By Sapna Jha
Caffeinated Historians
Caffeinated Historians
मनुष्य को कर्म किसी उम्मीद या आशा से नहीं करना चाहिए। यदि किसी से अपेक्षा से कोई कार्य किया जाएगा तो वह उसके पूरी होने के मोह में बंध जाएगा।
गीता के अनुसार प्रकृति में कुछ भी स्थाई नहीं है। इन बदलावों की वजह से ही जीवन में, रोग- नीरोग तथा सुख दु:ख चलते रहते हैं।
गीता के अनुसार जीवन का आनंद ना तो बीते हुए कल और ना ही भविष्य में है।
फल की इच्छा किए बिना कर्म करते रहना चाहिए। आलस छोड़कर लगातार कर्म करते रहना चाहिए।
BY NIKKI MISHRA