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दांतों के लिए घातक है अधिक शक्कर: Sugar and Dental caries
Sugar and Dental caries

Sugar and Dental caries: मीठा खाना सभी को पसंद है और बड़े चाव से खाया भी जाता है। किंतु अत्यधिक शक्कर खाने से हमारे दांतों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। यदि शक्कर खा लेने के बाद मुंह साफ कर लिया जाए तो अवश्य उसका इतना असर नहीं होगा, जितना उसे दांतों के बीच पड़ा छोड़ देने से होता है। वास्तव में मुंह में शक्कर या शर्करायुक्त पदार्थों के पड़े रहने से कीटाणुओं को पनपने का मौका मिलता है तथा उससे मुंह में अम्ल पैदा होते हैं जिससे उसका हानिकारक असर दांतों पर पड़ता है।
हमारे मुंह में बनने वाली थूक में प्रोटीन होता है। इसकी परत दांतों पर जमने लगती है जो चिपचिपी होती है जिसे दांतों पर जीभ फेरने से महसूस किया जा सकता है। कभी-कभी यह पारदर्शक सी दिखाई देती है। इसी से दांतों में सड़न पैदा होती है व मसूढ़े पिलपिले हो जाते हैं। किंतु यह परत शर्करायुक्त पदार्थ के साथ मिल जाए तो अम्ल पैदा करती है। यह अम्ल दांतों में सड़न पैदा करता है। दांतों में सड़न पैदा होने के तीन कारण हैं जिन्हें याद रखना चाहिए। पहला परत, दूसरा शर्करायुक्त पदार्थ तथा तीसरा अम्ल। इनमें से किसी एक को निकाल दें तो दांत कभी खराब नहीं हो सकते।
शर्करा के मुख्य प्रकार एवं उनके विकल्पों की जानकारी होनी चाहिए। सुक्रोज-गन्ना व चुकंदर की शर्करा, ग्लूकोज-अंगूर की शर्करा, फ्रूक्टोज-फल की शर्करा, लेक्टोज-दूध की शर्करा, शहद द्विफल (मेपल) का मीठा रस व भुट्टे का मीठा रस। सामान्य रूप से खाई जाने वाली सफेद भूरी रंग की शक्कर सुक्रोज होती है जो दांतों के लिए सर्वाधिक खतरनाक है, क्योंकि इससे बनने वाली परत काफी मोटी और चिपचिपी होती है। शराब में सार्बिटोल और मोर्बिटोल नामक शक्कर होती है जो सामान्यत: खाई जाने वाली शक्कर से कम हानिकारक है किंतु यह काफी महंगी है। एस्पार्टेम, सैकरीन, साइक्लोंमेंट कुछ ऐसे पदार्थ हैं जो शर्करायुक्त नहीं हैं, फिर भी मिठास पैदा करते हैं। वे दांतों के लिए पूर्णरूपेण सुरक्षित है। इनका दांतों पर कोई खराब असर नहीं पड़ता। जैसे साइक्लोंमेंट शक्कर से 25 गुना अधिक मीठी व सैकरीन 200 गुना अधिक मीठी है। इस मात्रा से कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता है।
क्या हम जानते हैं कि टमाटर के सॉस में एक चौथाई मात्रा शक्कर होती है। पाचन शक्ति बढ़ाने वाले बिस्किट में, शक्तिवर्धक पाउडर बोर्नविटा, हार्लिक्स जैसे पदार्थों में शक्कर होती है। प्रतिदिन काम में आने वाले मकई, बेक्ड बीन, मैक्रोनी, मटर, सब्जियां व मास इन सभी में थोड़ी मात्रा में शक्कर होती है। जो जैम या मार्मलैड काफी खाते हैं उन्हें भी काफी हानि उठानी पड़ सकती है। इसकी शक्कर चिपचिपी होती है, जो दांतों पर परत जमाने में अधिक सक्षम होती है। इसी प्रकार ठंडे पेय हैं, उनमें किसी न किसी मात्रा में शक्कर जरूर होती है।
प्रश्न यह उठता है कि कितनी मात्रा में शक्कर खाने से हमारे दांत सुरक्षित रह सकते हैं। इसका कोई विशेष मापदंड नहीं है। आप किस तरह का आहार ग्रहण करते हैं, उसमें कितनी मात्रा में शक्कर है, वह पदार्थ कितनी मात्रा में आपके मुंह में रहता है और कितनी मात्रा में एक साथ उसे खाया जाता है, इसके अतिरिक्त कितनी मात्रा में थूक बनता है इन सभी बातों का असर दांतों पर पड़ता है।
यदि हम दांतों की सुरक्षा चाहते हैं तो उसकी सुरक्षा पद्धति को थोड़ा मजबूत करना होगा। जब भी परत दांतों पर जमने लगे तो उसे निकलवा लेना चाहिए। कुछ रसायन ऐसे होते हैं जिनसे दांतों का एनेमल मजबूत बनता है, उससे परत कम जमती है और सड़न कम पैदा होती है। इस तरह का रसायन सोरायासिस होता है। जिन लेागों को मीठा कुछ अधिक ही पसंद है, उनके दांतों में दर्द पैदा होता है। अगर दांतों की देखभाल न की गई तो बार-बार दंत चिकित्सक के पास जाना पड़ सकता है। अंत में जिनके दांत गिर जाते हैं और उन्हें मोटापा भी आ घेरता है। रक्तवाहिनियां खराब होने लगती हैं। हृदय पर असर पड़ता है। मधुमेह और अन्य बिमारियां भी हो सकती हैं।
हमें अत्यधिक मात्रा में मीठी चीजें नहीं खानी चाहिए। अगर कोई विशेष अवसर हो तो मिठाई खाएं किंतु अनुपात में जिससे किसी को बुरा भी न लगे और दांतों को क्षति भी न पहुंचे। इसकी जगह फल, मेवे और दूसरी चीजें खाने की कोशिष करें। हमें प्रतिदिन सुबह-रात ब्रश करना चाहिए और दिन में कुछ खाने के बाद जब भी समय मिले फ्लोराइड वाले तरल पदार्थ से कुल्ला करें। समय-समय पर विशेषज्ञ को दांत दिखाते रहना चाहिए।

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