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नींबू एक उपयोगी फल है। यह लगभग हर मौसम में उपलब्ध होता है। इसमें विटामिन सी की मात्रा अधिक होती है। नींबू में प्रबल कीटाणु-नाशक शक्ति होती है। नींबू के रस में विटामिन ए, बी, सी पाए जाते हैं। इसका नित्य सेवन स्वास्थ्य और सौन्दर्य के लिए लाभदायक है। 

नींबू की किस्में

नींबू की अनेक किस्में प्रचलित हैं, मसलन- गलगल, विजोरा, जमफरी, कागजी, गुदड़िया, नेपाली आदि। सेहत की दृष्टि से कागजी नींबू सर्वश्रेष्ठ होता है। कागजी नींबू का छिलका बेहद पतला तथा इसमें रस भी अन्य नींबूओं की अपेक्षा अधिक होता है। अचार, मुरब्बों एवं आयुर्वेदिक औषधियों में कागजी नींबू ही प्रयुक्त किया जाता है। नींबू खरीदते समय आप इस बात का विशेष ध्यान रखें कि उसका आकार बड़ा हो, वह साफ और गहरे पीले रंग का हो तथा छिलका पतला और मुलायम हो। पीले नींबू न मिलने पर हरे रंग के नींबू उपयोग में लिए जा सकते हैं। फ्रिज में नींबूओं को लगभग डेढ़ माह तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

गुण और लाभ-नींबू का सेवन किसी भी प्रकार की अवस्था वाले व्यक्ति कर सकते हैं। रोगी और निरोगी व्यक्ति दोनों ही इससे लाभ उठाते हैं। नींबू अम्ल वातनाशक, हल्का, पाचक, कृमिनाशक, उदर रोगों को दूर करने वाला, वात, पित कफ और शूल में तो लाभदायक है ही साथ ही अरुचि को दूर कर रुचि बढ़ाने वाला भी है। नींबू के सेवन से पेट तथा रक्त संबंधी विकार दूर होते हैं।

औषधीय गुण

शरीर में विटामिन-सी की कमी से स्कर्वी रोग हो जाता है। इससे मसूढ़ों से खून आने लगता है। यह रोग हो जाने पर नींबू का नियमित सेवन निश्चय ही फायदेमंद होगा, क्योंकि नींबू विटामिन-सी का भरपूर स्रोत है। नींबू का रस मसूढ़ों पर लगाने से भी खून बहना बंद हो जाता है।

गर्मी में– गर्मी के मौसम में नींबू का प्रयोग लाभदायक रहता है। मिश्री के साथ नींबू निचोड़कर पीने से लू शीघ्र दूर होती है। गर्मी में हैजा होने पर नींबू के रस में प्याज तथा पुदीने का रस मिलाकर सेवन करने से लाभ मिलता है।

मलेरिया – जब मलेरिया हो जाए, तब एक नींबू को लोहे के बर्तन में एक किलो पानी डालकर पकाएं। जब आधा शेष रह जाए, तब गुनगुना कर रोगी को पिलाएं। ऊपर से कंबल और रजाई ओढ़ा दें। मूत्र अथवा पसीने के द्वारा बुखार की गर्मी बाहर निकल जाएगी। सवेरे-शाम भोजन से ढाई घंटे पूर्व या बाद में नींबू में थोड़ी काली मिर्च डालकर चूसना चाहिए। मलेरिया की आशंका बहुत हद तक दूर हो जाएगी।

मोतियाबिन्द– शुरुआती अवस्था में रोग को बढ़ने से रोकने के लिए नींबू के रस को फलालेन से छान लेना चाहिए और आंख में 3-4 बूंद सुबह-शाम नित्य डालनी चाहिए।

उबकाई या उल्टी- एक गिलास गर्म जल में एक नींबू का रस तथा थोड़ा सा शहद मिलाकर लें। उल्टी बंद हो जाएगी।

जुकाम– दो नींबू के रस में बराबर की मात्रा शहद में काली मिर्च एक रत्ती और मधु दो रत्ती मिलाएं तथा रात को लेकर सो जाएं तो सवेरे गला साफ हो जाएगा।

प्यास न बुझना- चाहे किसी भी कारण से प्यास लगी हो, नींबू चूसने अथवा शिकंजी पीने से तुरन्त दूर हो जाती है। इसलिए तेज बुखार में जब प्यास बहुत लगती है तब इसे देना चाहिए।

