उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) सबसे सामान्य हृदय-धमनी रोग है। प्रोद्योगिकी के कारण बढ़ते भौतिक साधनों और अधिक धन कमाने के चक्कर ने अधिकतर लोगों को आज तनावग्रस्त बनाया हुआ है। इसके साथ ही शहरीकरण और आधुनिकता के कारण बदलते सामाजिक मूल्यों, परिवर्तित जीवनशैली, ज्यादा वसायुक्त भोजन व अधिक नमक का उपयोग एवं धूम्रपान और मद्यपान के बढ़ते फैशन ने पिछले कुछ वर्षों से उच्च रक्तचाप यानी हाई ब्लड प्रेशर  (हायपरटेंशन) को जन्म दिया है।  

आयुर्वेद में वर्णित एवं प्रकृति में उपस्थित अनेक दिव्य औषधियां हैं जिनके नियमित प्रयोग से ब्लड प्रेशर एवं हाई कोलेस्ट्रॉल जैसे रोगों से आप छुटकारा पा सकते हैं। ये जड़ी-बूटियां निम्नवत् हैं- 

सर्पगंधा-सर्पगंधा जड़ी का प्रयोग प्रत्येक अवस्था में अमूल्य सिद्ध हुआ है। जब रक्त वृद्धि के कारण निद्रानाश और शिर:शूल हो, सर्पगंधा अधिक असरकारक प्रभाव दिखाती है। इसके जड़ों में कई एल्काइड मिलते हैं जो मुख्य रूप से शामक, निद्रायक, अवसादक एवं रक्तचाप को कम करने में मदद करते हैं। सर्पगंधा मूल का बारीक चूर्ण 500 मिलीग्राम तक सुबह-शाम सेवन करने से अनिद्रा तथा रक्तचाप वृद्धि में लाभ होता है।

अनिद्रा की ज्यादा शिकायत हो तो सर्पगंधा 30 ग्राम, मरीच (कालीमिर्च) 5 ग्राम, पिप्पली मूल 5 ग्राम, जटामांसी 5 ग्राम, ये चूर्ण रोजाना लेने से निद्रा आ जाएगी। 

रुद्राक्ष-रुद्राक्ष एक विशेष किस्म का जंगली फल है। यह जहां एक ओर धार्मिक मान्यता रखते हैं, वहीं दूसरी ओर चिकित्सा में भी इनका कम महत्त्व नहीं है। रात के समय तांबे के बर्तन में 125 ग्राम पानी में रुद्राक्ष के 8-10 दानें डालकर रख दें। प्रात:काल उठकर खाली पेट यह पानी पी जाएं। इसका निरंतर तीन माह तक सेवन करने से रक्तचाप में आशातीत लाभ होता है। तीन माह तक उन्हीं दानों को प्रयोग कर सकते हैं।

अर्जुन-अर्जुन हृदय को महाशक्तिशाली बनाने में सक्षम और हृदय रोगियों के लिए वरदान है। अर्जुन है, तो हृदय रोग नहीं और हृदय रोग से डर नहीं। बाई पास सर्जरी की आवश्यकता भी नहीं, यदि समय रहते अर्जुन का प्रयोग किया जाए। अर्जुन की छाल हृदय रोग में विशेष लाभप्रद मानी गई है। यह हृदय की मांसपेशियों को बल प्रदान करने में सहायक है।

यह अर्जुनारिष्ट के नाम से आयुर्वेदिक औषधि विक्रेताओं के यहां उपलब्ध हो जाती है। इसे दिन में दो बार बराबर मात्रा में पानी मिलाकर सेवन करना लाभप्रद है। घर पर बनाना चाहें तो 250 ग्राम दूध में 250 ग्राम पानी मिलाकर 10 ग्राम अर्जुन की छाल डालकर उबालें। उबालने पर जब आधा बाकी रहे तो छान लें एवं स्वादानुसार मिश्री मिलाकर पीएं।

