श्वेता
फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का त्योहार हर साल मनाया जाता है। इस बार यह 8 मार्च को मनाया जाएगा।
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार बेलपत्र के बिना भगवान शिव की पूजा अधूरी मानी जाती है। इसे चढ़ने से भोलेनाथ सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
शास्त्रों के अनुसार बेलपत्र जितने अधिक पत्र वाला होता है उतना अच्छा होता है। इसलिए शिवलिंग पर कम से कम 3 पत्र वाला बेलपत्र चढ़ाना चाहिए।
शिवलिंग पर कभी भी कटा-फटा बेलपत्र नहीं चढा़ना चाहिए साथ ही बेलपत्र पर अधिक धारियां भी नहीं होनी चाहिए
शास्त्रों में कहा गया है कि यदि नया बेलपत्र न हो, तो किसी दूसरे के चढ़ाए हुए बेलपत्र को भी धोकर पूजा में प्रयोग किया जा सकता है।
बेलपत्र को तोड़ने के दिन की बात करें तो चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या तिथि के दिन बेलपत्र भूलकर भी नहीं तोड़ने चाहिए।
शिवलिंग पर हमेशा उल्टा बेलपत्र चढ़ाना चाहिए मतलब बेलपत्र चढ़ाते समय ध्यान रखें कि पत्ते का चिकना भाग शिवलिंग पर रहे।
बेलपत्र हमेशा अनामिका, अंगूठे और मध्यमा अंगुली की मदद से चढ़ाएं। बेलपत्र अर्पण करने के साथ-साथ जल की धारा जरूर चढ़ाएं।
श्वेता
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