यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब हर किसी के पास अलग अलग हो सकता है। इस सवाल के जवाब के शुरुआत में अपने आप से करते हैं मेरा मानना है कि ससुर और दमाद के बीच का रिश्ता उस मोती की माला के जैसे होना चाहिए जिनको बांधे रखने के लिए अगर एक तरफ बेटी है तो दूसरी तरफ पत्नी। इन दोनों रिश्तों का रंग आपस में इतना घुला मिला होना चाहिए कि पता ही ना लगे कि यह रंग किसका है। आपस में इतना प्रेम और मित्र स्वभाव होना चाहिए।

हर पिता अपनी बेटी को हमेशा खुश देखना चाहता है और हर बेटी के लिए भी उसका सबसे पहला हीरो उसके पिता ही होते हैं। जैसे जैसे बेटी बड़ी हो जाती है तो पिता की चिंता बढ़ती जाती है कि उसके लिए कोई ऐसा लड़का मिल जाए जो उसे किसी भी चीज का दुख न पहुंचने दे सके। बेटी की शादी हो जाती है तो एक ओर उसका पिता खुश होता है कि वह अब आगे खुश रहेगी। 

इस रिश्ते में सबसे ज्यादा जरूरत पड़ती है आपसी समझ की। शादी के बाद लड़की अपने पति में भी पिता की परछाई देखना चाहती है। कभी-कभी यह वजह भी टकराव की होती है लेकिन यदि आप सी प्रेम भाव रखें और एक दूसरे को समझे तो शायद रिश्तो को निभाना आसान होता है।

हमारे भारतीय समाज में लड़की को शिक्षा दी जाती है कि सास को मां समान माने। तो मेरे अनुसार दमाद को भी चाहिए कि वह अपने ससुर को पिता जैसा सम्मान दें उसकी देखभाल करे।

घर परिवार और समाज में रिश्तो को खूबसूरत बनाए रखना बेहद आवश्यक है और यह कोई इतना मुश्किल काम नहीं जरूरत है तो सिर्फ एक अच्छी समझ की देखभाल की हृदय से सम्मान की और स्नेह और प्यार से इन रिश्तो की नींव को मजबूत करने की। फिर चाहे कोई भी ससुर हो और कोई सा भी दमाद रिश्ता हमेशा आपस में सुलझा हुआ और समझ वाला ही रहेगा।

यदि हमारे समाज में ऐसा हो जाता है तो कभी भी बेटे और बेटी को लेकर कोई भेदभाव नहीं रहेगा।

असल में कुछ ऐसी पुराने सामाजिक परंपराएं हैं जो ससुर और दमाद के बीच 1 महीने से दीवार खड़ी कर देती हैं जिसे कभी-कभी पार्टनर दोनों के लिए ही मुश्किल हो जाता है। जैसे कि

-हमारे भारतीय समाज में लड़की को हमेशा पराया धन माना जाता है। इसलिए ही उसका कन्यादान किया जाता है और यही कारण है कि दामाद को दूसरे घर का माना जाता है।

-दामाद का दूसरा नाम जमाई भी है। जमाई यानी यम का रूप। शायद यही सोच दो परिवारों को मन से एक होने में मुश्किलें खड़ी करती है। इसलिए भी दामाद हमेशा आतंकी के रूप में ही देखा जाता है। भारतीय समाज में दामाद का मतलब है अकड़ू, गुस्सैल। -हालांकि कुछ सालों से यह सोच बदली भी है लेकिन मेरे अनुसार अभी इस सोच को और ज्यादा बदलने की जरूरत है।

-यदि हम शास्त्रों की बात करते हैं तो मान्यताओं के अनुसार ससुराल के किसी भी आर्थिक सहयोग में दामाद का सहयोग वर्जित माना गया है।

-और तो और मान्यताओं के अनुसार अंतिम संस्कारों में भी दामाद कोई सहयोग नहीं करता। यहां तक कि उसको अंतिम दर्शनों से भी दूर रखा जाता है। इसलिए उसे पुत्र समान कोई भी कार्य करना वर्जित है।

