"Bhuj: The Pride Of India Review in Hindi

मूवी: भुज: द प्राइड ऑफ इंडिया

लेखक: रितेश शाह, अभिषेक दुधैया, रमन कुमार, पूजा भावोरिया

कास्ट: अजय देवगन, संजय दत्त, शरद केलकर, सोनाक्षी सिन्हा, नोरा फतेही, एमी विर्क

निर्देशक: अभिषेक दुधैया

कहा: डिज्नी प्लस हॉट स्टार

भारत के लिए अगस्त का महीना बेहद महत्वपूर्ण होता है क्योंकि 75 साल पहले 15 अगस्त को हमारा देश आजाद हुआ था। जिसकी खुशी हम हार साल मनाते है और आज भी हर एक भारतीय की आंखो में आज आजादी के गर्व की चमक दिखती है। गौरतलब है कि, अगस्त का महीना देश भक्ति से भरा हुआ रहता है। जिसके चलते OTT प्लेटफार्म पर भी कई धमाकेदार और देश भक्ति को समर्पित मूवीज रिलीज़ हुई। इन मूवीज में “भुज” और “शेरशाह” जैसी मूवीज के नाम शामिल है। दोनों ही मूवीज की पब्लिसिटी काफी स्ट्रांग थी लेकिन दोनों में से एक मूवी ने लोगों के दिल में जगह बनाई तो दूसरी ने उनके उम्मीदों पर पानी फेर दिया। 

वो कहावत तो आपने सुनी ही होगी “खोदा पहाड़ और निकली चूहिया” इस कहावत को सच कर दिखाया है “भुज: द प्राइड ऑफ इंडिया” ने। एक ओर जहां “शेरशाह” ने हर एक भारतीय के दिल में जगह बनाई वहीं दूसरी ओर “भुज” ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया। हालांकि फिल्म की कास्ट काफी दमदार थी, फिल्म में अजय देवगन और संजय दत्त के साथ में शरद केलकर, सोनाक्षी स‍िन्‍हा, नोरा फतेही और ऐमी व‍िर्क जैसे जाने-माने कलाकारों ने अहम भूमिका निभाई। साथ ही ‘गंगाजल’ और ‘सिंघम’ जैसी सुपरहिट फिल्म दे चुके अजय देवगन से जनता को बहुत उम्मीदें थी। चलिए जानते है “भुज” की खामियां:

समझ के परे है कहानी

अगर आप भुज और शेरशाह मैं कंफ्यूज हो रहे हैं कि कौन सी मूवी देखनी चाहिए तो हम आपको शेरशाह देखने को ही कहेंगे। क्योंकि भुज आपका समय तो खराब करेगी ही इसके साथ साथ आपका दिमाग भी भंड कर देगी। आपको बता दें कि भुज के शुरुआती 40 मिनट में समझ ही नहीं आता की कहानी पलट कहां रही है। सच्ची घटना पर आधारित इस फिल्म में सच्चाई दिखाई नहीं देती सब बनावट ही लगता है।

शुरू होने से पहले ही खत्म

जिस घटना पर यह फिल्म आधारित है उस घटना को ही इन्होंने 15 मिनट में निपटा दिया है जो कि इनकी सबसे बड़ी गलती साबित होती है। बताया गया है कि फिल्म में स्क्वाडर्न लीडर विजय कर्णिक बहादुरी और साहस की गाथा इस मूवी में बताई गई है। विजय कर्णिक में पाकिस्तानी वायु सेना द्वारा भुज एयरबेस बर्बाद करने के बाद गांव की 300 महिलाओं को लेकर रात भर में रनवे मरम्मत करके तैयार कर देते हैं। यह घटना एक ऐतिहासिक और रोचक घटना है लेकिन फिल्म में इस घटना को बहुत ही ढीले ढाले तरीके से बताया गया।

VFX और एनिमेशन में फेरा पानी

गौरतलब है कि आज के जमाने में VFX और एनिमेशन का चलन बहुत बढ़ गया है। एक और जहां VFX से हर चीज ऐसी लगती है कि जैसे वह रियल ही हो तो वहीं दूसरी ओर भुज में वीएफएक्स की क्वालिटी भी रद्दी दी गई है। फिल्म में साफ-साफ समझ आता है कि यह वीएफएक्स और एनिमेशन है। आप ऐसा भी कह सकते हैं कि फिल्म में कार्टून और वीडियो गेम्स की तरह है वीएफएक्स दिया गया है जो कि सिर्फ काम चलाऊ है।

‘भुज’ को ‘बॉर्डर’ बनाने की कोशिश

आपने सनी देओल और सुनील शेट्टी की फिल्म बॉर्डर तो देखी ही होगी अगर आप भुज देखेंगे तो आपको ऐसा लगेगा कि आप बॉर्डर देख रहे हैं। इसके साथ ही भुज में फिल्म गदर का डायलॉग भी दिया गया है। डायलॉग है ‘बाप बाप होता है बेटा बेटा होता है’ इससे बात साफ होती है कि, भुज की लाख कोशिश के बाद भी वो कामयाबी के मुकाम तक नहीं पहुंच पाई।

बनावट की आड़ में सच्चाई गुम

फिल्म भुज की सबसे बड़ी गलती और खामी यही है कि इसमें बनावट ज्यादा दिखाई गई है जिसकी वजह से सच्चाई तो गायब ही हो गई है। फिल्म में डायलॉग तो काफी दमदार है लेकिन सीन में देशभक्ति की झलक भी नही दिखती। आप के सकते है कि फिल्म में बस ऊंची ऊंची बाते ही फेंकी गई है। साथ ही VFX or एनिमेशन की घटिया क्वालिटी ने सारा मजा ही किरकिरा कर दिया।

यह भी पढ़े। 
बॉलीवुड से जुड़े हमारे लेख आपको कैसे लगे? अगर आपको किसी सेलिब्रिटी के बारे में जानना हैं या हमारे कोई लेख आपको पसंद आया हो तो आप अपनी प्रतिक्रियाएं जरूर भेेजें।  हमें ई-मेल कर सकते हैं- editor@grehlakshmi.com