जिगर की खराबी- शिकंजी बनाकर लें। थोड़ा पानी डालें और चीनी की जगह पर नमक डालें। उसे दिन में दो-तीन बार लें।

दस्त बन्द करना- भोजन न करें और थोड़े ठंडे जल में आधे नींबू का रस तथा थोड़ी काली मिर्च मिलाकर दिन में कई बार लें। दस्त बन्द हो जाएंगे।

पायरिया- जिनके दांतों से पीव (पस) और खून आता है, दुर्गन्ध आती है तथा दांत कमजोर हैं, उन्हें नींबू के रस को दांतों पर मलना चाहिए। दांत स्वच्छ और दृढ़ हो जाएंगे। यह अचूक कीटाणुनाशक है।

बवासीर- एक नींबू के छिलके को थोड़े ठंडे पानी में भिगो दें और रात के समय ओस में पड़ा रहने दें। प्रात:काल उसे पिएं। बवासीर का खून जाना बन्द हो जाएगा।

मुंह के छाले- नींबू का रस और सुहागे की खील मिलाकर लगाएं। साथ ही साथ कुल्ले भी करें।

दूध न पचना- जिन्हें दूध न पचता हो, देर से पचता हो, तो उन्हें दूध पीने के बाद, आधे नींबू का रस ले लेना चाहिए। इससे दूध के थक्के छोटे कणों में फट जाते हैं और शीघ्र ही पच जाते हैं। यह बात जरा अटपटी सी लगेगी कि दूध और नींबू का मेल है परंतु स्वयं प्रयोग करने से इस बात का विश्वास हो जाएगा।

मिर्गी- दौरे के समय एक तोले नींबू के रस को, एक तोले आक के पत्ते के रस में मिलाकर नाक द्वारा इस द्रव को चढ़ा दें। 

अन्य औषधीय गुण

यदि आपको कब्ज की शिकायत है तो प्रतिदिन सवेरे एक गिलास गुनगुने पानी में एक नींबू का रस मिलाकर पीएं। कुछ ही दिनों में कब्ज दूर हो जाएगा तथा पेट बिल्कुल साफ रहने लगेगा।

लू आदि लगने से यदि नाक में से बहता खून बंद न हो, तो नाक में कुछ बूंद नींबू का रस डालने से खून तत्काल बंद हो जाएगा।

सिर की खुजली से छुटकारा पाने के लिए एक नींबू काटकर सिर पर मलें।

छोटे बच्चों के बदन पर नींबू के रस में बेसन व सरसों का तेल मिलाकर उबटन लगाने से उनके शरीर पर अवांछित बाल कम उगते हैं।

यदि सलाद में नींबू के छिलकों को बारीक काटकर डाल दिया जाए, तो सलाद काफी समय तक ताजा बना रहेगा और उसमें से भीनी-भीनी खुशबू आती रहेगी।

पुरानी खाज-खुजली में नींबू के रस को हल्दी में मिलाकर नियमित रूप से लेप करने से लाभ मिलता है।

सोने से पहले गर्म पानी में नींबू का रस मिलाकर हाथ-पैर धोने से त्वचा का खुरदरापन दूर हो जाता है तथा त्वचा चिकनी व कांतिमय हो जाती है।

नींबू के रस में शहद व काला नमक मिलाकर पीने से लगातार रहने वाली हिचकी तत्काल रुक जाती है।

सप्ताह में एकाध बार नींबू के रस में सेंधा नमक व पानी मिलाकर पीना आंतों की सफाई के लिए बहुत ही उपयोगी होता है।

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कई मर्ज की एक दवा है नींबू 3

मच्छर के काटे स्थान पर नींबू के रस को लगा दें। खारिश दूर हो जाएगी।

नींबू के रस और नारियल के तेल को मिला लें और अच्छी प्रकार मथ लें। फोड़े को नीम के पानी से धो लें। फिर इस मरहम को कपड़े पर लगाकर फोड़े पर लगा दें तो यह पीप नहीं पड़ने देगी और न चिपकेगी।

गालों पर यदि रस और छिलका मलें तो गाल सुन्दर और झुर्रियों से रहित हो जाएंगे।

नींबू का रस तथा शहद मिलाकर चाटें या शिकंजी बना लें। इससे बदहजमी, भूख न लगना, पेट में गुड़गुड़ होना, पेट का भारी रहना आदि रोग कभी पास भी नहीं फटक सकते हैं।

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