मधु गोयल
सनातन शास्त्रों में धनतेरस के पर्व का विशेष महत्व है। हर साल धनतेरस कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाया जाता है।
दिवाली के आरंभ का प्रतीक धनतेरस 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा। त्रयोदशी तिथि सुबह 10:31 से शुरू होकर अगले दिन दोपहर 1:15 पर खत्म होगी।
धनतेरस की पूजा का शुभ मुहूर्त 29 अक्टूबर को शाम 6 बजकर 31 मिनट से रात 8 बजकर 13 मिनट तक है।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की उपासना करने से जीवन में कभी भी पैसों की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है।
हिंदू धर्म में झाड़ू को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। धनतेरस के दिन झाड़ू लाने से घर में बरकत आती है और देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
धनतेरस के शुभ अवसर पर बर्तन और सोने-चांदी की खरीदारी भी शुभता लाती है। साथ ही इस दिन वाहन और जमीन-जायदाद का भी सौदा कर सकते हैं।
धनतेरस के दिन शाम को घर के बाहर एक दिया जलाया जाता है। इसको यम दीपम कहा जाता है। यह दीपक मृत्यु के देवता यमराम के लिए जलाया जाता है।
ऐसी मान्यता है कि यम के नाम इस दिन दीपदान करने से यमदेव खुश होते हैं और परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु से रक्षा करते हैं।
मधु गोयल