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समझ ही साधना है – मुनिश्री तरुणसागरजी

अगर भीतर की आंख न खुले तो बाहर की आंख सिर्फ मयूर-पंखी आंख बन कर रह जाती है। हिय की आंख खुलनी चाहिए। आदमी में समझ पैदा होनी चाहिए, समझ ही हर समस्या का समाधान है।