दांतों का स्वास्थ्य

‘‘मेरे मुँह की हालत काफी खराब है। ब्रश करते समय मसूड़ों से खून निकलता है शायद उनमें छेद है। क्या अभी दंत चिकित्सा कराना ठीक रहेगा?

मुस्कुराएँ! आप गर्भवती हैं लेकिन अपने बढ़ते पेट पर ध्यान देने की वजह से आप अपने मुँह व दाँतों पर इतना ध्यान नहीं दे पा रही होंगी। गर्भावस्था हार्मोन आपके मसूड़ों के लायक नहीं होते। वे आपके दूसरे म्यूकस मेम्ब्रेन की तरह सूज जाते हैं, उनमें जलन होती है व खून निकलता है। इन्हीं की वजह से मसूड़े प्लॉक बैक्टीरिया के लिए काफी संवेदनशील हो जाते हैं। कई महिलाओं की स्थिति तो काफी बिगड़ जाती है। उन्हें‘जिंजीवाइटिस’ हो जाता है। हमारे सुझाव आजमाएँ, स्वस्थ दाँत व मसूड़े पाएं।प्रतिदिन दाँतों की सफाई व ब्रश करें। क्लोराइड युक्त टूथपेस्ट इस्तेमाल करें।जीभ की भी सफाई करें। इससे सांस ताजा रहेगी और बैक्टीरिया नहीं पनपेंगे।
  • डॉक्टर की सलाह से कुल्ले करने की कोई दवा लें ताकि दाँत व मसूड़े स्वस्थ रहें।
  • यदि खाने के बाद ब्रश न कर सकें तो शुगर रहित गम चबाएँ। इससे मुँह में लार बढ़ेगी जो दाँत साफ करेगी। यदि गम जाइलोटोल युक्त होगी तो दाँतों की सड़न भी रुकेगी। या सख्त चीज़ का टुकड़ा चबाएं इससे मुँह की अम्लता घटेगी।
  • भोजन के बीच जो भी खाएँ, उस पर नजर रखें। मीठा तभी खाएँ, जब आप उसके बाद ब्रश कर सकें। विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थ लें ताकि मसूड़े स्वस्थ रहें व उनसे खून न निकले। कैल्शियम की रोज़ की खुराक भी लें।
  • चाहे कोई तकलीफ हो न हो, गर्भावस्था के नौ महीने के दौरान, एक बार दाँतों की जांच अवश्य कराएं। दांतों की सफाई न हो तो मसूड़ों की हालत और भी बिगड़ सकती है। यदि पहले भी मसूड़ों में तकलीफ रह चुकी हो तो अपने डॉक्टरको दिखाएँ। डॉक्टर या दंत चिकित्सक से मिलने में
  • बिल्कुल देर न करें। जिंजीवाइटिस का इलाज न हो तो मसूड़ों की गंभीर समस्याएँ पैदा हो सकती हैं, जो गर्भावस्था की जटिलता से जुड़ी हैं। दाँतों की सड़न से संक्रमण हो सकता है जो आप दोनों के लिए खतरनाक है।
  • यदि गर्भावस्था में दंत चिकित्सा जरूरी हो जाए तो? वैसे तो लोकल एनस्थेटिक व पहली तिमाही के बाद नाइट्रस ऑक्साइड की हल्की खुराक सुरक्षित है लेकिन ज्यादा गंभीर चिकित्सा को टालना चाहिए। कई बार दंत चिकित्सा से पहले व बाद में भारी एंटीबायोटिक्स लेने पड़ते हैं इसलिए पहले अपने डॉक्टर से पूछ लें।

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गर्भावस्था के दौरान रखें दांतों का ख्याल 3

एक्स-रे

वैसे तो सुरक्षा के लिहाज से किसी भी डेंटल एक्से-रे को डिलीवरी तक टाला जाता है। हालांकि इनके खतरे को काफी हद तक घटाया जा सकता है। एक्स-रे मुँह में होगा इसलिए वह गर्भाशय से काफी दूरी पर है। इसका रेडिएशन इतना ही होता है जितना आमतौर पर कुछ दिन के सन-बाथ से मिलता है। फिर भी यदि एक्स-रे करवाना ही पड़े तो निम्नलिखित सावधानियाँ बरतें।

  • एक्सरे करने वाले को पहले ही गर्भावस्था की सूचना दे दें।
  • किसी अच्छे अनुभवी तकनीकी विशेषज्ञ से ही एक्स-रे करवाएँ।
  • केवल जरूरी हिस्सा ही रेडिएशन के संपर्क में आए। गर्भाशय के बचाव के लिए लीड एप्रन व गरदन के बचाव के लिए थाइरॉइड कॉलर पहनें।
  • तस्वीर लेते समय हिलें नहीं ताकि दोबारा एक्स-रे लेने की नौबत न आए।
  • यदि आप अनजाने में पहले भी एक्स-रे करवा चुकी हैं तो उसकी चिंता न पालें।
सावधान

यदि दांतों में ब्रश करते समय मसूड़ों से खून आए तो डॉक्टर को दिखाएँ। हो सकता है कि यह ‘प्रेगनेंसी ट्यूमर’ की वजह से हो। हालांकि इससे कोई नुकसान नहीं होता। वैसे तो यह डिलीवरी के बाद स्वयं ही ठीक हो जाता है लेकिन यह ज्यादा तकलीफ देने लगे तो डॉक्टर या डेंटिस्ट इसका इलाज कर देंगे।

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