googlenews
लौकी का जूस
ह्रदय रोग में लौकी के लाभों को लेकर तरह-तरह के विचार है पर इसमें कोई शक नहीं है की लौकी में काफी मात्रा में ऐसे तत्त्व मौजूद होते हैं जो न सिर्फ हृदय के लिए बल्कि पूरे स्वास्थ्य पर लाभकारी प्रभाव डालते हैं। राष्ट्रीय शाकाहार शोध संस्थान और पतंजली आयुर्वेद द्वारा किए गये रिसर्च में लौकी के औषधीय गुणों को हृदय रोगों में इस्तेमाल के लिए उपयुक्त पाया है। लौकी पाचक होती है।
 
लौकी की प्रकृति- ठण्डी और तर होती है लौकी मस्तिष्क की गर्मी को दूर करती है। यह छिलके सहित खानी चाहिए। लौकी ठण्डी, रूखी होती है। लौकी का रस दूध के समान पौष्टिक है। तथा औषधीय गुणों से भरपूर है। लौकी की गुणवत्ता कैसे पहचाने- जो लौकी हरी, नरम, चिकनी, छूने पर मुलायम लगती हो, जिसके बीज कच्चे मुलायम, अंगुलियों से दबाने पर दब जायें, कठोर नहीं हों, वह अच्छी होती है। लौकी में चिकनाई बहुत कम होती है। इसमें पाया जाने वाला कार्बोहाइड्रेट सरलता से पच जाता है। इसीलिये प्राय: सभी रोगों में लौकी की सब्जी, सूप तथा रस देना लाभदायक है। लौकी के सेवन से रक्त अम्लता (ब्लड में उपलब्ध एसिड) सामान्य हो जाती है। लौकी रक्त के लाल कण बनने में सहायता करती है।
 
लौकी शक्तिवर्धक, सभी धातुओं को बढ़ाने वाली व खाने में रुचि पैदा करती है। यदि लौकी या इसका जूस कड़वा हो तो इसका सेवन नहीं करें। लौकी की सब्जी उबालकर खायें, तेल और मसालों में भूनें नहीं।
 
हृदय रोग में लौकी के फायदे –

  • हृदय रोग में लौकी का किसी भी रूप में सेवन करें, हृदय के लिए लाभकारी है। इसका सरल उपयोग है, लौकी की सब्जी में हरा धनिया, जीरा, हल्दी, नमक, मिर्च बहुत कम मात्रा में डालकर खायें। इसमें तेल या घी का (तड़का) छौंक नहीं लगायें। इससे हृदय की कार्यशक्ति बढ़ेगी।
  • मोटापा, हृदय रोग, पेट के रोग से ग्रसित है तो रोज सुबह खाली पेट एक गिलास लौकी के रस में 10-10 पत्ते तुलसी और पुदीना के पीसकर मिलाकर पीने से लाभ होता है। अम्लपित में शीघ्र लाभ होता है।
  • हृदय रोग से पीडि़तों को लौकी की सब्जी के साथ-साथ इसका रस भी 20 मि.ली. प्रतिदिन सुबह-शाम पीना चाहिए।
  • लौकी का रस रोज पीने से हृदय की धमनियों में आयी रुकावट कम हो जाती है। घबराहट दूर होकर हृदय-शूल दूर हो जाता है। हृदय के अवरोध (Blockage) खुल जाते हैं। हृदय को शक्ति मिलती है और कार्य की गति बढ़ जाती है।
  • हृदय रोग में लौकी का रस पीते रहने से निरन्तर लाभ होता जाता है। कोलेस्ट्रॉल अपनी सामान्य अवस्था में आ जाता है।
  • जो व्यक्ति एंजाइना से पीड़ित हैं, वे बाईपास सर्जरी कराने से पहले लौकी के रस का प्रयोग करके देख सकते हैं।

 

लौकी का जूस

  

लौकी का जूस बनाने की विधि-
 
सबसे पहले छिलके सहित लौकी के टुकड़े करके उस पर 11 पत्ते तुलसी के, 5 पत्ते पुदीने के और 5 कालीमिर्च डालकर पीस कर रस निकाल कर एक कप रस में एक कप पानी मिला कर खाना खाने के बाद प्रतिदिन पियें। निर्बल, रक्त की कमी, रुग्ण और हृदय रोग में लौकी का रस लाभकारी है।
 
सेवनकाल-
 
(लौकी का रस बनाने की विधि) में बतायेनुसार तैयार किया हुआ लौकी का रस लगभग छह महीने तक पियें। लम्बे समय तक पीते रहने से कोई हानि होने की सम्भावना नहीं है, फिर भी किसी प्रकार की हानि प्रतीत हो तो रस पीना बन्द कर दें। इस प्रयोग को करते समय टहलना आवश्यक है चाहे पहले दिन दस कदम ही चलें। इस प्रयोग के दस दिन बाद ही आराम अनुभव होगा। टहलने की दूरी धीरे-धीरे बढ़ाते हुए यथाशक्ति जितना लम्बा घूमना चाहें, घूम सकते हैं।