गुड मैनर्स ट्रेनिंग:

कहते हैं कि एक बच्चा मिट्टी की तरह और मां कुम्हार की तरह होती है। मां बच्चे को जिस रूप से ढालती है, बच्चा उसी रूप में ढलता जाता है। इसलिए बच्चे के जन्म के बाद एक मां की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वे अपने बच्चे की अच्छी देखभाल के साथ उसे सही ट्रेनिंग भी दे ताकि बच्चे में सही आदतों का विकास हो।
इस बारें में डफरिन हॉस्पिटल (लखनऊ) के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सलमान का कहना है कि जब एक बच्चा जन्म लेता है तो उसमें किसी प्रकार की समझ नहीं होती है, लेकिन जैसे-जैसे वो बड़ा होने लगता है तब उसकी समझने और पहचानने की क्षमता विकसित होने लगती है और उस दौरान बच्चे के अंदर जैसी आदत डाली जाए बच्चा उसी को ही हमेशा के लिए ग्रहण कर लेता है। बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए जरूरी है कि उसकी उम्र के अनुसार उसे सही ट्रेनिंग भी दी जाए।

बेबी की ट्रेनिंग

बॉटल फीडिंग: बच्चे को 6 महीने का होने के बाद दूध की बोतल पकडऩा सिखाएं। इसके लिए शुरुआत में बच्चे को दूध पिलाते समय कुछ देर आप बोतल पकड़ें और उसके बाद कुछ मिनट अपने हाथों का सहारा देते हुए बच्चे को दोनों हाथों से बोतल पकड़ाने की कोशिश करें। जब बच्चा बोतल पकडऩा सीख जाए तो उसे खुद ही पकडऩे दें। फिर 2 वर्ष की उम्र के बाद इसी तरह धीरे-धीरे बच्चे की बोतल की आदत छुड़वाते हुए उसे छोटे गिलास या कटोरी में दूध देना शुरू करें।

गुड मैनर्स ट्रेनिंग:
देखभाल के साथ ट्रेनिंग भी जरूरी 4
                                                   

सिटिंग पॉस्चर ट्रेनिंग: सिटिंग पॉस्चर ट्रेनिंग के बारे में फोर्टिस हॉस्पिटल (नई दिल्ली) की वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नीतू तलवार का कहना है कि अक्सर बच्चों या बड़ों में पीठ दर्द की समस्या सुनने को मिलती है। इसकी एक वजह है उनका गलत ढंग से बैठना, जिसकी आदत उन्हें बचपन से पड़ चुकी होती है। आगे चलकर यह बड़ी शारीरिक समस्या बन सकती है, इसलिए बच्चे को बचपन से ही सही पॉस्चर में बैठाना सिखाएं। जब बच्चा बैठना शुरू करे तो उसे शुरूआत में तकिये की सहायता से बैठाएं। फिर धीरे-धीरे उसे खुद के बल पर बैठने दें। जब बच्चा बैठने लगे तो उसके पॉस्चर पर जरूर ध्यान दें जैसे कि वह सिर या कंधा झुका कर न बैठे। बिल्कुल सीधा बैठे। पैरों को भी समेट कर बैठे यानी दोनों जांघों के बीच ज्यादा गैप न हो।

टॉयलेट ट्रेनिंग: जब बच्चा चलना शुरू कर देता है उसी के साथ उसकीटॉयलेट ट्रेनिंग शुरू कर देनी चाहिए। उसे समझाएं कि जब उसे टॉयलेट जाना हो तो वे पैंट में पेशाब न करें और किसी बड़े को बताएं। फिर कोई बड़ा उसे बाथरूम ले जाए। शुरूआत में आप बच्चे की पैंट खुद ही उतारें। ढाई वर्ष की उम्र के बाद आप उसे खुद पैंट उतारना सिखाएं। इसके बाद बच्चे को टॉयलेट इस्तेमाल करने के बाद फ्लश और हैंडवॉश की भी ट्रेनिंग दे। बढ़ती उम्र के साथ बच्चे को हाईजीन बरकरार रखने की भी ट्रेनिंग जरूर दें।

पॉटी ट्रेनिंग: करीब 3 साल की उम्र से बच्चे की पॉटी ट्रेनिंग शुरू कर दी जानी चाहिए। पहले तो आप उसे ये सिखाएं कि जब उसे पॉटी जाना हो तो वे बताए। आजकल बाजार में बच्चों के लिए खिलौने स्टाइल में बने कई पॉटी सीटर उपलब्ध हैं। तो इस तरह के पॉटी सीटर में बच्चे खेलने के बहाने थोड़ी देर बैठ जाते हैं। जब बच्चे को पॉटी लगे तो पॉटी सिटर पर ही बैठाएं और जब तक वह पॉटी कर न ले उसे खेल या कहानी में व्यस्त रखना चाहिए। जब बच्चा 4-5 वर्ष का हो जाए तो उसे खुद वॉश और हैंड वॉश करना सिखाएं।

cअक्सर बच्चे स्कूल जाने के समय सुबह जल्दी उठना पसंद नहीं करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि जब बच्चा छोटा होता है तो अभिभावक उसे अपने हिसाब से सोने व उठने देते हैं क्योंकि वह बच्चा है। फिर आगे चलकर जब बच्चों को स्कूल जाने के लिए जल्दी उठना पड़ता है तो वे रोते-परेशान करते हैं। अगर शुरूआत से ही उनके अंदर टाइम मैनेजमेंट की आदत डाल दी जाए, तो भïविष्य में दिक्कत नहीं आती। डॉ. नीतू के मुताबिक एक बच्चे के लिए 16 से 17 घंटे की नींद आवश्यक है। लेकिन जब बच्चा 4 वर्ष का हो जाए तो उसके लिए 14 से 15 घंटे की नींद भी काफी होती है। आप बच्चे को दोपहर में 2 बजे से 5 बजे तक सोने की आदत डालें और रात को 8:30 बजे से सुबह 6:00 तक का स्लीपिंग टाइम तय करें। इससे जब बच्चा स्कूल जाने लगेगा तो उसे दिक्कत नहीं होगी। कोशिश करें कि बच्चे में पेट के बल लेटने की आदत न पड़े।

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देखभाल के साथ ट्रेनिंग भी जरूरी 5
                                                  

ब्रश और बाथ ट्रेनिंग: जब बच्चा 3 साल का हो जाए तो उसके डेली रुटीन में टूथब्रश भी शामिल करें। शुरूआत में बच्चे को हाथ पकड़ कर ब्रश करवाएं। फिर कुछ महीने के अंतराल के बाद उसे ब्रश में पेस्ट लगाकर दें और खुद ब्रश करने दें। सामने खुद भी खड़े रहकर देखें कि वे ठीक से ब्रश कर रहा है कि नहीं। इसी तरह 5 वर्ष की उम्र से उसे खुद नहाना सिखाएं।

गुड मैनर्स ट्रेनिंग: गुड मैनर्स में बच्चों को शुरूआत में कुछ चीजें जरूर सिखानी चाहिए, जैसे कि सुबह उठने के बाद बच्चा गुड मॉॄनग विश करे, सोने से पहले गुड नाइट करे, कोई सामान बड़ों से पूछकर ले, सामान मिलने के बाद थैंक्यू बोले, खाने से पहले हाथ धोए, खाना खाते समय बोले ना और खाना चम्मच से खाए आदि। ये ट्रेनिंग उन्हें 2 से 5 वर्ष के बीच जरूर देनी चाहिए।