प्राकृतिक चिकित्सा के अंतर्गत रसाहार को भी सम्मिलित किया गया है। यह भी एक प्राकृतिक क्रिया-विधि है। इसमें मात्र फलों का जूस लेकर विभिन्न रोगों को दूर किया जाता है। जूस पीने से जहां शरीर हृष्टपुष्ट बनता है, वहीं रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ जाती है। प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि जूस द्वारा शरीर शुद्ध, स्वस्थ और नीरोगी होता है। इसका कारण यह है कि इसमें फलों का गूदा या भारीपन नहीं होता।

  • जूस आसानी से पच जाते हैं। इनमें पानी की मात्रा ज्यादा होती है, इसलिए गुर्दे ठीक रहते हैं। रसों का सेवन करने से शरीर हल्का-फुल्का रहता है। जूस का सेवन ज्वर, वायु विकार, अजीर्ण, अफरा, अम्लपित्त, पेट में गुल्म, कब्ज, हिस्टीरिया, दमा, खांसी, मोटापा, रक्तचाप, हृदय रोग आदि में बहुत लाभदायक है। यह स्वस्थ व्यक्ति के लिए टॉनिक है। यदि प्रतिदिन सुबह जूस लें तो कभी रोगी नहीं हो सकते।
  • कुछ लोग साग-सब्जियों तथा पत्तियों का जूस पसंद करते हैं और कुछ फलों का। गाजर, ककड़ी, खरबूजा, तरबूज आदि के रस भी प्रयोग किए जाते हैं, लेकिन प्राकृतिक चिकित्सा के अंतर्गत ज्यादातर फलों का रस ही इस्तेमाल किया जाता है।
  • यदि दमा, खांसी और संधिवात की बीमारी है तो गाजर या पपीते का रस लेना चाहिए।
  • ताजे फलों के रस अधिक लाभदायक होते हैं। फलों के रस से नाड़ियों को शक्ति मिल जाती है और शरीर के दूषित पदार्थ बाहर निकल जाते हैं।
  • मोटापा घटाने के लिए संतरा, मौसमी, अंगूर, चकोतरा आदि का रस लेना चाहिए।
  • शरीर को शुद्ध करने के लिए संतरा, नींबू और गाजर का रस बहुत लाभदायक है।
  • अपच, अजीर्ण, अफरा, वायु विकार, कब्ज, अम्लपित्त आदि उदर रोगों को दूर करने के लिए संतरा, मौसमी, अन्नानास, अनार तथा गाजर का रस लेना चाहिए।

जूस लेने की विधि

जूस वैसे तो हर उम्र के व्यक्ति के लिए और हर मौसम में लाभदायक होते हैं। फिर भी यदि कुछ बातों का ख्याल रखा जाए तो इनका फायदा कई गुना बढ़ बजाता है। जूस लेने के लिए निम्नलिखित बातों पर ध्यान दें-

  • जूस सुबह, दोपहर और शाम को लेना चाहिए। रसाहार के दौरान कोई अन्य वस्तु नहीं खानी चाहिए।
  • यदि शरीर कमजोर हो और शीघ्र लाभ पाना चाहते हों तो रस को 4-5 बार ले सकते हैं।
  • रसाहार शुरू करने के लिए सर्वप्रथम प्रात:काल उठकर एक गिलास पानी में नींबू निचोड़कर पिएं। इसके बाद दो चम्मच शहद का सेवन करें। तत्पश्चात नियमपूर्वक 3-4 घंटे बाद लगभग 300 ग्राम रस लें। धीरे-धीरे जूस की मात्रा बढ़ाकर 600 ग्राम तक कर देनी चाहिए।
  • यदि घबराहट ज्यादा हो तो चार-पांच चम्मच अंगूर का रस लेना चाहिए। एकाएक रसाहार बंद नहीं करना चाहिए।
  • रस का सेवन एक माह तक करने के बाद खिचड़ी से भोजन शुरू करना चाहिए। रसाहार छोड़ने के बाद तुरंत ठोस पदार्थ नहीं खाना चाहिए।

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