की दो वैक्सीन बनाई हैं और तीसरी वैक्सीन जो रशिया ने बनाई है, वह भारत में पहुंच गई  है। भारत में अब 1 मई से 18 साल से ऊपर वाले लोगों के लिए वैक्सिनेशन का रजिस्ट्रेशन चालू हो गया है। अब तक केवल 45 साल से ऊपर के लोग ही वैक्सीन लगवा सकते थे।

जैसे ही भारत अपना वैक्सिनेशन प्रोग्राम आगे बढ़ाने की सोच रहा है, सरकार प्राइवेट उद्योगों से वैक्सीन खरीदने को बढ़ावा दे रहा है। ऐसे में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, जिसने कोविशिल्ड वैक्सीन का निर्माण किया है, ने बुधवार को अनाउंस किया है कि वह अब राज्य सरकारों को वैक्सीन 400 रूपिए की बजाए 300 रुपिए में उपलब्ध करवाएगा।

जबकि को वैक्सीन जोकि भारत में ही बनी वैक्सीन और जो कोविड के लगभग 617 वेरियंट्स को न्यूट्रिलाइज करने की क्षमता रखती है। व्हाइट हाउस के चीफ मेडिकल एडवाइजर डॉक्टर एंथनी फौसी का कहना है कि को वैक्सीन हमारे इम्यून सिस्टम को एंटी बॉडीज बनाना सिखाती है ताकि वह हमें कोरोना वायरस से बचा सके। यह एंटी बॉडीज फिर वायरल प्रोटीन यानी स्पाइक प्रोटीन के साथ जुड़ जाती हैं।

दोनों ही को वैक्सीन और कोविशील्ड वैक्सीन भारतीय लोगों को सरकारी वैक्सिनेशन सेंटर पर मुफ्त में और प्राइवेट वैक्सिनेशन सेंटर पर 250 रूपिए में उपलब्ध हैं। विदेशी वैक्सीन स्पुतनिक वी भी भारत में एक मई से ओपन मार्केट में उपलब्ध हो गई।

 तीनों वैक्सीन में अंतर निम्न है :

वैक्सीन

वैक्सीन का प्रकार

डोसेज और डोसेज के बीच का टाइम गैप

स्टोरेज और एक्सपायरी

मूल्य

एस्ट्रा जेनिका

( कोविशील्ड S2 पुणे द्वारा )

वायरल वेक्टर

2 इंजेक्शन और 12 हफ्तों का गैप

2 से 8 डिग्री सेल्सियस, 6 महीने

सरकार के लिए : 300 प्रति डोज राज्यों और 600 प्रति डोज प्राइवेट अस्पतालों में।

जनता के लिए : प्राइवेट अस्पतालों में 250 में और सरकारी सेंटरों में मुफ्त में।

को वैक्सीन

( भारत बायोटेक, हैदराबाद )

इन एक्टिवेटेड वायरस

2 इंजेक्शन और 4 से 8 हफ्तों का गैप

2 से 8 डिग्री सेल्सियस

सरकार के लिए : 600 प्रति डोज राज्य और 1200 प्रति डोज प्राइवेट अस्पतालों में।

जनता के लिए : 250 प्राइवेट अस्पतालों में और सरकारी सेंटरों में मुफ्त।

स्पुतनिक वी

( गमेलिया, रशिया )

वायरल वेक्टर

2 इंजेक्शन, 21 दिन से 3 महीनों का गैप

तरल फॉर्म में -18.55 डिग्री सेल्सियस और ड्राई फॉर्म में 2 से 8 डिग्री सेल्सियस

अभी भारत में इसका मूल्य ऑफिशियल तौर पर तय नहीं किया गया है लेकिन वैश्विक तौर पर इसका मूल्य 10 डॉलर यानी 750 रूपये है।

स्पुतनिक वैक्सीन में दो अलग अलग वेक्टर्स का प्रयोग किया जाता है इसलिए इसके दोनों डोज अलग अलग होते हैं। दोनों ही डोज जैसे सुझाए गए हैं वैसे लेने चाहिए। एस्ट्रा जेनिका और भारत बायोटेक की को वैक्सीन के लिए एक्सपर्ट्स कहते हैं कि इन दोनों वैक्सीन के दोनों डोज में दो अलग अलग या मिक्स करके वैक्सीन नहीं बनाई गई है।

वैक्सीन के अलग अलग डोज में इतना समय इसलिए रखा गया है क्योंकि हमारे इम्यून सिस्टम को वैक्सीन का रेस्पॉन्स दिखाने में लगभग 3 हफ्ते लग जाते हैं लेकिन वैक्सीन से एंटी बॉडीज उत्पन्न होने में और उन्हें काम आने में लगभग 8 हफ्ते या उससे भी अधिक समय लग सकता है।

निष्कर्ष

चाहे बेशक आप कोविड वैक्सीन लगवा भी लेते हैं लेकिन फिर आपको बिलकुल पूरी तरह निश्चिंत या लापरवाह नहीं हो जाना है। आपको अपनी और दूसरों की सुरक्षा का ख्याल फिर भी रखना है। आपको बाहर निकलते समय मास्क और अन्य सुरक्षा नियमों का प्रयोग भी करना है।

यह भी पढ़ें-

घर में बनाएं काढ़ा और कोरोना से रहें सुरक्षित

क्या कोविड-19 के संक्रमण के फैलते हुए सुरक्षित है सेक्चुअल इंटरकोर्स

स्वास्थ्य संबंधी यह लेख आपको कैसा लगा? अपनी प्रतिक्रियाएं जरूर भेजें। प्रतिक्रियाओं के साथ ही स्वास्थ्य से जुड़े सुझाव व लेख भी हमें ई-मेल करें editor@grehlakshmi.com