पर्यावरण संरक्षण को लेकर राष्ट्रीय,अंतर्राष्ट्रीय एवं व्यक्यिक स्तर पर कई प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसा ही एक प्रयास स्वीडन की रहने वाली 16 वर्षीय छात्रा ग्रेटा थनबर्ग कर रही हैं। पर्यावरण को लेकर ग्रेटा ने जो मुहिम चलाई है उसकी आज विश्व भर में चर्चा हो रही है।

नौ वर्ष की उम्र में शुरुआत

ग्रेटा जब नौ साल की थीं, तब स्कूल में उन्होंने क्लाइमेट चेंज के बारे में पहली बार पढ़ा था। क्लाइमेट चेंज पर बदलाव लाने के लिए तब से ही उन्होंने इस विषय पर रिसर्च करनी शुरू कर दी थी। बकौल ग्रेटा, ‘किताबों में पानी बचाने, अनावश्यक जल रही लाइट बंद करने, खाना वेस्ट न करने की बात तो की जाती है, लेकिन असल जिंदगी में इसका पालन लोग नहीं करते। यह देख उन्होंने इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया।

स्कूल स्ट्राइक से आई चर्चा में

अगस्त 2018 में अपने पर्यावरण हड़ताल अभियान की बदौलत ग्रेटा ने दुनियाभर का ध्यान अपनी ओर खींचा था। क्लाइमेट चेंज के विरोध के लिए वह ना सिर्फ स्वीडिश संसद के सामने धरने पर बैठी बल्कि उन्होंने स्कूल जाना बंद कर दिया था। ग्रेटा पिछले साल अगस्त से हर शुक्रवार स्कूल जाने की बजाय स्वीडन की संसद के सामने जलवायु परिवर्तन पर ठोस कार्रवाई के लिए प्रदर्शन करती हैं। वह इस मुद्दे पर ‘स्कूल स्ट्राइक का चेहरा बनकर उभरी हैं। इतना ही नहीं, हजारों स्कूल के बच्चों ने उसके सपोर्ट में स्कूल जाना बंद कर दिया था।

यूएन में दिया था भाषण

दिसंबर 2018 पोलैंड में हुई क्लाइमेट चेंज कॉन्फ्रेंस में उन्होंने जलवायु परिवर्तन पर जोरदार भाषण दिया था। वहां दिए भाषण में उन्होंने कहा था कि, ‘हमें धरती के नीचे मौजूद तेल और खनिज भंडारों को बचाने की जरूरत है, साथ ही दुनिया में समानता लाने पर ध्यान देने की जरूरत हम दुनिया के नेताओं से भीख मांगने नहीं आए हैं। आपने हमें पहले भी नजरअंदाज किया है और आगे भी करेंगे। अब हमारे पास वक्त नहीं है। हम यहां आपको यह बताने आए हैं कि पर्यावरण खतरे में है। ग्रेटा के इस भाषण को कार्यकर्ताओं के साथ-साथ राजनीतिक नेताओं ने भी खूब सराहा। पिछले वर्ष 2018 में ग्रेटा को पर्यावरण के मुद्दे पर बोलने के लिए TEDx Stockholm में वक्ता के रूप में भी बुलाया गया था। ग्रेटा के विचारों से प्रभावित होकर उन्हें दावोस में हुई वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम में भी आमंत्रित किया गया था। जहां पर उनक भाषण को सुनकर लोग हैरान रह गए थे। ग्रेटा को टाइम मैगजीन ने वर्ष 2018 की सबसे प्रभावशाली किशोरी के तौर पर शामिल किया था।

नोबल पुरस्कार के लिए हुई नॉमिनेट

आज पूरे विश्व में अपनी पहचान बना लेने वाली ग्रेटा को नार्वे के 3 सांसदों द्वारा ‘नोबेल शांति पुरस्कार’ के लिए नॉमिनेट किया गया है। संसदीय प्रतिनिधि का कहना है, ‘हमने ग्रेटा को नामांकित इसलिए किया है क्योंकि जलवायु का खतरा, युद्ध और संघर्ष के सबसे महत्त्वपूर्ण कारणों में से एक हो सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी दिया संदेश

ग्रेटा ने अपनी मुहिम के तहत दुनियाभर के राष्ट्राध्यक्षों के नाम अलग-अलग वीडियो मैसेज जारी किए हैं, जिसमें उन्होंने जलवायु परिवर्तन को लेकर कुछ गंभीर कदम उठाने के लिए कहा है। ग्रेटा ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम भी संदेश जारी किया था जिसमें उन्होंने कहा ‘प्रिय श्रीमान मोदी, जलवायु परिवर्तन की समस्या को लेकर अब सिर्फ बात करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि अब आपको इस बारे में कोई ठोस कदम उठाना ही होगा क्योंकि अगर आप पहले की तरह चलते रहे तो आप नाकाम होने जा रहे हैं। अगर आप फेल हुए तो मानव इतिहास के भविष्य में आपको एक बहुत बड़े खलनायक के रूप में याद रखा जाएगा और आप ऐसा नहीं करना चाहेंगे।

फ्राइडेज फॉर फ्यूचर

ग्रेटा की मुहिम का हिस्सा बनते हुए 15 मार्च 2019 के दिन विश्व के कई शहरों में स्कूली विद्यार्थियों ने पर्यावरण संबंधी प्रदर्शनों में भाग लिया और भविष्य में भी शुक्रवार के दिन ऐसा करने का फैसला लिया है, जिसे उन्होंने ‘फ्राइडेज फॉर फ्यूचर (अपने भविष्य के लिए शुक्रवार) का नाम दिया गया है। इस दिन दुनियाभर के कई शहरों में लाखों की संख्या में विद्यार्थी स्कूल न जाकर सड़कों पर उतरे थे। इस दिन को पर्यावरण के मुद्दे पर बच्चों और किशोरों की ओर से किए सबसे बड़े यत्न के तौर पर दर्ज किया गया। केवल यूके में ही 100 से ज्यादा शहरों और कस्बों में इस किस्म के प्रदर्शन किए गए हैं। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर की एकत्रता सबसे बड़ी थी, जिसमें 30,000 से ज्यादा बच्चे ‘पर्यावरण यात्रा में शामिल हुए थे। इसका उद्देश्य विश्व नेताओं का ध्यान पर्यायवरणीय तबाही की और दिलाना है।

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