स्वेता
मां बगलामुखी 10 महाविद्याओं में से एक आठवीं महाविद्या हैं, जिनका पूजन करने से सभी बुराईयों का नाश होता है।
जिला कांगड़ा के बनखंडी में स्थित मां बगलामुखी के इस पवित्र धाम में जो भी सच्चे दिल से अपना शीश नवाता है, उसे मन चाहा फल मिल जाता है।
कहा जाता है कि मां हल्दी रंग के जल में प्रकट हुई थी। इसलिए हल्दी के पीले रंग की वजह से उन्हें पितांबरा देवी भी कहा जाता है।
मां को पीला रंग अति प्रिय है, इसलिए यहां पूजन के लिए पीली सामग्री का इस्तेमाल होता है और पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
बगलामुखी देवी का मंदिर पीले रंग का है। देवी को पीले रंग के वस्त्र पहनाये जाते हैं और पीले रंग की मिठाई का ही भोग लगाया जाता है।
कोर्ट-कचहरी के मामलों से छुटकारा पाने और व्यापार में सफलता की कामना से भी भक्त मां बगलामुखी के मंदिर आते हैं।
श्रद्धालु यहां मंदिर में शत्रु नाश हवन कराते हैं। इस हवन से शत्रुओं का नाश होता है और भक्तों का जीवन बाधा मुक्त बन जाता है।
पहले रावण और उसके बाद लंका पर जीत के लिए श्रीराम ने शत्रुनाशिनी मां बगलामुखी की पूजा की और वियज पाई।
पौराणिक कथाओं के अनुसार पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान मां बगलामुखी का मंदिर बनाया और पूजा अर्चना की।
भारत में मां बगलामुखी के तीन ही प्रमुख ऐतिहासिक मंदिर हैं। कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश, दतिया और नलखेड़ा मध्यप्रदेश में।
स्वेता