इस तरह करें जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल जी का श्रृंगार  

Janmashtami 2023

प्रतिमा सिंह

वृंदावन के रहने वाले विजय जो यहां सालों से रह रहे हैं। वह श्री कृष्ण की अलग-अलग मूर्तियों के श्रृंगार का काम करते हैं।

विजय ने बताया कि भगवान की मूर्ति के श्रृंगार को अंगराग भी कहा जाता है, जिसके लिए एक्रेलिक कलर का इस्तेमाल होता है।

दरअसल, अंगराग  चंदन, केसल, कपुर, कस्तुरी आदि सुगंधित द्रव्यों का मिला हुआ लेप होता है, जो अंग में लगाया जाता है ।

मूर्ति के श्रृंगार के लिए सबसे पहले मत्स्य आकार में नेत्रों को कटाक्ष दिया जाता है। ताकि वह बिल्कुल असली आंखों जैसी लगे।

इसके बाद एक्रेलिक कलर से ठाकुर जी के होंठ, बालों को रंगा जाता है। साथ ही हाथ और पैरों में महावर लगाया जाता है।

 महावर लगाने के बाद भगवान के शरीर पर अलग-अलग तरह के बेल, फूल, पत्तियों से भी श्रृंगार किया जाता है।

वहीं श्री कृष्ण के प्रिय मोर पंखों से बाजूबंद बनाए जाते हैं। कई लोग भगवान के कपड़ों को भी अंगराग करवाते हैं।

इसके अलावा भक्तों की आस्था के अनुसार तिलक किए जाते हैं। जिसमें कई संप्रदायों के तिलक शामिल होते हैं।

शुभ फल पाने के लिए ये 6 राशि वाले लोग कान्हां को इस रंग के पहनाएं पोशाक 

Janmashtami 2023:

प्रतिमा सिंह