निक्की मिश्रा
लहसुन में डाइसल्फ़ाइड गुण होता है, जो साइटोकिन्स के प्रभाव को कम करने के साथ-साथ अर्थराइटिस के दर्द को कम कर सकता है।
लहसुन
सालमन और मैकेरल जैसी फैटी फिश में फैटी एसिड में सूजन-रोधी गुण हो सकते है, जो दर्द और सूजन को कम कर सकता है।
फैटी फिश
जैतून के तेल के एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों में भरपूर होता है, जो अर्थराइटिस में होने वाली सूजन और दर्द को कम कर सकता है।
जैतून तेल
कई प्रकार के नट और बीज ओमेगा -3 फैटी एसिड से भरपूर होता है, जिससे अर्थराइटिस की परेशानी को कम करने में मदद मिलती है।
नट्स और बीज
ग्रीन टी में पॉलीफेनोल्स, मिनरल्स और विटामिन समेत एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में होते हैं। यह आंतरिक सूजन को कम करने में सहायता कर सकता है।
ग्रीन टी
घी, तेल जैसी चीजों की मदद से जोड़ों में चिकनाई पैदा होती है। इससे जकड़न और दर्द को कम किया जा सकता है।
घी
सर्दियों के मौसम में विटामिन डी का सेवन जरूरी माना जाता है। शरीर में इसकी पूर्ति से जोड़ों में दर्द और सूजन कम हो सकता है।
विटामिन डी
अदरक में एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी सेप्टिक गुण पाए जाते हैं, जो जोड़ों के दर्द को कम करने में काफी हद तक मददगार साबित हो सकता है।
अदरक का करें सेवन
गुनगुने पानी से सिंकाई करने से जोड़ों के दर्द से मिल सकती है। यह सूजन और अकड़न की शिकायत को भी कम कर सकता है।
गुनगुने पानी का इस्तेमाल
निक्की मिश्रा
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