आंवला-आंवलों के मौसम में नित्य प्रात: व्यायाम या भ्रमण के बाद दो पके हुए आंवलों को चबाकर खाएं। यदि चबाकर आंवला खाना संभव न हो उनका रस दो चम्मच तथा शहद दो चम्मच मिलाकर पिएं। जब आंवलों का मौसम न हो, तब सूखे आंवलों को कूट-पीसकर कपड़े से छानकर बनाया गया आंवलों का चूर्ण 3 ग्राम(एक चम्मच) की मात्रा में सोते समय रात को शहद में मिलाकर या पानी के साथ लें। इस प्रकार 3-4 महीनों तब नियमित प्रयोग करने से हृदय के समस्त रोग दूर हो जाते हैं। विशेषकर हृदय की धड़कन, हृदय की कमजोरी और चेतना-शून्यता आदि रोगों में परम लाभकारी, चमत्कारी प्रयोग है। आंवला दिल की धड़कन, अनियमित हृदय गति, दिल का फैल जाना, दिल के ठीक कार्य न करने से उत्पन्न उच्च रक्तचाप में हानिरहित औषधि है। यह हृदय को शक्तिशाली बनाता है।

शहद-शहद हृदय के लिए अत्यंत गुणकारी है। यह रक्तदबाव को नियंत्रित करने में असरकारी है। यह शरीर की रक्तवाहिनियों की उत्तेजना को घटाकर फालतू रक्तदबाव को घटाता है। एक गिलास पानी में दो चम्मच शहद एवं नींबू डालकर पीने से लाभ होता है। शहद उच्च रक्तचाप को घटाता है एवं हृदय की गति को स्थिरता देता है। यदि मधुमेह हो तो चिकित्सक से परामर्श के बाद ही इसका सेवन करें।

ईसबगोल-शोधों से यह विदित हुआ है कि ईसबगोल हृदय रोगों में हितकारी होता है। एक माह तक रोजाना 15 ग्राम ईसबगोल सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल के स्तर में 15 प्रतिशत तक गिरावट आती है।

तुलसी-तुलसी हृदय रोग में लाभदायक सिद्ध हुई है। इसके पत्ते या रस लेना चाहिए। तुलसी की चार पत्तियां और नीम की दो पत्तियां दो-चार चम्मच पानी के साथ घोंटकर सुबह खाली पेट पिएं। एक सप्ताह तक लगातार यह प्रयोग करेंं।

नीम-प्रात: नियमित रूप से 25 ग्राम नीम की पत्ती का रस पानी के साथ लेना लाभप्रद है। कुछ माह निरंतर इसका सेवन करना चाहिए। उच्च रक्तचाप में आराम मिलेगा।

नींबू-नींबू के निरंतर सेवन से रक्तवाहिनियों में लचक एवं कोमलता आती है। रक्त वाहिनियों की कठोरता दूर करने में नींबू अत्यंत प्रभावी है। इसके सेवन से बुढ़ापे तक हृदय शक्तिशाली बना रहता है एवं हृदयाघात की संभावना कम हो जाती है। उच्च रक्तचाप में पानी में नींबू निचोड़कर कई बार पीने से लाभ होता है। प्रात:काल एक नींबू का रस गर्म पानी में पीना हितकारी है।

दालचीनी-दालचीनी का उपयोग कैंसर, रक्तस्राव, दांत दर्द, आंत्रिक ज्वर, अपचन, टी.बी. के घाव आदि में भरपूर होता है। इसके अलावा हाई कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए कई उपयोगी तत्त्व इसमें पाए जाते हैं।

मेंहदी-मेंहदी रक्तचाप  को नियमित करने की दृष्टि से हितकारी है। मेंहदी के सेवन से रक्त शुद्ध होता है एवं शरीर से विजातीय पदार्थ बाहर निकलते हैं। इस हेतु नियमित रूप से मेंहदी का पानी पीना लाभप्रद है। विशेषकर ग्रीष्म ऋतु में  यह शीतलता के गुण के कारण लाभप्रद है।

हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, खून के थक्के जमने से रोकने के लिए अन्य कई जड़ी-बूटियों के साथ प्रयोग में लाई जा सकती है। इसमें प्रमुख हैं-नीम, हल्दी, हरड़, बहेड़ा, आंवला, तुलसी, घृतकुमारी, कुमारीसार, आमलासार आदि जड़ी-बूटियों के नियमित प्रयोग से रक्तचाप, हृदय नली अवरोध का सर्वनाश होता है।

