आमिर खान और किरण राव ने डिवोर्स लेने का फैसला किया है। ये सब इतने सामान्य तरीके से किया गया है कि इसे अब डिवोर्स को सामान्य तरह से देखने की पहल माना जाना चाहिए। पति-पत्नी के डिवोर्स के बाद भी जिंदगी होती है और ये सामाजिक बदलाव से ज्यादा व्यक्तिगत सुख-शांति का मामला है। डिवोर्स के बाद दोबारा शादी भी ठीक इसी तरह व्यक्तिगत मामला है और सबको अधिकार है दोबारा खुशी ढूंढने का। ये सोच यहां तक तो सब ठीक है लेकिन परेशानी तब आती है जब यही बात आपको अपने पेरेंट्स को समझानी हो। ये काम कठिन बिलकुल नहीं होगा अगर आप कुछ तरीकों से उन्हें ये बात समझाएंगी,इन तरीकों के साथ डिवोर्स के बाद दोबारा शादी के निर्णय में आपके पेरेंट्स को आप आपने साथ खड़ा पाएंगी। कौन से हैं ये तरीके जान लीजिए-

शुरू से पता हो-

माता-पिता कितने भी मॉडर्न क्यों न हों लेकिन उन्हें बच्चों के डिवोर्स फिर दूसरी शादी के बारे में सुनकर एक धक्का तो लगता ही है। ऐसे में ये जरूरी है कि उनको तलाक के बाद शादी की बात को शुरू से बताया जाए। जब आपका मन इस पड़ाव के लिए बन जाए तो आप पेरेंट्स को ये बात बताएं जरूर। फिर जब आपको कोई ऐसा मिल जाए या आप पार्टनर ढूंढने की शुरुआत करें तो भी उनके कान में ये बात जरूर डाल दें। इस तरह से वो धीरे-धीरे खुद को तैयार कर सकेंगे। अगर वो इसका विरोध करेंगे तो भी सारा मामला सामने आ जाएगा। कुलमिलाकर आपको ये बात अचानक से उन्हें नहीं बतानी है।

काश आपका भी परिवार होता-

आपको पेरेंट्स के सामने सबकुछ सीधे तौर पर नहीं कहना है बल्कि उनको कई बार छोटे-छोटे हिंट भी देने हैं। जैसे‘काश कि मेरी भी फैमिली होती’, ‘मेरा कोई साथी नहीं है’। इस तरह की बातें सुनकर हो सकता है कि पेरेंट्स खुद ही आपसे दूसरी शादी करने के लिए कहें। इस तरह से आपको उनको राजी करने के लिए कोई खास मेहनत करनी भी नहीं होगी।

जब दोस्ती हो-

हर रिश्ते की शुरुआत दोस्ती से ही होती है। आपके साथ भी ऐसा ही हुआ होगा तो जब भी आप अपने पार्टनर से मिलें और ये रिश्ता दोस्ती तक ही हो,तब ही अपने पेरेंट्स को बता दें। उन्हें बता दें कि ये आपके दोस्त हैं और इस दोस्त से ही हो सकता है कि पेरेंट्स इतने खुश हो जाएं कि खुद ही आपसे उसे पार्टनर बनाने के लिए कह दें। इसलिए सीधे पार्टनर बनाकर पेरेंट्स से मिलवाने की बजाए उसे दोस्ती के दौर में ही मिलवा लें।

विरोध न करें-

 हो सकता है आपके निर्णय को लेकर पेरेंट्स खुद ही तैयार हो जाएं या हो सकता है कि वो आपकी बात का विरोध करें। अब इस वक्त ये बिलकुल भी जरूरी नहीं है कि आप उनके विरोध का विरोध करें। आप उन्हें हमेशा शांत मन से मनाने की कोशिश करें। ना कि उन पर चिल्लाएं या फिर गुस्सा करें। आप जब शांत मन से उन्हें बताएंगी तो जरूर मानेंगे। फिर जब उनके आशीर्वाद से ये होगा तो आपको जरूर अच्छा लगेगा।

परिवार का कोई हो खास-

आप अपने निर्णय में परिवार के किसी खास को अपना खास जरूर बना लें। ये खास व्यक्ति आपकी बात में आपका खूब साथ देगा और आपके पेरेंट्स को भी मना लेगा। ये वो शख्स होगा जिस पर आपके पेरेंट्स भी खूब विश्वास करते होंगे। ये आपके भाई-बहन भी हो सकते हैं और चाचा-चाची भी। कोई दोस्त हो सकता है या दादा या दादी भी।

अब आपका निर्णय चलेगा-

हो सकता है आपकी पहली शादी आपके पेरेंट्स की पसंद से हुई हो। अगर ऐसा हुआ था तो फिर इस बार बारी आपकी है। निर्णय आप लेंगी कि आपका जीवन साथी कौन होगा। आप पेरेंट्स से कहिए कि परेशानियों का सामना करने के बाद भी आपने उस रिश्ते को 100 प्रतिशत दिया जिसे उन्होंने चुना था। लेकिन अब बारी आपकी है। ये निर्णय आप लेंगी कि आपका पार्टनर कौन होगा। ये बात आप अपने पेरेंट्स को सीधे तौर पर कह दीजिए ताकि वो इसके लिए तैयार रहें कि आप अपने लिए पार्टनर ढूंढ रही हैं।

पार्टनर का बच्चों के साथ बॉन्ड-

अगर आपके बच्चे भी हैं तो ये जरूरी हो जाता है कि आपके बच्चे उनके साथ अच्छा रिश्ता रखते हों। अगर ऐसा होगा तो पेरेंट्स के लिए आपकी दोबारा शादी के लिए सोचना जरा और आसान हो जाएगा। वो आपकी खातिर न सही तो बच्चों की खातिर तो खुद के विचारों को बदल ही लेंगे। आप भी इस शादी से ये सोच कर संतुष्ट होंगी कि आपके बच्चों को कोई दिक्कत नहीं होगी।

वो सही हों-

इस बात को भी एक बार सोचें जरूर कि हो सकता है पेरेंट्स सही हों। वो आपके दोबारा शादी से नहीं बल्कि पार्टनर से दिक्कत महसूस कर रहे हों। इसलिए उनकी बात सुनिए जरूर। उनसे कहिए कि वो अपनी बात कहें और फिर आप उन्हें समझें कि उनके कारण क्या-क्या हैं।

 

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