शुभ्रा की शादी तय हो गई थी। जबसे उसकी भाभियों ने उसे हनीमून के नाम से छेड़ना शुरू किया था, उसकी आंखों में हनूमन को लेकर सपनीले रंग तैरने लगे थे। वह हमेशा यही सोचा करती कि वह हनूमन में यह पहनेगी, यूं इतराएगी और यूं मीठी नोक-झोंक से पतिदेव को अपने पीछे घुमाया करेगी। शादी के दिन नजदीक आ भी गए और वह दुल्हन बनकर डोली पर सवार अपने प्रिय के घर चली भी गई। शुभ्रा की इच्छा नॉर्थ-इस्ट देखने की थी, सो उसकी मर्जी पर पतिदेव ने गंगटोक को हनीमून के लिए चुना। दिल में उमंगें हिलोरें मार रही थीं, दोनों गंगटोक पहुंच ही गए। लेकिन खुशियों की बजाय शुभ्रा को दुखों का सामना करना पड़ा। उद्वेग में आकर वह बीमार पड़ गई। जब उसके पति उसे डॉक्टर के पास ले गए तो पता चला कि वह हनीमून सिसटिटिस से पीड़ित है। तब डॉक्टर ने उन दोनों को रिलैक्स करने को कहा और समझाया कि हनीमून पीरियड में अक्सर ऐसा होता है। कई दफा लंबे समय से सेक्स कर रहे दंपतियों में भी यह समस्या पाई जाती है।

हनीमून सिसटिटिस एक ऐसी समस्या है, जिसे आम भाषा में यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन कहा जाता है। ऐसा होने पर महिला को अपनी योनी में दर्द या जलन स महसूस होता है। अमूमन यह नई विवाहित महिलाओं को होता है लेकिन कई बार लंबे समय से सेक्स कर रही महिला भी हनीमून सिसटिटिस से प्रभावित हो जाती है। आंकड़े बताते हैं कि शादी के बाद नवविवाहित महिलाओं में लगभग 75 प्रतिशत को इस समस्या से गुजरना पड़ता है।

हनीमून सिसटिटिस के लक्षण

 

पहली बार सेक्स करते समय महिला के प्राइवेट पार्ट्स तैयार नहीं होते हैं। उस समय पुरुष द्वारा जल्दबाजी और बलपूर्वक सेक्स करने की वजह से महिला को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। जल्दी- जल्दी और लंबे समय तक संभोग करने से महिला की योनि में जख्म हो जाते हैं। यह एक तरह का यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन होता है, जिसे “हनीमून सिसटिटिस’ कहते हैं। दरअसल पहली बार में महिला का गुप्तांग लचीला नहीं होता, यह धीरे-धीरे लचीला होना शुरू होता है। शुरू में यह बेहद कसा हुआ यानी टाइट होता है, ऐसे में जब पुरुष द्वारा सेक्स के लिए बलपूर्वक प्रयास किया जाता है, तो यह उसके प्राइवेट पार्ट्स को जख्मी कर देता है। इससे पीड़ित होने वाली अधिकतर महिलाएं ही होती हैं। हालांकि कुछ पुरुष भी इसका शिकार हो सकते हैं। इससे पीड़ित होने वाली महिला को पेशाब के दौरान जलन- दर्द, बार- बार पेशाब करने की इच्छा, खून भरा पेशाब, प्यूबिक बोन के ऊपर दर्द, लोअर पेल्विक पर दबाव  महसूस होता है। इन सबमें यदि एक समस्या भी नवविवाहिता को हो गई तो हनीमून पीरियड को दर्द भरा पीरियड बदलने में देर नहीं लगती।

हनीमून सिसटिटिस के कारण

 

ई. कोली बैक्टीरिया के यूरेथ्रा में आ जाने से हनीमून सिसटिटिस होता है, जो वास्तव में यूरेथ्रा के बोवेल में रहता है। इसी बैक्टीरिया की वजह से इंफेक्शन हो जाता है। इसके अलावा देर तक होने वाले या जबरन संभोग की वजह से भी हनीमून साइसटिटिस हो जाता है। गंदी उंगली, पेनिस या अन्य किसी चीज के अप्राकृतिक ढंग से महिला के प्राइवेट पार्ट्स में घुसाने की वजह से भी इसके होने की आशंका रहती है। साथ ही यदि नवविवाहिता आगे से पीछे (वजाइना से एनस) की बजाय पीछे से आगे की ओर सफाई करती है तो उस स्थिति में भी हनीमून सिसटिटिस होने की आशंका बनी रहती है। यूरेथ्रा में बैक्टीरिया के आने के एक- दो दिन के बाद इसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

हनीमून सिसटिटिस की जांच और इलाज

 

सामान्य पेशाब जांच से फिजिशियन इंफेक्शन का पता लगा सकता है। एक बार फिजिशियन हनीमून सिसटिटिस का पता लगाने के बाद एंटीबायोटिक देकर इंफेक्शन को खत्म करता है। साथ ही वह एनलजेसिक भी देता है ताकि लोअर यूरिनरी ट्रैक्ट का इंफेक्शन और जलन खत्म हो। जब तक इंफेक्शन खत्म न हो, डॉक्टर सेक्स न करने की भी सलाह देता है। उस जगह पर गरम पानी के सेंक भी आराम देती है। इंफेक्शन जल्दी खत्म हो, इसके लिए खूब पानी पीने की सलाह भी दी जाती है।

हनीमून सिसटिटिस से बचाव

 

  • हनीमून सिसटिटिव से बचाव के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है –
  • रोजाना कम से कम आठ गिलास पानी जरूर पिएं।
  • क्रैनबेरी जूस पिएं।
  • कॉफी बिल्कुल न पिएं।
  • पेनिस- वजाइना सेक्स के समय वजाइनल क्षेत्र के पास पानी वाला ल्यूब्रिाकेंट लगाना न भूलें।
  • एनल इंटरकोर्स (पीछे से सेक्स) के बाद वजाइनल इंटरकोर्स (आगे से सेक्स) न करें।
  • सेक्स से पहले और तुरंत बाद पेशाब जाएं ताकि यूरेथ्रा से बैक्टीरिया फ्लश हो जाए।
  • सेक्स से पहले और बाद में प्राइवेट पार्ट्स की ठीक से सफाई करें।
  • यदि हनीमून के बाद इंफेक्शन फिर लौट आया हो तो यूरोलॉजिस्ट या गायनाकोलॉजिस्ट के पास जाएं।
  • लंबे समय तक पेशाब को न रोकें। इससे कई गुणा बैक्टीरिया के होने की आशंका हो जाती है।
  • गुनगुने पानी से प्राइवेट पार्ट्स की नियमित तौर पर सफाई करें।
  • आगे से पीछे की ओर सफाई करें न कि पीछे से आगे की ओर।
  • ढीले और सूती कपड़े पहनें।

(सर गंगाराम अस्पताल के डर्मेटोलॉजी डिपार्टमेंट के डॉ कमलेंदर सिंह से बातचीत पर आधारित)

 

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