जड़ी-बूटियों के अतिरिक्त कुछ फल और सब्जियों का सेवन कर आप अपना रक्तचाप नियंत्रित कर सकते हैं-

लहसुन-आयुर्वेद में लहसुन महौषधि तथा अरिष्ट (कल्याणकारी) के नाम से जाना जाता है। लहसुन में गंधक के यौगिक पाए जाते हैं। यह जमे हुए ‘कोलेस्ट्रॉल’ को बाहर निकाल देता है। लहसुन खाने से रक्तचाप कम होता है। लहसुन को पीसकर दूध के साथ पीने से रक्तचाप में बहुत लाभ होता है। रक्तचाप की लहसुन कारगर दवा है। इसके अलावा लहसुन, जीरा, धनिया, कालीमिर्च और सेंधा नमक की चटनी बनाकर खाने से भी रक्तचाप कम होता है। रात में सोते समय रोज पांव के तलवों में लहसुन के तेल की मालिश करना चाहिए।

लहसुन छीलकर 100 ग्राम बारीक काट लें। एक किलो दुग्ध में मिलाकर मंद अग्नि पर खोया बना लें। उसमें खोया के बराबर खाड़ या मिश्री मिलाकर लड्डू बना लें। रोगी को 1-2 लड्डू प्रात:काल गोदुग्ध के साथ सेवन कराएं। इससे रक्तवाहिनियों में कोमलता आकर रक्तचाप सामान्य हो जाता है।

आलू-आलू को सम्पूर्ण आहार माना जाता है। इसमें पोषक तत्त्व बहुतायत में होते हैं। यह जटिल कार्बोहाइड्रेट्स का भंडार है। साथ ही साथ इसमें प्रोटीन, विटामिन सी, विभिन्न खनिज लवण जैसे-लोहा, कैल्सियम, पोटैशियम, फॉस्फोरस, तांबा आदि प्रचुरता से पाए जाते हैं। आलू को उबालकर या गर्म रेत में भूनकर खाया जाए तो वह बिल्कुल भी मोटापा नहीं बढ़ाता ओर रक्तचाप संतुलित रहता है। आलू खाने से रक्तचाप नही बढ़ता, यह बच्चों और कमजोर लोगों के लिए पौष्टिक आहार का काम देता है।

खून में जब सोडियम बढ़ जाता है और उसकी निकासी कम हो जाती है, तो रक्तचाप बढ़ने लगता है। आलू की खासियत यह है कि इसमें पोटैशियम अधिक होता है, सोडियम नाममात्र को। पोटैशियम युक्त खुराक खाने से गुर्दों को अतिरिक्त सोडियम की निकासी में सहायता मिलती है, जिससे रक्तचाप कम हो जाता है। इसलिए जिन लोगों को उच्च रक्तचाप के कारण परेशानी हो, तो उबले हुए आलुओं का बिना नमक सेवन करने से लाभ हो सकता है मगर आलू को उबालने से पहले एक बात का ध्यान रखना जरूरी है कि आलू हरे न हों। हरे आलुओं में नाइट्रोजन के ऐसे तत्त्व होते हैं जिनके कारण पेट खराब हो सकता है। पके आलू में विटामिन सी और बी खूब होते हैं। एक आलू खाने से 10 मिलीग्राम विटामिन सी मिल जाती है जो आदमी में विटामिन सी की 20 प्रतिशत मात्रा पूरी करता है। जैसे-जैसे आलू पुराने पड़ते जाते हैं उनमें विटामिन सी कम होता जाता है, आलू उबालते समय भी विटामिन सी की मात्रा कम हो जाती है।

प्याज-इसमें गंधक के यौगिक पाए जाते हैं। भोजन में प्याज का प्रयोग जरूर करें। इनमें एक फाईब्रिनोलाइटिक तत्त्व होता है, जो रक्त को जमने नहीं देता और हृदय रोगों से बचाव करता है। प्याज का रस एवं शुद्ध शहद समभाग मिलाकर प्रतिदिन दो चम्मच की मात्रा में दिन में एक बार लेना उच्च रक्तचाप का प्रभावी उपचार है। इससे पाचन क्रिया ठीक रहती है, नींद आती है। प्याज का रस रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम करके हृदयाघात से भी बचाव करता है।

