सुनैना
पुराण के अनुसार पीपल के वृक्ष कि परिक्रमा करने से मानव की आयु लंबी होती है और जो व्यक्ति इस वृक्ष पर जल समर्पित करता है उसके सभी पापों का अंत होकर स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
भागवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि ‘वृक्षों में सर्वोत्तम मैं पीपल हूं। पीपल का महत्व इससे ही पता चलता है कि भगवान कृष्ण ने पीपल के वृक्ष के नीचे ही गीता का ज्ञान दुनिया को दिया था।
पीपल के पेड़ को बोधि वृक्ष के रूप में भी जाना जाता है और यह बौद्ध धर्म में भी महत्वपूर्ण है। यह माना जाता है कि गौतम बुद्ध ने पीपल के पेड़ के नीचे ध्यान करते हुए ज्ञान प्राप्त किया था।
पीपल के वृक्ष की हर दिन पूजा करनी चाहिए, क्योंकि इसमें देवी-देवताओं का वास होता है। पूजा करने के बाद परिक्रमा करने से सभी तरह के पाप भी नष्ट हो जाते हैं।
पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पीपल के पौधे लगाने चाहिए, ऐसा करने से चारों तरफ सकारात्मक वातावरण बना रहता है और पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है।
पीपल की पूजा करना काफी लाभदायक माना जाता है।पीपल पर हमेशा शनि की छाया रहती है, जिससे इसकी जड़ में जल चढ़ाने व दीपक जलाने से शनि से संबंधित कष्ट दूर हो जाते हैं।