अल्ट्रा वॉयलेट किरणें
सूर्य की हानिकारक अल्ट्रा वॉयलेट किरणें न केवल त्वचा को जलाती हैं बल्कि इससे स्किन कैंसर की आशंका भी बढ़ती है। इसलिए  त्वचा को इन हानिकारक किरणों से बचाने के लिए सनस्क्रीन लोशन का प्रयोग बहुत जरूरी है। ब्यूटी एक्सपर्ट का कहना है कि बाजार में मिलने वाले सनस्क्रीन में एसपीएफ की रेंज 7 से लेकर 50 तक हो सकती है, लेकिन इंडियन स्किन के लिए 15 से 30 तक का एसपीएफ पर्याप्त है। एसपीएफ 15 के इस्तेमाल से ही 93 से 97 प्रतिशत अल्ट्रावायलेट किरणों से सुरक्षा पाई जा सकती है।
 
स्किन के अनुरूप करें सनस्क्रीन इस्तेमाल 
सनस्‍क्रीन लोशन सभी के लिए एक जैसा नहीं होता है, अगर आपका सनस्‍क्रीन त्‍वचा के अनुरूप नहीं है तो सूर्य की हानिकारक किरणें आपकी त्‍वचा को नुकसान पहुंचायेंगी, इसलिए सनस्क्रीन चुनते वक्त अपने स्किन टाइप का भी ध्यान रखें जैसे ऑयली स्किन के लिए जेल या एक्वा बेस्ड सनस्क्रीन और ड्राई स्किन के लिए लोशन या क्रीम बेस्ड सनस्क्रीन ज्यादा कारगर होते हैं। सर्दियों में स्किन सामान्य से ज्यादा ड्राई होती है इसलिए लोशन बेस्ड सनस्क्रीन ज्यादा फायदेमंद होंगे।
 
किन बातों का रखें ख्याल
1. सनस्क्रीन खरीदते हुए चेक करें कि उसमें जिंक ऑक्साइड मौजूद हो। इस तरह के सनस्क्रीन से स्किन का रेड हो जाना, एग्ज़ेमा जैसी समस्या घटती है।
 
2. बहुत अधिक एसपीएफ वाले सनस्क्रीन के इस्तेमाल से स्किन ज्यादा ऑयली हो सकती है। अधिक एसपीएफ वाले सनस्क्रीन ऐसे लोगों को ज्यादा सूट करते है जिन्हें ज्यादातर समय धूप में रहना पड़ता है। पहाड़ों पर ट्रैकिंग या जहां बर्फ हो और बीच पर ज्यादा एसपीएफ वाले वाटर रसिस्टेंट सनस्क्रीन लगाएं।
 
3. धूप में जाने के 15-20 मिनट पहले चेहरे, गर्दन, हाथ व बॉडी के अन्य खुले हिस्सों पर सनस्क्रीन लगाएं। इससे सनस्क्रीन स्किन में अच्छी तरह प्रवेश कर जाता है और स्किन धूप के किरणों के दुष्प्रभाव से बची रहती है। हर २ घंटे पर दोबारा सनस्क्रीन एप्लाई करना न भूलें।
 
क्या आप जानती हैं?
  • सर्दियों के मौसम में ओजोन लेयर सबसे पतली होती है यानि यूवीए व यूवीबी किरणें ज्यादा मात्रा में धरती के वातावरण में पहुंचती हैं। पहाड़ों पर धूप का एक्सपोज़र सबसे ज्यादा होता है।
  • स्नो लगभग 80 प्रतिशत यूवी रेज़ को रिफ्लेक्ट कर देती हैं। ऐसी रेज़ न सिर्फ स्किन कैंसर का कारण बनती हैं बल्कि 90 प्रतिशत झुर्रियों की वजह भी होती हैं।
  • समुद्र स्तर से प्रति 1000 फीट की ऊंचाई बढऩे पर यूवी रेज़ का एक्सपोज़र लगभग 5 फीसदी बढ़ता जाता है।

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