लौकी-इसे घीया भी कहते हैं। हृदय रोग में यह बहुत उपयोगी सिद्ध हुई है। हृदय रोग से राहत पाने के लिए ताजा घीया छिलके सहित धोकर उसका रस निकाल लें, फिर उसमें 7-8 पत्ते तुलसी के एवं 5-6 पत्ते पुदीने का रस मिलाएं। एक बार में करीब 125-150 मि.ली. रस लेकर इसमें बराबर  का पानी मिलाएं। इस प्रकार तैयार पेय में चार पिसी कालीमिर्च तथा एक ग्राम सेंधानमक डाल दें। उच्च रक्तचाप के रोगी नमक न मिलाएं।

टमाटर-टमाटर असल में फल है। टमाटर को भोजन का एक बहुत ही पौष्टिक अंग माना जाता है, जिसमें प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन ‘सी’ और कई खनिज लवण जैसे- कैल्सियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस, पोटैशियम और आयरन उपलब्ध होते हैं। शरीर को मुख्यत: वसा, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन से ही ऊर्जा मिलती है और यह तीनों ही तत्त्व टमाटर में उपलब्ध हैं।

टमाटर के नियमित सेवन से शरीर में बल वृद्धि होती है और रक्त शुद्ध होता है तथा शरीर के पाचन तंत्र को भी सुचारु बनाए रखता है। टमाटर में विद्यमान पोषक तत्त्वों के कारण यह शक्तिवर्धक है। इसके सेवन से फेफड़ों व यकृत को भी शक्ति मिलती है। हाई ब्लड पे्रशर के रोगियों को टमाटर देने से वे नमक के दुष्प्रभावों से बच जाते हैं। रक्तचाप भी नियंत्रित रहता है। 

यह ध्यान रखना चाहिए कि टमाटर बहुत अधिक मात्रा में सेवन करने से जठराग्नि मंद हो जाती है तथा बवासीर का खतरा बढ़ जाता है।

मेथी-उच्च रक्तचाप में मेथी लाभप्रद है। मेथीदाना चूर्ण का एक चम्मच प्रात:-सायं खालीपेट 10-15 दिनों तक लेने से उच्च रक्तचाप के साथ-साथ मधुमेह में भी फायदा होता है।

धनिया-धनिया, जीरा और मिश्री तीनों 50-50 ग्राम पीसकर मिला लें। एक-एक चम्मच सुबह-शाम पानी के साथ लें। उच्च रक्तचाप में आराम मिलेगा।

चैलाई-चैलाई हृदय रोगियों एवं रक्तचाप से पीड़ित रोगियों के लिए लाभप्रद है। चैलाई की सब्जी बनाकर खाना या चैलाई के हरे पत्तों का रस निकालकर पीना उच्च और निम्न दोनों तरह के रक्तचाप में लाभदायक होता है।

अरबी-उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में अरबी प्रभावी है। हृदय रोग में अरबी की सब्जी हितकारी है। अरबी की सब्जी में गरम मसाला डालकर सेवन करना चाहिए। खांसी, गठिया एवं गैस वालों के लिए इसका सेवन उचित नहीेंं है।

चना-गेहूं एवं चने को बराबर लेकर आटा पिसवाकर चोकर सहित आटे की रोटी बनाकर खाने से भी उच्च रक्तचाप में सुधार होता है। चने का सेवन रक्त में कोलेस्ट्रॉल को कम करता है।

केला-नाश्ते के लिए यह एक बेहतरीन खाद्य पदार्थ है। यह पोटैशियम और फाइबर (रेशा) से भरपूर है। केले में सोडियम कम होता है, कोलेस्ट्रॉल बिल्कुल नहीं होता। पका केला अधिक आसानी से पचने वाला खाद्य पदार्थ है केला रक्त की क्षारीयता जनित रोगों को दूर करता है, क्योंकि इसमें अम्लता विरोधी तत्त्व (पोटैशियम, सोडियम, मैग्नीशियम) होते हैं। अर्थात् केला प्राकृतिक एंटेसिड (पेट में एसीडिटी खत्म करने वाला पदार्थ) की भूमिका भी निभाता है।

