निक्की कुमारी
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हिंदू धर्म में शादी के बाद महिला द्वारा पैरों में चांदी की बिछिया पहनने का रिवाज है। यह सुहाग की निशानियों में से एक मानी जाती है। आइए जानें आखिर महिलाएं बिछिया क्यों पहनती हैं।
यह सुहाग की निशानियों में से एक मानी जाती है। इसे दुल्हन के सोलह श्रृंगार का हिस्सा माना गया है। बिछिया पहनने से सुहागन स्त्री की सुंदरता तो बढ़ती ही है साथ ही इसके कुछ शारीरिक लाभ भी हैं।
सुहाग की निशानी
ज्योतिष के अनुसार यह मान्यता है कि बिछिया पहनने से वैवाहिक जीवन सुखमय व्यतीत होता है। पैर की दूसरी और तीसरी उंगली में बिछिया पहनने से पति से संबंध अच्छो होते हैं।
वैवाहिक जीवन होता है सुखी
रामायण काल से बिछिया का अस्तित्व है। इसका प्रमाण इससे मिलता है कि जब रावण सीता का हरण करके ले जा रहा था, तब सीता ने बिछिया को निशानी के तौर पर फेंक दिया था।
रामायण काल से बिछिया
चांदी को शरीर के लिए एक अच्छा धातु माना गया है। बिछिया पहनने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और अपनी कृपा बनाए रखती हैं। इससे आपको सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
मां लक्ष्मी की कृपा
महिलाओं को चांदी की बिछिया पैर की मध्यमा उंगली में पहननी चाहिएं। चांदी में पृथ्वी की ध्रुवीय ऊर्जा को अवशोषित करने की क्षमता होती है और ये चंद्रमा की धातु मानी जाती है।
मजबूत होता है चंद्रमा
पांव की बीच की तीन उंगलियों की नस महिलाओं के गर्भाशय और दिल से संबंध रखती हैं। दोनों पैरों की उंगलियों में बिछिया पहनने से प्रजनन क्षमता मजबूत होती है।
प्रजनन क्षमता बढ़े
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