श्वेता
शैलपुत्री देवी दुर्गा का पहला रूप है जिसकी पूजा नवरात्रि के पहले दिन की जाती है। उनकी सवारी “नंदी” बैल है। उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल है।
शैलपुत्री
नवरात्रि के दूसरे दिन देवी दुर्गा के ब्रह्मचारिणी रूप की पूजा की जाती है। उन्हें एक महिला देवी के रूप में दर्शाया गया है जो अपने दाहिने हाथ में सूखे रुद्राक्ष की माला और बाएं हाथ में कमंडल धारण किये हुए हैं।
ब्रह्मचारिणी
नवरात्रि के तीसरे दिन दुर्गा के चंद्रघंटा रूप की पूजा की जाती है। देवी की तीसरी आंख है और माना जाता है कि वे हमेशा राक्षसों से युद्ध के लिए तैयार रहती हैं। उनके दस हाथ हैं और उनके माथे पर अर्धचंद्र है।
चंद्रघंटा
नवरात्रि के चौथे दिन देवी दुर्गा के कुष्मांडा रूप की पूजा की जाती है। उन्हें अष्टभुजा के नाम से भी जाना जाता है और माना जाता है कि उन्होंने ब्रह्मांड की रचना की है।वह सिंह पर सवारी करती नजर आती हैं।
कुष्मांडा
नवरात्रि के पांचवें दिन देवी दुर्गा के स्कंदमाता रूप की पूजा की जाती है। देवी की चार भुजाएं हैं, तीन आँखें हैं और वह सिंह पर सवार हैं। इस रूप में वो कार्तिकेय को गोद में लिए हुए हैं।
स्कंदमाता
नवरात्रि के छठे दिन देवी दुर्गा के कात्यायनी रूप की पूजा की जाती है। ऋषि कात्यायन ने देवी दुर्गा की तपस्या की और अपनी पुत्री के रूप में जन्म लेने का अनुरोध किया, जिस कारण उनका नाम कात्यायनी पडा़।
कात्यायनी
नवरात्रि के सातवें दिन देवी दुर्गा के कालरात्रि रूप की पूजा की जाती है। यह देवी दुर्गा के सबसे हिंसक रूपों में से एक हैं। वह अंधकार और अज्ञान का नाश करने वाली हैं और उनकी चार भुजाएँ हैं।
कालरात्रि
नवरात्रि के आठवें दिन देवी दुर्गा के महागौरी रूप की पूजा की जाती है। उन्हें चार भुजाओं वाली देवी के रूप में दर्शाया गया है, जिनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में डमरू है। वह बैल पर सवार हैं।
महागौरी
नवरात्रि के नौवें दिन देवी दुर्गा के सिद्धिदात्री रूप की पूजा की जाती है। उन्हें सिद्धियाँ प्रदान करने वाली माना जाता है। वह कमल पर बैठी हैं, जो अपने चार हाथों में कमल, शंख, गदा और चक्र धारण किये हुए हैं।
सिद्धिदात्री
श्वेता