-जबकि दूसरी ओर विवाह के पश्चात बेटी के अपनी ससुराल के प्रति सैकड़ों कर्तव्य खड़े हो जाते हैं। उन कर्तव्यों की लिस्ट इतनी बड़ी है जिसकी कोई सीमा नहीं। यही भेदभाव दामाद और ससुर का रिश्ता यह दामाद का रिश्ता ससुराल के प्रति सामान्य होने में रुकावट पैदा करता है।

एक ससुर और दामाद के बीच अच्छे रिश्ते की नींव कैसे रख सकते हैं?

पत्नी का परिवार अपना परिवार समझे

जैसे पत्नी अपने पति के परिवार को अपना मान कर अपने सारे कर्तव्य निभाती है। उसी प्रकार पति को भी अपनी पत्नी के परिवार को अपना मान कर अहमियत देनी चाहिए।

पत्नी को अपने परिवार से मिलने दें

कुछ लड़के शादी के बाद पत्नी पर ज्यादा रोका टोकी करते हैं। वह उसे उसके परिवार वालों से मिलने से भी नाखुश होते हैं। यदि आप अपनी पत्नी को परिवार से मिलने देंगी तो वह खुश रहेगी। साथ ही आप के प्रति अपने कर्तव्य को मन से निभा सकेगी।

सास ससुर के साथ नरम व्यवहार अपनाएं

शादी के बाद जरूरी है कि आप अपने ससुराल वालों के प्रति नरम रुख रखें और उनसे खुलकर बात करें।

छोटे-छोटे झगड़ों के लिए परेशान न करें

यदि आप पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर अनबन है तो बहुत जरूरी है कि आप आपस में ही अपने झगड़ों को सुलझा लें। यह नहीं कि आप छोटे छोटे झगड़ों के लिए अपने ससुर या सास को परेशान करें।

ससुराल वालों को हर समय दोष न दें

अच्छा होगा यदि आप अपना मन साफ रखें। अगर दामाद मान कर हमेशा अकड़ में रहेंगे तो आपसी संबंध कभी भी सुलझे नहीं रहेंगे। हो सकता है कि आपको लगता हो, आपके ससुराल वाले आपकी पत्नी को सिखा रहे हैं। तो ऐसा शक मन से निकाल दें। क्योंकि कोई भी मां बाप यह नहीं चाहेगा कि उसकी बेटी सुखी ना रहे और बेटी का सुख आपके साथ खुश रहने में ही है।

एक दूसरे के मान सम्मान का ध्यान रखें

ससुर को भी अपने दामाद को पूरी इज्जत और प्यार देना चाहिए। फूलों की जिम्मेदारी बनती है कि एक दूसरे पर हावी होने की कोशिश न करें। अगर आप दोनों एक दूसरे से अधिक मिलते जुलते नहीं हैं तो भी आप दोनों के बीच के संबंध अच्छे रहने चाहिए। दोनों के बीच इज्जत का होना तो बहुत आवश्यक होता है।

बदल रही है रिश्तो की परिभाषा

हालांकि अब रिश्ते की परिभाषा बदल गई है। दोनों के बीच की संकोच की दीवार गिरी है। एक दूसरे से बिना किसी हिचकिचाहट के दोनों ही विचारों का आदान-प्रदान भी करते हैं, बात भी करते हैं, साथ ही एक दूसरे के लिए समय भी निकालते हैं। दोनों ही सुख दुख में साथ खड़े हुए भी दिखते हैं। बहुत से घरों में तो बेटे से बेहतर है दामाद का रिश्ता। आज के समय में ऐसे बहुत से घर मिल जाएंगे यहां पर ससुर दामाद को बिल्कुल अपने बेटे के रूप में देखता है तो दामाद भी बेटे से बढ़कर सुख दुख में साथ निभाता है। वाकई यह रिश्ता बहुत खूबसूरत है। जरूरत है तो बस इस रिश्ते के प्रति सब लोगों को नजरिया बदलने की।

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