पका हुआ केले का यदि शहद के साथ सेवन किया जाए तो हृदय के लिए एक टॉनिक का काम करता है। इसका घुलनशील रेशा कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। इसमें विद्यमान पोटैशियम उच्च रक्तचाप का नियंत्रण करने में प्रभावी है।

पपीता-पपीता फल होने के साथ-साथ औषधीय गुणों से भरपूर होता है। यह विशेषकर  हृदय एवं उदर संबंधी विकारों में अत्यंत लाभदायक है। पके पपीते में 68 से 100 मिलीग्राम विटामिन सी रहता है। पपीते में विटामिन सी  पर्याप्त मात्रा में होने से यह उच्च रक्तचाप, दंत रोग, अस्थि रोग, पक्षाघात, गठिया आदि रोगों से बचाता है। जैसे-जैसे पपीता पकता है विटामिन की मात्रा इसमें बढ़ती जाती है जबकि अन्य फलों में ऐसा नहीं होता है।

हृदय रोग के लिए पपीता उत्तम दवा है। रोज सुबह खाली पेट नाश्ते के रूप में 250 ग्राम पका पपीता एक माह तक लगातार खाएं। पपीता खाने के दो घंटे बाद तक कुछ न खाएं। कच्चे या पपीते का साग बनाकर खाने से हृदय रोग में लाभ होता है। पपीते के पत्तों की चाय पीना भी हितकारी है। पपीते के पत्तों के सेवन से हृदय की धड़कन नियमित होती है। इस प्रकार पपीते के पत्ते हृदय बल्यकारी हैं। शौच आदि से निवृत्त होने के बाद प्रात:काल थोड़ी सी चीनी लेकर पौधे पर लगे कच्चे पपीते से नोकदार सूजा लगाकर 10-15 बूंदें मिलाकर सेवन करने से हृदय रोग में लाभ होता है।              

खरबूज-खरबूज हृदय के लिए हितकारी है। खरबूज में विद्यमान कैल्सियम, पोटैशियम एवं सोडियम हृदय के लिए टॉनिक का कार्य करते हैं किंतु उन्हें अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए।

अमरूद-हृदय के लिए अमरूद भी फायदेमंद है। यह हृदय की मांसपेशियों को बल प्रदान करता है।

सेब-प्रतिदिन दो सेब नियमित खाने से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है।

तरबूज-तरबूज हृदय के लिए लाभप्रद है। तरबूज के बीजों में एक ऐसा तत्त्व होता है जो धमनियों को फैलाता है जिससे रक्तचाप नियंत्रण में रहता है। तरबूज के बीज की गिरी एवं सफेद खसखस अलग-अलग पीसकर बराबर मात्रा में मिलाकर रख लें। प्रतिदिन प्रात:-सायं एक चम्मच की मात्रा में खाली पेट खाएं, रक्तचाप कम करने में लाभप्रद है। तरबूज के बीज की गिरी खाते रहने से भी रक्तचाप कम हो जाता है। इसके नियमित सेवन से रक्त में कोलेस्ट्रॉल कम होता है। रक्तवाहिनियों की कठोरता कम होकर मुलायम एवं लचीली बनती है।

इस तैयार रस को भोजन करने के आधा घंटे बाद दिन में दो या तीन बार सुबह, दोपहर, शाम को लेना होता है, धीरे-धीेरे इसकी मात्रा बढ़ाई जा सकती है।

गाजर-यह विलक्षण पोषक तत्त्व बीटा कैरोटीन का एक समृद्ध साधन है। आज कार्डियोलॉजिस्ट हृदय रोग व पक्षाघात के बचाव के लिए नियमित रूप से गाजर खाने की सलाह देते हैं। उनका कहना है 6 से 14 मिलीग्राम बीटा कैरोटीन (एक गाजर में करीब 6 मिलीग्राम होता है) नियमित रूप से प्रतिदिन लेने से रक्त में कोलेस्ट्रॉल  कम हो जाता है। 

यह भी पढ़ें –ज्योतिष में रत्नों का महत्त्व

स्वास्थ्य संबंधी यह लेख आपको कैसा लगा? अपनी प्रतिक्रियाएं जरूर भेजें। प्रतिक्रियाओं के साथ ही स्वास्थ्य से जुड़े सुझाव व लेख भी हमें ई-मेल करें-editor@grehlakshmi.com